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इससे बेहतर कोई विकल्प नहीं, लेकिन छात्रों का मूल्यांकन होगा प्रभावित
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सीबीएसई ने कक्षा 12 के छात्रों का परीक्षा परिणाम जारी करने के लिए जो बीच का रास्ता निकाला है, उससे छात्रों की बौद्धिक कुशलता का सटीक मूल्यांकन होने को लो लेकर आशंका जाहिर की जा रही है। स्कूलों के अनुसार नई मूल्यांकन नीति से मेधावी छात्रों को कुछ हद तक नुकसान हो सकता है। जबकि औसतन और औसत से कम प्रदर्शन करने वाले छात्रों के लिए तो यह फायदे का सौदा साबित होगा। हालांकि स्कूल यह भी मानते हैं कि यदि बोर्ड परीक्षा नहीं करा सकते तो इस मूल्यांकन नीति के अलावा और कोई विकल्प भी नहीं है।
स्कूलों के अनुसार कक्षा 12 की पढ़ाई कोरोना काल में हुई। आधी से ज्यादा पढ़ाई ऑनलाइन हुई और ऑनलाइन में छात्र सही से पढ़ाई नहीं कर पाए। अर्धवार्षिक परीक्षाएं जैसेतैसे निपटीं, जिस वजह से प्री-बोर्ड परीक्षा में छात्रों का प्रदर्शन उम्मीद के अनुसार खरा नहीं था।
स्कूलों के अनुसार ये परिस्थितियां प्रभावित कर सकते हैं मेधावी छात्रों के अंक :
- कक्षा 11 को आमतौर पर छात्र गंभीरता से नहीं लेते।
- ऑनलाइन पढ़ाई में तमाम छात्र कमजोर कनेक्टिविटी की वजह से सही से नहीं पढ़ पाए।
- कैंपस के मुकाबले ऑनलाइन पढ़ाई ज्यादा रास नहीं आई।
- इस दौरान छात्र कोचिंग भी नहीं कर पाए।
- कक्षा 12 के यूनिट टेस्ट और अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं ऑनलाइन ही हुईं, जिससे छात्रों का सही से परफॉर्मेंस नहीं आंका जा सका।
- प्री-बोर्ड परीक्षा में केवल पांच से सात प्रतिशत छात्र ही बेहतर प्रदर्शन कर पाए।
- जिन छात्रों ने दूसरे बोर्ड से 10 पास किया उनकी मूल्यांकन नीति अलग होती है।
निष्पक्ष और संतुलित मूल्यांकन नीति है। हालांकि, अंकों के टैब्यूलेशन को लेकर कुछ आशंकाएं हैं। कोरोना से उत्पन्न हुई स्थिति और ऑनलाइन कक्षाओं के चलते छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। कुछ छात्र आंतरिक मूल्यांकन में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए, यूनिट टेस्ट, अर्द्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षा में उनका प्रदर्शन औसत रहा। लेकिन पहली लहर के बाद छात्र बोर्ड परीक्षा के लिए काफी अच्छे से तैयार थे, वे शैक्षिक प्रदर्शन में हुई गिरावट की भरपाई कर सकते थे, लेकिन परीक्षा रद्द हो गई। हम आशा करते हैं की रिजल्ट तैयार करते समय इस बिंदु को भी ध्यान में रखा जाएगा।
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- सर्वेश गोयल, चेयरमैन, जीडी गोयनका स्कूल
बोर्ड ने जो फार्मूला दिया है इससे न तो कुछ बेहतर है और न ही और कोई विकल्प बचा है, क्योंकि परीक्षा रद्द हो चुकी है। लेकिन यह कह सकते हैं कि मेधावी छात्र जिसने सिर्फ बोर्ड परीक्षा के लिए दो साल से मेहनत की उसका मूल्यांकन कम आंका जा सकता है। जबकि औसत और औसत से कम प्रदर्शन करने वाले छात्र फायदे में होंगे। ऑनलाइन पढाई और कोरोना की वजह से छात्रों की क्षमता का विकास उतना नहीं हो पाया जो क्लास में होता है।
- सर्वजीत सिंह, प्रबंधक, अवध कॉलेजिएट
नई मूल्यांकन नीति बेहतर है। लेकिन छात्रों के अंकों में फर्क तो देखने को मिलेगा खासतौर पर जो बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य लेकर चले थे। कक्षा 11 को कुछ छात्र गंभीरता से नहीं लेते और अर्द्धवार्षिक परीक्षा तक ठीक से पढ़ाई नहीं हो पाई। ऑनलाइन पढ़ाई से छात्रों की तैयारी पर काफी असर पड़ा है। इससे प्री-बोर्ड परीक्षा में उनका प्रदर्शन गिरा, लेकिन वे बोर्ड परीक्षा में बेहतर कर सकते थे।
- शर्मिला सिंह, प्रिंसिपल, पायनियर मॉन्टेसरी स्कूल
अभी मूल्यांकन नीति को पूरा पढ़ने और समझने की जरूरत है। इसमें कई सवाल हैं, जैसे यदि छात्र ने क्लास 10 आईसीएसई से किया हो तो क्या मापदंड होगा। वहीं कक्षा 10 के बेस्ट तीन विषयों का अंक का आधार लेना भी वाजिब नहीं लगता। जिस विषय का कक्षा 12 में कोई संबंध नहीं उसका औसत लेना सही नहीं है। मेरी नजर में यदि फोकस ज्यादा कक्षा 11 और 12 पर होता तो ज्यादा स्पष्ट होता।
- मनीषा अंथवाल, प्रिंसिपल, डीपीएस एल्डिको
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स्कूलों के अनुसार कक्षा 12 की पढ़ाई कोरोना काल में हुई। आधी से ज्यादा पढ़ाई ऑनलाइन हुई और ऑनलाइन में छात्र सही से पढ़ाई नहीं कर पाए। अर्धवार्षिक परीक्षाएं जैसेतैसे निपटीं, जिस वजह से प्री-बोर्ड परीक्षा में छात्रों का प्रदर्शन उम्मीद के अनुसार खरा नहीं था।
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स्कूलों के अनुसार ये परिस्थितियां प्रभावित कर सकते हैं मेधावी छात्रों के अंक :
- कक्षा 11 को आमतौर पर छात्र गंभीरता से नहीं लेते।
- ऑनलाइन पढ़ाई में तमाम छात्र कमजोर कनेक्टिविटी की वजह से सही से नहीं पढ़ पाए।
- कैंपस के मुकाबले ऑनलाइन पढ़ाई ज्यादा रास नहीं आई।
- इस दौरान छात्र कोचिंग भी नहीं कर पाए।
- कक्षा 12 के यूनिट टेस्ट और अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं ऑनलाइन ही हुईं, जिससे छात्रों का सही से परफॉर्मेंस नहीं आंका जा सका।
- प्री-बोर्ड परीक्षा में केवल पांच से सात प्रतिशत छात्र ही बेहतर प्रदर्शन कर पाए।
- जिन छात्रों ने दूसरे बोर्ड से 10 पास किया उनकी मूल्यांकन नीति अलग होती है।
निष्पक्ष और संतुलित मूल्यांकन नीति है। हालांकि, अंकों के टैब्यूलेशन को लेकर कुछ आशंकाएं हैं। कोरोना से उत्पन्न हुई स्थिति और ऑनलाइन कक्षाओं के चलते छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। कुछ छात्र आंतरिक मूल्यांकन में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए, यूनिट टेस्ट, अर्द्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षा में उनका प्रदर्शन औसत रहा। लेकिन पहली लहर के बाद छात्र बोर्ड परीक्षा के लिए काफी अच्छे से तैयार थे, वे शैक्षिक प्रदर्शन में हुई गिरावट की भरपाई कर सकते थे, लेकिन परीक्षा रद्द हो गई। हम आशा करते हैं की रिजल्ट तैयार करते समय इस बिंदु को भी ध्यान में रखा जाएगा।
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- सर्वेश गोयल, चेयरमैन, जीडी गोयनका स्कूल
बोर्ड ने जो फार्मूला दिया है इससे न तो कुछ बेहतर है और न ही और कोई विकल्प बचा है, क्योंकि परीक्षा रद्द हो चुकी है। लेकिन यह कह सकते हैं कि मेधावी छात्र जिसने सिर्फ बोर्ड परीक्षा के लिए दो साल से मेहनत की उसका मूल्यांकन कम आंका जा सकता है। जबकि औसत और औसत से कम प्रदर्शन करने वाले छात्र फायदे में होंगे। ऑनलाइन पढाई और कोरोना की वजह से छात्रों की क्षमता का विकास उतना नहीं हो पाया जो क्लास में होता है।
- सर्वजीत सिंह, प्रबंधक, अवध कॉलेजिएट
नई मूल्यांकन नीति बेहतर है। लेकिन छात्रों के अंकों में फर्क तो देखने को मिलेगा खासतौर पर जो बेहतर प्रदर्शन का लक्ष्य लेकर चले थे। कक्षा 11 को कुछ छात्र गंभीरता से नहीं लेते और अर्द्धवार्षिक परीक्षा तक ठीक से पढ़ाई नहीं हो पाई। ऑनलाइन पढ़ाई से छात्रों की तैयारी पर काफी असर पड़ा है। इससे प्री-बोर्ड परीक्षा में उनका प्रदर्शन गिरा, लेकिन वे बोर्ड परीक्षा में बेहतर कर सकते थे।
- शर्मिला सिंह, प्रिंसिपल, पायनियर मॉन्टेसरी स्कूल
अभी मूल्यांकन नीति को पूरा पढ़ने और समझने की जरूरत है। इसमें कई सवाल हैं, जैसे यदि छात्र ने क्लास 10 आईसीएसई से किया हो तो क्या मापदंड होगा। वहीं कक्षा 10 के बेस्ट तीन विषयों का अंक का आधार लेना भी वाजिब नहीं लगता। जिस विषय का कक्षा 12 में कोई संबंध नहीं उसका औसत लेना सही नहीं है। मेरी नजर में यदि फोकस ज्यादा कक्षा 11 और 12 पर होता तो ज्यादा स्पष्ट होता।
- मनीषा अंथवाल, प्रिंसिपल, डीपीएस एल्डिको