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मेट्रो रूट पर नई बिल्डिंगों में चेंज नहीं

Wed, 02 Oct 2013 01:25 AM IST
ऋषि मिश्र/लखनऊ
ऋषि मिश्र/लखनऊ Updated Wed, 02 Oct 2013 01:25 AM IST
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no change in building rules on metro rute

मेट्रो रेल के 23 किलोमीटर लंबे रूट पर एनओसी की प्रक्रिया में बिल्डिंग बाइलॉज (भवन उपविधि) में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

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बिल्डिंग निर्माण में कोई प्रतिबंध नहीं होगा। जो उपविधि अभी लागू है, आगे भी उसी के आधार पर मानचित्र पास होंगे। बस एनओसी का आधार तीन बिंदु होंगे।

जहां भी निर्माण किया जाना है, उसकी भूमि प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन की भूमि की न हो, यह मेट्रो रूट के मोड़ पर न हो और इस नेटवर्क के लिए बनाए जाने वाले प्रस्तावित पॉवर सब स्टेशन की भूमि में न हो।

इन्हीं के आधार पर फिलहाल मेट्रो सेल और बाद में एलएमआरसी एनओसी जारी करेगा।मेट्रो के पहले चरण के लिए अमौसी से मुंशी पुलिया तक 23 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर प्रस्तावित है।
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इस रूट पर अब लखनऊ विकास प्राधिकरण बिना मेट्रो सेल की एनओसी के कोई भी मानचित्र पास नहीं करेगा। यह व्यवस्था अब लागू हो गई है। मगर कॉरिडोर के मध्य से 50-50 मीटर दोनों ओर मानचित्र पास कराने के इच्छुक लोगों के लिए यह एक बड़ी खुशखबरी है कि उनके लिए भवन उपविधि में कोई भी बदलाव नहीं आएगा।
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केवल मेट्रो के लिए इस्तेमाल की जाने वाली भूमि तो कहीं इस निर्माण की जद में नहीं आ रही है। मेट्रो सेल बस इस बात का परीक्षण कर के एनओसी जारी करेगा।

बस अपनी जमीन बचाएगा मेट्रो सेल
अमौसी से मुंशी पुलिया के 23 किलोमीटर लंबे रूट पर मेट्रो रेल संचालन और निर्माण के लिए एलएमआरसी को करीब 48 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ेगी। इसमें स्थाई औरअस्थाई दोनों ही तरह की जमीन की जरूरत होगी।

यह जमीन सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों से ही ली जाएगी। करीब 11 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण निजी क्षेत्र से करना पड़ेगा। स्थाई जरूरत के तौर पर नार्थ साउथ कॉरिडोर में स्टेशन के लिए सरकार से 1.83 हेक्टेयर और प्राइवेट से 2.02 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ेगी।

रनिंग सेक्शन के लिए सरकार से 1.05 और प्राइवेट से 3.68 हेक्टेयर जमीन चाहिए होगी। सब स्टेशन और अन्य जरूरतों के लिए सरकार से 37.8 हेक्टेयर जमीन ली जाएगी।


कुल 48 हेक्टेयर जमीन इस कॉरिडोर के लिए एलएमआरसी लेगा। इसलिए किसी भी निर्माण का मानचित्र इस रूट पर पास करने से पहले अपनी जमीन को बचाने की ओर ध्यान देगा।


सबसे जल्दी देंगे एनओसी
मेट्रो सेल के अधिकारी साफ करते हैं कि, उनकी सेल में मानचित्र के लिए एनओसी मिलने में बहुत अधिक वक्त नहीं लगेगा।

हमारी कोशिश होगी कि, जितने भी विभाग एनओसी देते हैं, वे जितना समय लेते हैं, उनसे कहीं जल्दी मेट्रो से एनओसी मिलेगी।


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