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मदरसों पर सख्त हुई मोदी सरकार, मानदेय रोका!

Mon, 12 Jan 2015 01:51 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 12 Jan 2015 01:51 AM IST
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No compensation for Madarsa teachers in UP.

सूबे के मदरसों में पढ़ाने वाले इंटरमीडिएट शिक्षकों की छुट्टी हो गई है। केंद्र सरकार ने मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत मिलने वाला इनका मानदेय पूरी तरह बंद कर दिया है। वहीं, प्रदेश सरकार ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।

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राज्य सरकार ने सभी मदरसा शिक्षकों का मानदेय बढ़ाया लेकिन इनके लिए शर्त लगा दी। कहा, अगर केंद्र मानदेय देगी तो प्रदेश सरकार भी अपना अंश जोड़कर इन्हें बढ़ा हुआ मानदेय प्रदान कर देगी।
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केंद्र सरकार मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत प्रदेश के कई मदरसों को अनुदान देती है। इसके तहत शिक्षकों को तीन तरह की श्रेणियों में बांटा गया था।

इनमें पहली श्रेणी पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षक (12,000 रुपये), दूसरी श्रेणी ग्रेजुएट शिक्षक (6,000 रुपये) व तीसरी श्रेणी इंटरमीडिएट शिक्षक (3,000 रुपये) की थी।
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केंद्र सरकार ने इंटरमीडिएट शिक्षकों को अपनी अर्हता बढ़ाने के लिए चार साल का समय भी दिया। इस दौरान कई शिक्षकों ने अपनी शैक्षिक अर्हता बढ़ाकर स्नातक कर ली। लेकिन जो शैक्षिक अर्हता नहीं बढ़ा पाए उनके लिए संकट खड़ा हो गया है।

केंद्र सरकार ने ये दिया तर्क

No compensation for Madarsa teachers in UP.

मदरसों में आधुनिक विषय पढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से इन शिक्षकों को मानदेय दिया जाता है। लेकिन केंद्र सरकार ने तीसरी श्रेणी यानी इंटरमीडिएट के शिक्षकों को मानदेय देना पूरी तरह बंद कर दिया है।

उनका मानना है कि जब स्नातक व परास्नातक के युवा मौजूद हैं तो इंटरमीडिएट पास शिक्षकों से क्यों पढ़वाया जाए। इसके बावजूद कई मदरसों में शिक्षक इसलिए लगे हुए हैं क्योंकि उन्हें यह उम्मीद थी कि शायद प्रदेश सरकार ही उनकी कुछ सुन ले। लेकिन अब प्रदेश सरकार ने भी साफ कर दिया है कि केंद्र सरकार यदि मानदेय देगी तभी वह अपना अंश भी जोड़कर शिक्षकों को मानदेय देंगे।

प्रदेश सरकार ने छह जनवरी को मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत पढ़ाने वाले शिक्षकों के मानदेय बढ़ाने का जो शासनादेश जारी किया है उसमें भी इंटरमीडिएट शिक्षकों की स्थिति साफ कर दी है। इसमें परास्नातक व स्नातक शिक्षकों का मानदेय क्रमश: तीन हजार व दो हजार रुपये बढ़ाया है।

वहीं, इंटरमीडिएट शिक्षकों का मानदेय एक हजार रुपये बढ़ाने की बात तो कही है लेकिन इसमें यह शर्त भी लगा दी है कि जब केंद्र सरकार से इनका अनुदान आएगा, तभी प्रदेश सरकार भी इन्हें एक हजार रुपये बढ़ाकर मानदेय प्रदान करेगी।

यूपी में मदरसों की संख्या और उनका हाल

No compensation for Madarsa teachers in UP.

इस पर अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ निदेशक फैजुर्रहमान का कहना है कि केंद्र सरकार ने इंटरमीडिएट शिक्षकों का मानदेय देना बंद कर दिया है। इसलिए राज्य सरकार भी इन्हें मानदेय नहीं देगी।

जिन शिक्षकों ने अपनी शैक्षिक योग्यता बढ़ा ली, उन्हें राहत मिल गई है लेकिन जो रह गए उन्हें अब मानदेय नहीं मिल सकेगा।

यूपी में मदरसों की संख्या
हाईस्कूल व उससे ऊपर- 2,026
प्राइमरी व जूनियर- 6,500
सरकारी अनुदान प्राप्त- 459
(इनके अलावा कई मदरसे ऐसे हैं जो बगैर मदरसा बोर्ड की मान्यता के चल रहे हैं।)

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