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‘पिछड़े’ सभी छात्रों को नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति

Sun, 29 Mar 2015 10:20 AM IST
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ
अजीत बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 29 Mar 2015 10:20 AM IST
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No scholarship for all OBC students.

बजट खत्म हो जाने से पिछड़े वर्ग के तीन लाख से ज्यादा छात्रों को छात्रवृत्ति और शुल्क की भरपाई नहीं हो सकी। पिछड़ा वर्ग निदेशालय ने पूर्व दशम छात्रवृत्ति योजना में बचे 200 करोड़ रुपये के इस्तेमाल की अनुमति शासन से मांगी है।

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हालांकि, इस रकम के इस्तेमाल की अनुमति मिलने पर भी कक्षा 10 से ऊपर के करीब डेढ़ लाख छात्र लाभ पाने से वंचित रहेंगे। उधर, समाज कल्याण विभाग ने भी अनुसूचित जाति व जनजाति के 5.5 लाख और सामान्य वर्ग के 3 लाख विद्यार्थियों के खातों में रकम भेज दी है।
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दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत दो लाख रुपये तक सालाना आय वाले परिवार के बच्चों को छात्रवृत्ति देने के साथ ही उनकी फीस की भरपाई की जाती है।
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वर्ष 2014-15 में इसके लिए पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को 862 करोड़ रुपये का बजट दिया गया था। इससे पिछड़े वर्ग के कुल 14.21 लाख विद्यार्थियों को लाभ दिया जाना था।

शनिवार को पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम) के माध्यम से राज्य मुख्यालय ट्रेजरी से सीधे विद्यार्थियों के खातों में रकम भेजी गई। 862 करोड़ रुपये 11 लाख विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त हो सका।

एससी-एसटी छात्रों को मिली 721 करोड़ की छात्रवृत्ति

No scholarship for all OBC students.

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, पूर्व दशम (कक्षा दस तक) छात्रवृत्ति योजना का 200 करोड़ रुपये बचा है। शासन से दशमोत्तर कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए इस रकम के उपयोग की अनुमति मांगी गई है।

अगर इस राशि के उपयोग की अनुमति मिल जाती है तो भी कम से कम डेढ़ लाख विद्यार्थियों को न छात्रवृत्ति मिल पाएगी और न ही शुल्क की भरपाई हो सकेगी। वहीं समाज कल्याण विभाग ने शनिवार देर शाम तक एससी-एसटी वर्ग के 5.5 लाख विद्यार्थियों के खातों में 721 करोड़ और सामान्य वर्ग के तीन लाख छात्रों के खातों में 242 करोड़ रुपये भेज दिए थे।

यहां बता दें कि एससी-एसटी वर्ग के कुल 8.21 लाख और सामान्य वर्ग के 5.85 लाख विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ दिया जाना है। समाज कल्याण विभाग के अफसरों का कहना है कि सभी विद्यार्थियों के लिए उनके पास पर्याप्त बजट है।

पिछड़ा वर्ग कल्याण के निदेशक डीएन वर्मा का कहना है कि हमने शासन से दो सौ करोड़ रुपये और मांगा है। यह रकम मिलने पर भी कितना धन कम पड़ेगा, इसके बारे में पुख्ता तौर पर अभी कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं हूं। क्योंकि संदिग्ध श्रेणी में रखे गए डाटा की जिलास्तर पर जांच जारी है। अनुमान है कि 80-100 करोड़ रुपये की और जरूरत पड़ेगी।

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