फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Nursing homes are getting referred from CHC.

Lucknow News: सीएचसी से रेफर करवा भिजवा रहे नर्सिंग होम

Wed, 01 May 2024 04:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Wed, 01 May 2024 04:15 AM IST
विज्ञापन
Nursing homes are getting referred from CHC.
रायबरेली। डीह सीएचसी से रेफर कराने के बाद चंद रुपयों के लिए आशा बहू प्रसूता शांती को लेकर एक निजी अस्पताल पहुंच गई। मानकविहीन अस्पताल में प्रसूता ने दम तोड़ दिया। हरचंदपुर की विशाखा को सीएचसी से रेफर करने के बाद उपमा सुर्जरानी पॉली क्लीनिक में भर्ती करा दिया गया। फर्जी डॉक्टर ने सर्जरी की, जिसके बाद नवजात की मौत हो गई। ऐसे रोजाना केस उजागर हो रहे हैं, जो स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों व अन्य स्टाफ और निजी अस्पतालों के मजबूत गठजोड़ की पोल खोल रहे हैं। रोजाना सीएचसी से 200 से अधिक मरीज रेफर किए जाते हैं, लेकिन 100 मरीज भी जिला अस्पताल नहीं पहुंचते। सेटिंग वाले निजी अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करके स्वास्थ्यकर्मी अपनी जेब भर रहे हैं।
विज्ञापन

जिले के सलोन, ऊंचाहार, बछरावां, लालगंज सहित अन्य सीएचसी के आसपास में ही कई मानकविहीन निजी अस्पताल संचालित हैं। निजी अस्पतालों के संचालक सीएचसी के चिकित्सकों व स्टाफ से सेटिंग बनाए रहते हैं। प्रत्येक मरीज को भर्ती कराने के रेट तय हैं। मोटी रकम कमाने के लिए मरीजों को कागज पर रेफर करके निजी अस्पतालों में भर्ती करवा दिया जा रहा है। सीएचसी अधीक्षकों को अवैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश हैं, लेकिन संचालकों से सेटिंग के कारण कार्रवाई के नाम महज कोरम पूरा किया जा रहा है।
विज्ञापन


74 अस्पतालों के जिम्मे 34 लाख की आबादी
सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर खानापूरी हो रही है। जिले की आबादी 34 लाख हो गई है, लेकिन इनके इलाज के लिए 19 सीएचसी और 55 पीएचसी ही संचालित हैं। अस्पतालों में जांच और इलाज के बंदोबस्त न होने का फायदा निजी अस्पतालों के संचालक उठा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


खुलेआम निजी प्रैक्टिस, नर्सिंगहोमों में करते इलाज
सरकारी अस्पतालों में तैनात कई चिकित्सक निजी प्रैक्टिस भी कर रहे हैं। कई चिकित्सक निजी अस्पतालों में चोरी-छिपे मरीजों का इलाज भी करते हैं। ओपीडी के दौरान मरीजों को अपने चहेते निजी अस्पताल में भर्ती होने और पैथोलॉजी से जांच करने की सलाह तक देते हैं। इसे रोकने के लिए शासन बार-बार प्रयास कर रहा है, लेकिन डॉक्टरों पर कोई असर नहीं पड़ रहा।

पीएचसी नहीं आते 20 डॉक्टर
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से सेटिंग करके ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में तैनात 20 से अधिक चिकित्सक अस्पताल नहीं आते हैं। वे जिले या जिले से बाहर निजी अस्पतालों से मोटी रकम कमा रहे हैं। अधिकारियों से सेटिंग होने के कारण उनपर कार्रवाई नहीं होती। हर माह वेतन भी दिया जा रहा है।


शिकायत मिलने पर की जाएगी कार्रवाई
सभी सीएचसी अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि मरीजों का बेहतर इलाज किया जाए। गंभीर मरीजों को ही जिला अस्पताल रेफर किया जाए। निजी अस्पतालों में मरीजों को भर्ती कराने की शिकायतें मिलने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed