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केजीएमयू ने खोजी तकनीक, ब्लैक फंगस से जबड़ा गंवाने वालों में प्रत्यारोपण संभव
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लखनऊ। पोस्ट कोविड समस्याओं के दौरान ब्लैक फंगस की वजह से अपना जबड़ा गंवाने वाले मरीजों में प्रत्यारोपण की उम्मीद जगी है। केजीएमयू के दंत संकाय में ब्लैक फंगस की वजह से जबड़ा गंवाने वाले दो मरीजों में नकली जबड़ा और दांत प्रत्यारोपित करने में सफलता मिली है। हैदराबाद में आयोजित कॉर्टिकोबैसल इम्प्लांटोलॉजी सम्मेलन में इस तकनीक को सम्मानित किया गया। केजीएमयू कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने इसके लिए पूरी टीम को बधाई दी।
केजीएमयू दंत संकाय के डॉ. लक्ष्य कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान काफी मरीज ब्लैक फंगस या म्युकरमाइसोसिस से पीड़ित थे। इससे उनका जबड़ा और दांत निकालने की नौबत आई थी। शोध के दौरान पाया गया कि इनमें नकली जबड़ा और दांत प्रत्यारोपित किए जा सकते हैं। दंत संकाय में शोध के दौरान दो मरीजों में नकली जबड़ा और दांत प्रत्यारोपित किए गए। हैदराबाद में आयोजित कॉर्टिकोबैसल इम्प्लांटोलॉजी में इसको रखा गया। इसके लिए केजीएमयू की दो छात्राओं डॉ. अदिति वर्मा और शोधार्थी डॉ. आस्था को सम्मानित किया गया। डॉ. लक्ष्य ने बताया कि म्यूकरमाइकोसिस से दोनों मरीजों के जबड़े की ऊपर की हड्डी लगभग नष्ट हो चुकी थी। टेरीगाइड और जाइगोमैटिक हड्डी ही बची थी। इसमें कॉर्टिकोबैसल इम्प्लांटोलॉजी तकनीक से नकली जबड़ा व दांत प्रत्यारोपित किया गया। इस प्रक्रिया में एक हफ्ता लगा। दोनों मरीज अब स्वस्थ हैं।
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केजीएमयू दंत संकाय के डॉ. लक्ष्य कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमण के दौरान काफी मरीज ब्लैक फंगस या म्युकरमाइसोसिस से पीड़ित थे। इससे उनका जबड़ा और दांत निकालने की नौबत आई थी। शोध के दौरान पाया गया कि इनमें नकली जबड़ा और दांत प्रत्यारोपित किए जा सकते हैं। दंत संकाय में शोध के दौरान दो मरीजों में नकली जबड़ा और दांत प्रत्यारोपित किए गए। हैदराबाद में आयोजित कॉर्टिकोबैसल इम्प्लांटोलॉजी में इसको रखा गया। इसके लिए केजीएमयू की दो छात्राओं डॉ. अदिति वर्मा और शोधार्थी डॉ. आस्था को सम्मानित किया गया। डॉ. लक्ष्य ने बताया कि म्यूकरमाइकोसिस से दोनों मरीजों के जबड़े की ऊपर की हड्डी लगभग नष्ट हो चुकी थी। टेरीगाइड और जाइगोमैटिक हड्डी ही बची थी। इसमें कॉर्टिकोबैसल इम्प्लांटोलॉजी तकनीक से नकली जबड़ा व दांत प्रत्यारोपित किया गया। इस प्रक्रिया में एक हफ्ता लगा। दोनों मरीज अब स्वस्थ हैं।
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