फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   no entrance without fee

निजी स्कूलों के लिए बेमानी हैं सरकार के फैसले

Wed, 07 May 2014 02:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 07 May 2014 02:07 AM IST
विज्ञापन
no entrance without fee

निजी स्कूलों की मनमानी का हाल ये है कि ये अब सरकार और प्रशासन के अधिनियमों की भी अनदेखी कर रहे हैं।

विज्ञापन


शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत बच्चों को निजी स्कूलों की 25 फीसदी सीटों पर मुफ्त प्रवेश देने के मामले में न तो राज्य सरकार गंभीर है और न ही निजी स्कूल प्रबंधन।

यही कारण है कि दो साल में मात्र 60 बच्चे ही निजी स्कूलों में दाखिला पाने में सफल हो पाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का मंगलवार को दाखिले संबंधी आया आदेश कहां तक गरीब बच्चों को उनका हक दिला पाता है यह तो समय ही बताएगा।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम का मकसद 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा का हक दिलाना है। सरकारी के साथ निजी स्कूलों में भी गरीब बच्चों को पढ़ाई में बराबरी का दर्जा दिलाने की व्यवस्था की गई है।
विज्ञापन


सरकारी में तो बच्चे आसानी से दाखिला पा रहे हैं, लेकिन निजी स्कूलों की 25 फीसदी सीटों पर प्रवेश पाना आसान नहीं है।

उप्र में नवंबर 2012 में निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को 25 फीसदी सीटों पर मुफ्त दाखिला दिलाने का शासनादेश जारी हुआ।

लेकिन इसमें ऐसे नियम व शर्तें रख दी गईं कि गरीब बच्चा आसानी से प्रवेश ही न पा सके।

मसलन, निजी स्कूल में वही बच्चा दाखिला पाएगा जिसके घर के आसपास सरकारी या फिर सहायता प्राप्त स्कूल नहीं होगा।

सर्व शिक्षा अभियान के तहत डेढ़ किलोमीटर पर प्राथमिक और तीन किमी पर उच्च प्राथमिक स्कूल खोले गए हैं।

निजी स्कूल प्रबंधन इसी नियम को हथियार बनाते हुए गरीब बच्चों को दाखिला देने से बच रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed