...तो इसलिए मोदी को टक्कर नहीं दे पा रही सपा
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सपा लोकसभा चुनाव में भले ही अधिक सीटें लाने का दावा कर रही हो लेकिन पार्टी के भीतर किसी स्टार की कमी से प्रचार अभियान में खासा दिक्कत हो रही है।
सपा को भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से टक्टर लेने के लिए न तो कोई स्टार मिल रहा है और न ही उनके पास देश भर में लोकप्रिय कोई नेता है।
चुनाव में स्टार प्रचारक नेताओं के कार्यक्रम वगैरह लगाने वाले एक नेता कहते हैं कि नेताजी और अखिलेश की सभाओं के लिए इतने प्रस्ताव आ गए हैं कि समझ में नहीं आता कि कहां का कार्यक्रम लगाएं, कहां का काटें।
बातचीत की रौ में यह भी कह जाते हैं कि और कोई ऐसा है ही नहीं जिसे बुलाने के लिए प्रत्याशी बेताब हों।
फिल्म कलाकार भी तैयार नहीं
अंदरूनी बात कुछ और भी है। दरअसल, इस बार सपा के पास स्टार प्रचारकों का टोटा हो गया है।
फिल्मनगरी में खास दखल रखने वाले व सियासी मैनेजमेंट में माहिर अमर सिंह व जयाप्रदा राष्ट्रीय लोकदल में सक्रिय हैं।
भोजपुरी स्टार मनोज तिवारी का सपा से मोहभंग हो गया है और वह दिल्ली में नमोराग गाने में व्यस्त हैं। संजय दत्त जेल में बंद हैं।
पिछला लोकसभा चुनाव लखनऊ से लड़ने वाली मिस इंडिया रह चुकी नफीसा अली ने काफी पहले लाल टोपी उतार दी है। राजबब्बर ने तो 2007 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा से नाता तोड़ लिया था।
आजम खां पर प्रतिबंध लगने से लगा झटका
सपा को अपने मंत्री आजम खां पर चुनाव आयोग की तरफ से प्रतिबंध लग जाने से भी तगड़ा झटका लगा है क्योंकि अखिलेश और मुलायम के अलावा प्रत्याशी उन्हें भी अपने यहां सभा के लिए बुलाना चाहते थे।
इसके अलावा अपनी बौद्धिक प्रखरता से माहौल बनाने वाले जनेश्वर मिश्र, मोहन सिंह व बृजभूषण तिवारी इस दुनिया में नहीं रहे।
पार्टी की राज्यसभा सदस्य जया बच्चन भी किसी बात पर मुंह फुलाए बैठी हैं और पार्टी प्रत्याशियों के प्रचार के लिए घर से नहीं निकल रही हैं।
कहा जा रहा है कि पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के नेता अबू आजमी द्वारा अमिताभ बच्चन पर की गई एक टिप्पणी के बाद से वह पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं।
अब सब कुछ नेताजी और अखिलेश पर
कुल मिलाकर सारा दारोमदार मुलायम व अखिलेश पर है। पूरब से पश्चिम तक व अन्य प्रदेशों में यही दोनों पार्टी की नीति-रीति का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।
स्टार प्रचारकों की कमी से प्रत्याशी चाहे जितना असहज महसूस कर रहे हों। पर, पार्टी के प्रदेश महासचिव डॉ. सीपी राय कहते हैं कि पिछले विधानसभा चुनाव में प्रचार का सारा जिम्मा मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव के ही कंधे पर था।
इन्हीं के बल पर पार्टी ने विधानसभा चुनाव में बहुमत हासिल किया। इस बार भी वैसा ही होगा। फिल्मी चेहरों की कमी की वजह से पार्टी के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला।
ऐसे में सवाल ये उठता है कि सूबे में बदले राजनीतिक समीकरणों के बाद सपा किस तरह चर्चा में बनी रहेगी, जबकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहले ही मान चुके हैं कि देश में मोदी के पक्ष में माहौल है।