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यूपी के दागी पेट्रोल पंप मालिकों को झटका, हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत

Thu, 05 Oct 2017 01:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 05 Oct 2017 01:37 PM IST
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no relief for tainted petrol pump owners
डेमो - फोटो : डेमो
यूपी के दागी पेट्रोल पंप मालिकों को हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ से कोई राहत नहीं मिली। अदालत ने दागी पंप मालिकों की बुधवार को चार याचिकाओं में से तीन को खारिज कर दिया। जबकि एक याचिका का निपटारा करते हुए अदालत ने कहा कि मामले में पुलिस की कार्रवाई सही है।
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अदालत ने कहा कि मामले में आगे की जांच एसआई स्तर के अफसर से लेकर एसपी उत्तरी को दे दी जाए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि एसपी उत्तरी चोरी में पेट्रोल पंप कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की भी भूमिका की जांच करेंगे जस्टिस अताउर्रहमान मसूदी ने यह आदेश दागी पंप मालिकों की याचिकाएं खारिज करते हुए दिए।
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इन याचिकाओं में  कहा गया था कि उनके खिलाफ गलत जांच की गई है और आईपीसी की गलत धाराएं भी लगाई गई हैं, ऐसे में उन पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। सरकार की ओर से मामले में पैरवी कर रहे अपर महाधिवक्ता वीके शाही और अपर राजकीय अधिवक्ता शिवनाथ तिलहरी ने बताया कि याचिका कैंट के शिवनारायण एंड संस पेट्रोल पंप संचालकों अमन व अनूप मित्तल और उनके पिता हरीशचंद्र मित्तल ने दायर की थी। वहीं तीन अन्य पेट्रोल पंपों की ओर से भी इसी तरह की याचिकाएं दायर की गई थीं, जिन्हें खारिज कर दिया गया है। 
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पुलिस ने निचली अदालत के समक्ष पेश की चार्जशीट

no relief for tainted petrol pump owners
डेमो - फोटो : डेमो ‌प‌िक
यूपी में पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को कम पेट्रोल बेचने की शिकायत मिलने पर एसटीएफ, बाट माप अधिकारी व फूड एंड सिविल सप्लाई की टीमों ने अन्य विभागों के साथ यहां छापे मारे थे। इस दौरान सामने आया था कि पांच लीटर पेट्रोल खरीदने पर ग्राहकों को दो सौ से ढाई सौ एमएल तक कम पेट्रोल दिया जा रहा है।

इसके लिए वे पेट्रोल - डीजल डिस्पेंसिंग यूनिट पर इलेक्ट्रॉनिक चिप लगा रहे थे जो पेट्रोल पंप कर्मचारियों के बैग में रखे एक रिमोट से चलती थी। जांच में टीम को मालूम हुआ कि रिमोट चालू होने पर ग्राहकों को कम सप्लाई मिलती और रिमोट बंद होने पर सप्लाई निर्धारित मात्रा में होती है।

इसके बाद कार्रवाई करते हुए ऐसे पेट्रोल पंप बंद करवाए गए और गिरफ्तारियां की गईं। पुलिस ने जांच के बाद निचली अदालत के समक्ष चार्जशीट पेश कर दी। इसके खिलाफ याचिका करते हुए याचियों का कहना था कि उनके खिलाफ कोई मुकदमा नहीं बनता है, जांच ही गलत की गई है। याचिका पर पिछले दो महीने में लगातार सुनवाई के बाद बुधवार दोपहर को हाईकोर्ट ने अपना निर्णय सुनाया।

उम्र कैद तक की हो सकती है सजा

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डेमो
लखनऊ के नागरिकों से पेट्रोल चोरी करने वालों पर धोखाधड़ी के लिए आईपीसी की 467, 468, 471 जैसी धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई थी। अधिवक्ता शिवनाथ तिलहरी ने बताया कि इनमें अधिकतम उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान भी है। हाईकोर्ट ने अपने ताजा निर्णय में इन सभी धाराओं का लगाया जाना सही माना है।

साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम और लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट में दी गई धाराएं भी जोड़ने के लिए कहा है। जितने बड़े स्तर पर यह घोटाला हुआ है, इसमें पेट्रोलियम कंपनियों के कनिष्ठ व वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका से इन्कार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे किसी भी संदेह की जांच एसपी नॉर्थ करेंगे। सब इंस्पेक्टर स्तर के बजाय यह जांच ज्यादा प्रभावी ढंग से होनी चाहिए। 
 
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