कोरोना वायरस: यूपी में 15 अप्रैल तक डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों के छुट्टियां लेने पर लगी रोक
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CoronaVirus News In Hindi: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सभी चिकित्सा संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों, चिकित्सकों, अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टी पर 15 अप्रैल तक रोक लगा दी गई है। सभी पर अपरिहार्य स्थितियों को छोड़कर मुख्यालय न छोड़ने के लिए कहा गया है। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे ने इसके निर्देश जारी कर दिए हैं।
इसके अलावा प्रदेश के 24 राजकीय मेडिकल कॉलेजों, संस्थानों में कोरोना वायरस के वर्तमान व भविष्य में संक्रमित होने वाले मरीजों के लिए कुल 866 बेड की व्यवस्था की है। इनमें 483 आइसोलेशन बेड और 27 निजी मेडिकल कॉलेजों में 383 आइसोलोशन बेड तैयार किए गए हैं। बृहस्पतिवार को एक उच्च स्तरीय बैठक में इस पर फैसला लिया गया।
प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम और मरीजों के उपचार के लिए शासन ने 21 पन्नों का एक संक्रमण नियंत्रण और मरीज प्रबंधन प्रोटोकॉल तैयार किया है। ये प्रोटोकॉल एसजीपीजीआई और भारत सरकार से जारी गाइडलाइंस को मिलाकर तैयार किया गया है। इसी प्रोटोकॉल के हिसाब से सभी मेडिकल कॉलेजों, संस्थानों और अस्पतालों को जारी कर दिया गया है।
इसमें ओपीडी में मरीजों के रजिस्ट्रेशन से लेकर जांच के लिए मरीजों के नमूने लेने, आइसोलेशन वार्ड प्रोटोकॉल की जानकारी दी गई है। प्रदेश के निजी 27 मेडिकल कॉलेजों में स्थापित किए गए आइसोलेशन वार्ड के तत्काल निरीक्षण करने और मार्गदर्शन देने के लिए जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।
कई अन्य कॉलेजों में भी मेडिकल सुविधा शुरू करने के लिए ली जा रही अनुमति
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार, कोराना वायरस की पुष्टि करने वाली जांच की सुविधा सिर्फ केजीएमयू लखनऊ में थी। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) दिल्ली से समन्वय करके एसजीपीआई, गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज, झांसी मेडिकल कॉलेजों में भी जांच की सुविधा शुरू करने की अनुमति ली जा रही है।
इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज बीएचयू और जेएन मेडिकल कॉलेज अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की प्रयोगशालाओं को उच्चीकृत करने के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा गया है। इस प्रकार प्रदेश में कुल 08 डायग्नोस्टिक फैसेलिटी तैयार करने के लिए युद्ध स्तर पर कार्रवाई चल रही है। प्रत्येक मेडिकल कॉलेजों-संस्थानों में टास्क फोर्स गठित किया गया है।
पर्सनल प्रोटेक्शन इक्वीपमेंट (पीपीई) किट, रीएजेंट, मास्क, थर्मल स्कैनर और अन्य उपकरणों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आपूर्तिकर्ता से संपर्क करके एक महीने के लिए व्यवस्था की जा रही है। बृहस्पतिवार को उच्चस्तरीय बैठक में प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा के साथ एसजीपीजीआई के इमरजेंसी मेडिसिल विभाग के हेड प्रो.आरके सिंह, केजीएमयू के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग की हेड प्रो.अमिता जैन, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा प्रो.केके गुप्ता, स्टेट नोडल अधिकारी (कोरोना) डॉ. विक्रम सिंह भी मौजूद थे।