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युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ रहा ओडीओपी, विधि मंत्री बोले-हर जिले में रोजगार की संभावनाएं
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लखनऊ। विधि मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा है कि व्यापार की दृष्टि से उत्तर प्रदेश एक बड़ा बाजार है। इसकी मांग को एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) एवं स्किल इंडिया के जरिये आसानी से पूरा किया जा सकता है। पीएम मोदी ने स्किल इंडिया का नारा दिया जो युवाओं को रोजगार से जोड़ने की मुहिम थी। ओडीओपी के जरिये हम युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ रहे हैं।
वे लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में वाणिज्य विभाग की ओर से ‘उद्यमिता, विकास, रोजगार सृजन एवं विकास का आधार’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का हर जिला किसी न किसी उत्पाद के लिए प्रमुख माना जाता है। चाहे बनारस की साड़ी हो या लखनऊ का चिकन। यहां रोजगार की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिवर्तन के वाहक हैं। उद्यमिता और समावेशी विकास को यदि धरातल पर उतारना है तो उसके लिए हमें छात्रों में उद्यम के गुणों का विकास करना होगा।
अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि इस सम्मेलन से कुछ व्यावहारिक सबक आएंगे। उद्घाटन सत्र को किरन चोपड़ा ने भी संबोधित किया। वहीं तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता प्रो. एसके श्रीवास्तव व प्रो. एपी तिवारी ने की।
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‘रोजगार सृजन का मतलब सिर्फ नौकरी देना नहीं’
मुख्य वक्ता जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली के प्रो. फुरकान कमर ने कहा कि व्यवसायियों को ब्रांड का नाम, उसकी वृद्धि एवं विकास व उद्यमिता के बारे में जानना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने अर्थव्यवस्था को बढ़ाने, विकसित करने व रोजगार के नए रास्ते खोजने की चुनौती है। रोजगार सृजन का मतलब यह नहीं है कि सबको नौकरी दी जाए, बल्कि हमें इंटरप्रेन्योरशिप विकसित करना होगा, ताकि युवा रोजगार मांगने वाले नहीं बल्कि रोजगार देने वाले बने।
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वे लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में वाणिज्य विभाग की ओर से ‘उद्यमिता, विकास, रोजगार सृजन एवं विकास का आधार’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का हर जिला किसी न किसी उत्पाद के लिए प्रमुख माना जाता है। चाहे बनारस की साड़ी हो या लखनऊ का चिकन। यहां रोजगार की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिवर्तन के वाहक हैं। उद्यमिता और समावेशी विकास को यदि धरातल पर उतारना है तो उसके लिए हमें छात्रों में उद्यम के गुणों का विकास करना होगा।
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अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि इस सम्मेलन से कुछ व्यावहारिक सबक आएंगे। उद्घाटन सत्र को किरन चोपड़ा ने भी संबोधित किया। वहीं तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता प्रो. एसके श्रीवास्तव व प्रो. एपी तिवारी ने की।
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‘रोजगार सृजन का मतलब सिर्फ नौकरी देना नहीं’
मुख्य वक्ता जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली के प्रो. फुरकान कमर ने कहा कि व्यवसायियों को ब्रांड का नाम, उसकी वृद्धि एवं विकास व उद्यमिता के बारे में जानना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने अर्थव्यवस्था को बढ़ाने, विकसित करने व रोजगार के नए रास्ते खोजने की चुनौती है। रोजगार सृजन का मतलब यह नहीं है कि सबको नौकरी दी जाए, बल्कि हमें इंटरप्रेन्योरशिप विकसित करना होगा, ताकि युवा रोजगार मांगने वाले नहीं बल्कि रोजगार देने वाले बने।