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अब महिलाएं चौथे माह कर सकेंगी रक्तदान
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अब हर चौथे माह में ही रक्तदान कर पाएंगी महिलाएं
ड्रग एंड केमिस्ट एक्ट में बदलाव के चलते तीन माह की मियाद हुई खत्म
हिमांशु अवस्थी
अब स्वस्थ महिलाएं हर चौथे माह में ही रक्तदान कर पाएंगी। जबकि पहले यह मियाद तीन माह की थी। ऐसा ड्रग एंड केमिस्ट एक्ट में बदलाव के चलते हुआ है। जबकि पुरुष पहले की तरह तीन माह पर रक्तदान करेंगे। सभी ब्लड बैंक प्रभारियों को इस बारे में अपडेट भी कर दिया गया है।
वहीं, नए एक्ट में बदलाव के बाद ब्लड प्रेशर के रोगी भी स्वस्थ होने पर रक्तदान कर सकेंगे। जबकि पहले इस पर मनाही थी। एक्ट के मुताबिक, जो भी ब्लड प्रेशर के रोगी हैं, अगर उनका बीपी बिना दवा के कंट्रोल है तो वे भी रक्तदान कर सकते हैं। केजीएमयू के ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि एक्ट में बदलाव के तहत स्वस्थ महिलाएं अब चार माह पर ही रक्तदान कर सकेंगी।
राजधानी में चार फीसदी महिलाएं ही कर पाती हैं रक्तदान
हीमोग्लोबिन का स्तर 12 होने पर व्यक्ति को रक्तदान के लिए स्वस्थ माना जाता है। आमतौर पर महिलाओं का हीमोग्लोबिन दस या नौ के बीच रहता है। ऐसे में महिलाओं का रक्तदान का प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले कम हैं। अनुमान के मुताबिक, लखनऊ में चार प्रतिशत महिलाएं ही हीमोग्लोबिन का लेवल ठीक होने पर रक्तदान कर पाती हैं।
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देश में दस फीसदी महिलाएं ही रक्तदान करने योग्य
देश में करीब 35 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं और करीब दस से पंद्रह प्रतिशत महिलाएं ही रक्तदान कर पाती हैं। वजह है कम वजन, कम हीमोग्लोबिन और एनिमिक होना। पीजीआई ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रभारी प्रो. अनुपम वर्मा ने बताया कि महिलाओं में तमाम तरह की समस्या होने के चलते रक्तदान में उनका प्रतिशत महज दस ही रहता है। दस फीसदी महिलाएं ही पीजीआई में रक्तदान करने आती हैं। उधर, केजीएमयू ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की प्रभारी डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि केजीएमयू में खून दान करने वाली महिलाओं का प्रतिशत महज दो फीसदी है। इसकी वजह उनमें हीमोग्लोविन, वजन समेत अन्य समस्याएं हैं।
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ड्रग एंड केमिस्ट एक्ट में बदलाव के चलते तीन माह की मियाद हुई खत्म
हिमांशु अवस्थी
अब स्वस्थ महिलाएं हर चौथे माह में ही रक्तदान कर पाएंगी। जबकि पहले यह मियाद तीन माह की थी। ऐसा ड्रग एंड केमिस्ट एक्ट में बदलाव के चलते हुआ है। जबकि पुरुष पहले की तरह तीन माह पर रक्तदान करेंगे। सभी ब्लड बैंक प्रभारियों को इस बारे में अपडेट भी कर दिया गया है।
वहीं, नए एक्ट में बदलाव के बाद ब्लड प्रेशर के रोगी भी स्वस्थ होने पर रक्तदान कर सकेंगे। जबकि पहले इस पर मनाही थी। एक्ट के मुताबिक, जो भी ब्लड प्रेशर के रोगी हैं, अगर उनका बीपी बिना दवा के कंट्रोल है तो वे भी रक्तदान कर सकते हैं। केजीएमयू के ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि एक्ट में बदलाव के तहत स्वस्थ महिलाएं अब चार माह पर ही रक्तदान कर सकेंगी।
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राजधानी में चार फीसदी महिलाएं ही कर पाती हैं रक्तदान
हीमोग्लोबिन का स्तर 12 होने पर व्यक्ति को रक्तदान के लिए स्वस्थ माना जाता है। आमतौर पर महिलाओं का हीमोग्लोबिन दस या नौ के बीच रहता है। ऐसे में महिलाओं का रक्तदान का प्रतिशत पुरुषों के मुकाबले कम हैं। अनुमान के मुताबिक, लखनऊ में चार प्रतिशत महिलाएं ही हीमोग्लोबिन का लेवल ठीक होने पर रक्तदान कर पाती हैं।
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देश में दस फीसदी महिलाएं ही रक्तदान करने योग्य
देश में करीब 35 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं और करीब दस से पंद्रह प्रतिशत महिलाएं ही रक्तदान कर पाती हैं। वजह है कम वजन, कम हीमोग्लोबिन और एनिमिक होना। पीजीआई ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रभारी प्रो. अनुपम वर्मा ने बताया कि महिलाओं में तमाम तरह की समस्या होने के चलते रक्तदान में उनका प्रतिशत महज दस ही रहता है। दस फीसदी महिलाएं ही पीजीआई में रक्तदान करने आती हैं। उधर, केजीएमयू ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की प्रभारी डॉ. तूलिका चंद्रा ने बताया कि केजीएमयू में खून दान करने वाली महिलाओं का प्रतिशत महज दो फीसदी है। इसकी वजह उनमें हीमोग्लोविन, वजन समेत अन्य समस्याएं हैं।