गरीब बच्चों को आरटीई के तहत दाखिला न देने वाले 12 स्कूलों को नोटिस
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निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी करने वाले 12 स्कूलों को डीएम के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने नोटिस जारी किया है। इस स्कूलों के अड़ियल रवैये के चलते दुर्बल वर्ग के 73 बच्चों के एडमिशन फंसे हुए हैं।
नोटिस जारी करते हुए इन विद्यालयों को सात जुलाई तक अपना पक्ष रखने को कहा गया है। दाखिला या जवाब न देने पर इन स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आरटीई एक्ट के तहत निजी स्कूलों को उनके यहां की 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिला देना होता है। इन बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति राज्य सरकार को करनी होती है।
प्रदेश में वर्ष 2010 में अधिनियम लागू होने के पांच साल बाद पिछले साल से सरकारी स्तर पर आरटीई के तहत नि:शुल्क दाखिलों को लेकर कोशिश शुरू हुई है। इन कोशिशों पर कुछ स्कूलों की मनमानी आड़े आ रही है। इस साल आरटीई के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क दाखिले के लिए 2275 आवेदन फॉर्म आए हैं।
सत्यापन के बाद इन आवेदनों में से 1943 आवेदनों को जिला अधिकारी ने सही करार देते हुए नि:शुल्क दाखिले की अनुमति दी। इनमें से 416 बच्चों को नि:शुल्क दाखिला मिल चुका है। बाकी बच्चों में से 73 को छोड़कर जुलाई में एडमिशन देने का आश्वासन दिया है।
ये स्कूल कर रहे दाखिला देने में आनाकानी
सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, गुरुकुल एकेडमी, जयपुरिया, स्टडी हॉल, टेक्नो एकेडमी इंदिरानगर, लखनऊ कॉलेजिएट जॉपलिंग रोड, मॉर्डन स्कूल कपूरथला, निर्मला कॉन्वेंट आदिलनगर, सेंट एंथोनी अलीगंज, ब्राइट कॅरियर ठाकुरगंज, सीएचसी एकेडमी सज्जादबाग, नवयुग रेडियंस, राजेंद्र नगर।
आठ को प्रिंसिपल्स के साथ बैठक
जिला प्रशासन आरटीई मुद्दे पर निजी स्कूल के प्रिंसिपल्स के साथ आठ जुलाई को बैठक करेगा। बैठक में निजी स्कूलों को गरीब बच्चों को निशुल्क दाखिला देने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बीते साल भी सीएमएस सहित कई विद्यालयों ने निशुल्क दाखिले से मना कर दिया था। यहां तक कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सीएमएस ने 18 बच्चों को अपने यहां निशुल्क दाखिला दिया था। निशुल्क दाखिले के मामले में एक बार फिर से वही स्थिति बन रही है।
इन स्कूलों ने आरटीई के तहत एडमिशन के लिए भेजे गए बच्चों को दाखिला नहीं दिया है। इसलिए इनको नोटिस जारी किया जा रहा है। स्कूलों को सात जुलाई तक जवाब देने के लिए कहा गया है। सात जुलाई को आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
प्रवीण मणि त्रिपाठी
(जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी)