{"_id":"73185d7941052347cab5efb0b85ce487","slug":"now-ews-and-lig-houses-more-expensive","type":"story","status":"publish","title_hn":"महंगे हुए ईडब्ल्यूएस व एलआईजी मकान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महंगे हुए ईडब्ल्यूएस व एलआईजी मकान
शैलेंद्र श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Thu, 05 Dec 2013 10:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश में छोटे मकानों ईडब्ल्यूएस और एलआईजी के आवंटन व उसे बनाने की नई नीति गुरुवार को जारी कर दी गई।
विज्ञापन
नई नीति के तहत एक लाख रुपये तक की सालाना आय वाले ईडब्ल्यूएस और दो लाख तक वाले एलआईजी ले सकेंगे।
ईडब्ल्यूएस के लिए पहले 60 हजार और एलआईजी के लिए 1.20 लाख तक सालाना आय वाले ही पात्र थे। इनकी कीमतों में भी इजाफा किया गया है।
जारी हो गया शासनादेश
ईडब्ल्यूएस 2 लाख से बढ़ाकर 3.25 लाख व एलआईजी मकानों कीमत 4.25 लाख से बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दी गई है। इस नीति की सबसे खास बात यह है कि आवंटी पांच साल तक इसे बेच नहीं पाएंगे। प्रमुख सचिव आवास सदाकांत ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है।
नई नीति में मुताबिक विकास प्राधिकरण ईडब्ल्यूएस 30 से 35 वर्ग मीटर व एलआईजी 40 से 45 वर्ग मीटर में बनाएंगे। ग्रुप हाउसिंग में ईडब्ल्यूएस 25 से 35 व एलआईजी 35 से 48 वर्ग मीटर में बनाएंगे।
विज्ञापन
ईडब्ल्यूएस और एलआईजी घर (एकल) बनाने के स्थान पर ग्रुप हाउसिंग यानी अपार्टमेंट में बनाए जाएंगे। इन मकानों का निर्माण चार मंजिला से अधिक के अपार्टमेंट में किए जाएंगे।
विज्ञापन
लॉटरी सिस्टम से होगा चयन
सरकारी संस्थाएं और निजी विकासकर्ताओं के लिए यह अनिवार्य होगा कि योजना की कुल जमीन के 10 प्रतिशत भाग पर ईडब्ल्यूएस और इतने ही एलआईजी मकान बनाए जाएंगे। इन मकानों के लिए आने वाले आवेदनों का चयन लॉटरी सिस्टम से होगा। मकानों का आवंटन निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद किया जाएगा।
निजी विकासकर्ताओं को राहत
नई ईडब्ल्यूएस और एलआईजी नीति में निजी विकासकर्ताओं को बड़ी राहत दी गई है। इसमें इन मकानों को बनाने के लिए दी जाने वाली बैंक गारंटी 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है। बैंक की गारंटी न्यूनतम एक वर्ष की होगी और अब इसे लैप्स नहीं किया जा सकेगा।
यही नहीं चार हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल की आवासीय योजनाओं में यदि उसी स्थान पर ये मकान नहीं बन सकते तो दो किलोमीटर के अर्द्धव्यास के अंदर बनाने की छूट होगी।
निजी विकासकर्ता यदि इन मकानों को नहीं बनाना चाहते हैं तो इसके एवज में वे शेल्टर फीस दे सकेंगे। निजी विकासकर्ताओं को इन मकानों को बनाने के एवज में इन्सेंटिव देने की व्यवस्था भी की गई है।
मसलन फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) यानी अपार्टमेंट में अतिरिक्त मंजिला बनाने की इजाजत दी जाएगी।