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कर्मभूमि पर महज 'औपचारिकता' रह गए अटल
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 26 Dec 2013 03:45 PM IST
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अटल विहारी वाजपेयी का जन्मदिन तो मन गया। पर, वह बात नहीं दिखी।
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न तो पार्टी मुख्यालय पर यज्ञ हुआ और न भाजपाइयों में शहर में अखंड रामायण आयोजित करने की होड़ दिखी।
राजधानी के मंदिरों में विशालकाय लड्डुओं का भगवान को भोग लगाकर अटल के स्वास्थ्य लाभ और लंबी आयु की कामना करने वाली भीड़ देखने को भी आंखे तरस गई।
बड़े-बड़े केक भी नहीं कटे और न शहर में अटल के जन्मदिन पर रोशनी करने का उत्साह ही दिखा। जन्मदिन समारोह मनाने की सिर्फ औपचारिकता पूरी की गई। उसमें भी संख्या जुटाने की फिक्र करना भी शायद भाजपा के लोग भूल गए।
पुरानों को खारिज करने का दौर
भाजपा के पदाधिकारी रह चुके एक पूर्व सांसद ने टिप्पणी की कि भाजपा भी दूसरे राजनीतिक दलों की तरह उगते सूरज को सलाम करने की विसंगति का शिकार हो गई। परिवारवाद पहले ही प्रवेश पा चुका है। अब पुरानों को खारिज करने का दौर भी शुरू हो गया।
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यह टिप्पणी आज की परिस्थिति पर खरी उतरती दिखी। बुधवार को यहां कुड़ियाघाट पर अटल का जन्मदिन मनाने जुटे लोगों ने वाजपेयी से ज्यादा मोदी के नाम के नारे लगाए।
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झल्लाकर स्थानीय सांसद लालजी टंडन को कहना पड़ा, ‘आप लोग अटल जी का जन्मदिन मनाने आए हैं। उत्साह से मनाइए।’
एक वक्त वह भी था
कुछ ही बरस हुए जब अटल के जन्मदिन पर लखनऊ में हलचल देखते ही बनती थी। लखनऊ का कोई इलाका ऐसा नहीं होता था जहां अटल की दीर्घायु की कामना करते हुए पोस्टर-बैनर पटे न रहते हों। मिठाई बांटने वालों की भी होड़ लगी रहती थी। कई जगह अटल की उम्र से दोगुने-तिगुने वजन के केक काटे जाते थे।
जगह-जगह लड्डूओं के लिए बड़े-बड़े कढ़ाव चढ़े दिखते थे। धीरे-धीरे यह दृश्य भी खत्म हो गए।
लगता है कि अटल की अस्वस्थता ने लखनऊ के लोगों और प्रदेश भाजपा को भी उत्साहहीन कर दिया है अथवा भाजपा के लोगों को अब अटल की जरूरत नहीं रही।
एक वक्त वह भी था जब दिल्ली के नेताओं में 24 व 25 दिसंबर को लखनऊ आने की होड़ रहती थी। धीरे-धीरे यह कम होती गई।
इस बार तो औपचारिकता पूरी करने भर के लिए भी दिल्ली से किसी बड़े नेता ने लखनऊ आने की जरूरत नहीं समझी। नतीजतन कल्याण सिंह, कलराज मिश्र और लालजी टंडन ने ही जन्मदिन मनाने की औपचारिकता पूरी की।
सन्नाटे में रहा भाजपा कार्यालय
भाजपा कार्यालय भी सन्नाटे जैसी स्थिति में रहा। न तो आतिशबाजी हुई और कार्यालय पर बिजली की जगमगाती झालरें दिखाई पड़ी। अटल का जन्मदिन मनाने की औपचारिकता मुख्य संगठन के बजाय अल्पसंख्यक मोर्चा ने केक काटकर पूरी की।
लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र विभाग के अध्यक्ष रह चुके प्रो. एस.के. द्विवेदी कहते हैं कि भाजपा तो कभी उनका ऋण नहीं अदा कर सकती।