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यूपी सचिवालय में भी ‘जासूसी’ के पूरे मौके

Sun, 01 Mar 2015 01:01 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 01 Mar 2015 01:01 AM IST
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No security in UP Sachivalaya.

अभी हाल ही केंद्र सरकार के मंत्रालयों में सरकारी दस्तावेजों की जासूसी के आरोपों में कई कर्मचारी और कॉरपोरेट एजेंट जेल जा चुके हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के सचिवालयों में भी ‘जासूसी’ के पूरे मौके हैं।

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यहां अवांछित गतिविधियों पर नजर रखने वाले मुख्य सतर्कता अधिकारियों की तैनाती सिर्फ कागजों में है तो इतने संवेदनशील परिसर में आउटसोर्स कर्मी व्यवस्था का हिस्सा बन चुके हैं।
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प्रदेश मुख्यालय पर विधान भवन, एनेक्सी से लेकर बापू भवन, योजना भवन और जनपथ तक विभागों के सचिवालय हैं। इनमें करीब दस हजार कर्मी कार्यरत हैं। सचिवालय नियम-संग्रह नियमावली में जरूरी गोपनीयता बनाए रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं।
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बिंदु 30 (क) में व्यवस्था है कि हर प्रमुख सचिव या सचिव अपने विभाग में मुख्य सतर्कता अधिकारी (चीफ विजिलेंस ऑफिसर) नामित करेगा जो अनुसचिव के स्तर से नीचे का नहीं होगा। हालांकि, सचिवालय में इस तरह के विजिलेंस ऑफिसर की नियुक्ति सिर्फ कागजी है।

फर्जी नियुक्तियों से लेकर फर्जी पास बनवाने के मौके

No security in UP Sachivalaya.

इन विजिलेंस ऑफिसर की सक्रियता से हाल में किसी मामले का खुलासा हुआ हो, इसकी कोई मिसाल नहीं मिलती। इस बीच सचिवालय में फर्जी नियुक्तियों से लेकर फर्जी पास तक के मामले उजागर हो चुके हैं।

केंद्रीय सेवा में काफी समय बिताने के बाद सूबे की सेवा में आए एक अधिकारी कहते हैं कि दिल्ली में बड़े स्तर पर सुरक्षा का बंदोबस्त हैं। इसके बावजूद वहां इतना बड़ा खेल चल रहा था। यहां सचिवालय में तो कई स्तर पर ‘जासूसी’ की गुंजाइश है।

मसलन, सचिवालय में आउटसोर्स के आधार कर्मियों को बिना पुलिस वेरीफिकेशन के तैनाती दी जाती रही है। नियमित कर्मचारी न होने से इन पर कोई जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। बहुत कम मानदेय पर रखे वाले इन कर्मियों की सत्यनिष्ठा परखने और उस पर उन्हें कायम रखने का कोई मैकेनिज्म नहीं है।

आउटसोर्स पर काफी पढ़े-लिखे लोग भी आ रहे हैं, जिनके हाथों से गोपनीय पत्रावलियां इधर-उधर होती हैं। यदि इनमें से कोई इसका दुरुपयोग करना चाहे तो आराम से कर सकता है। अधिकारी बताते हैं कि कई बार अनुभव किया कि जिस मामले में बंद कमरे में चर्चा और फैसले हुए, उसके बदलाव के प्रेशर आने लगते हैं। यह बताता है कि सिस्टम में कहीं लोचा है।

सीसीटीवी कैमरे तक नहीं

No security in UP Sachivalaya.

केंद्रीय मंत्रालयों में बड़े पैमाने पर जांच-पड़ताल की व्यवस्था के साथ ही सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जबकि यहां सचिवालय में ऐसी व्यवस्था नहीं है। विभागों में तो सीसीटीवी कैमरे हैं ही नहीं। ऐसे में यहां कोई भी कितना भी वक्त गुजार सकता है, गोपनीय दस्तावेज देख सकता है।

सचिवालय की पास व्यवस्था भी दुरुस्त नहीं है। कुछ दिन पहले इसका खुलासा हो चुका है। इस मामले में बाहरी लोगों के अलावा सचिवालय कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर तक हो चुकी है। ऐसे में सचिवालय की सुरक्षा व्यवस्था व गोपनीयता के लिहाज से नए सिरे से गौर किया जाना चाहिए।

इस पर सचिवालय प्रशासन सचिव प्रभात मित्तल का कहना है कि सचिवालय के सभी विभाग मुख्य सतर्कता अधिकारी की नियुक्ति करते हैं। इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाएगा। पास व्यवस्था में भी सुधार किया गया है।

अब सचिवालय में कार्यरत अधिकारी की ओर से जारी पास पर ही कोई सचिवालय में आ सकता है। समय-समय पर व्यवस्था की समीक्षा की

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