{"_id":"7e930b0e754eaf2bc802d0f70465f338","slug":"noida-farmhouse-scheme","type":"story","status":"publish","title_hn":"कभी भी उठ सकता है नोएडा फार्म हाउस घोटाले से पर्दा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कभी भी उठ सकता है नोएडा फार्म हाउस घोटाले से पर्दा
टीम डिजिटल/लखनऊ
Updated Tue, 05 Nov 2013 10:42 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मायावती सरकार के बहुचर्चित नोएडा फार्म हाउस घोटाले की जांच पूरी हो गई है।
विज्ञापन
लोकायुक्त जल्द ही अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें सरकार को भेज सकते हैं।
शिकायतकर्ताओं के असहयोगात्मक रवैये के चलते जांच में वित्तीय अनियमितता संबंधी आरोपों की पुष्टि तो नहीं हो पाई है।
लेकिन आवंटन में मनमानी और अपात्र लोगों को फार्म हाउस आवंटित किए जाने की पुष्टि जरूर हुई है।
लोकायुक्त अपनी रिपोर्ट में नोएडा के कुछ तत्कालीन आला अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही अपात्र लोगों का आवंटन रद्द करने की सिफारिश कर सकते हैं।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार फार्म हाउस आवंटन घोटाले की जांच पूरी करने के बाद लोकायुक्त अब रिपोर्ट को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसी सप्ताह सरकार को रिपोर्ट भेज दिए जाने की संभावना है।
MP ने 2.9 लाख गरीबों को दी शिक्षा, यूपी ने 94
विज्ञापन
जांच में कुछ प्राइवेट कंपनियों के फार्म हाउस के लिए फर्जी दस्तावेज लगाए जाने का खुलासा हुआ है तो कुछ रसूखदार लोगों के दूसरे के नाम पर आवंटन कराने की बात सामने आई है।
विज्ञापन
मायावती शासनकाल में राज्यपाल को ज्ञापन देकर नोएडा फार्म हाउस आवंटन में 5000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाने वाले भाजपा नेताओं की ओर से साक्ष्य उपलब्ध न कराए जाने की वजह से लोकायुक्त को जांच आवंटन प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी तक ही सीमित रखनी पड़ी।
तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में
सूत्रों का कहना है कि आवंटन में हुई गड़बड़ियों को लेकर नोएडा के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में है।
फार्म हाउस की जमीन के मूल्यांकन से लेकर खास आवंटियों को फायदा पहुंचाने के लिए भी कायदे-कानून की अनदेखी की गई है।
सूत्रों की मानें तो फर्जी दस्तावेज के आधार पर फार्म हाउस कराने आवंटित कराने वालों के साथ-साथ पूरे मामले से पल्ला झाड़ने वाले कुछ अन्य के करीब एक दर्जन से ज्यादा आवंटनों को रद्द करने की सिफारिश की जा सकती है।
अथॉरिटी के एक पूर्व चेयरमैन व सीईओ, पूर्व ओएसडी समेत कई अभियंताओं की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। इनके खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई किए जाने की सिफारिश की जा सकती है।