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कहीं जांच की व्यवस्था नहीं तो कहीं बचकर निकल रहे यात्री
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आगरा एक्सप्रेस वे पर कोरोना जांच की व्यवस्था नहीं। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
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विभूतिखंड निवासी एक परिवार के तीन लोग बीते दिनों संक्रमित हुए थे। पूरा परिवार आगरा एक्सप्रेस-वे होते हुए लखनऊ आया था। एक्सप्रेस-वे पर जांच व्यवस्था न होने से परिवार बेरोकटोक निकल गया। घर पहुंचने के हफ्तेभर के अंदर एक सदस्य पॉजिटिव आया। जांच के दौरान परिवार के तीन लोगाें में संक्रमण की पुष्टि हुई थी।
विभूतिखंड का रहने वाला एक यात्री दूसरे राज्य से वापस लौटा था। एयरपोर्ट पर उतरने के बाद बिना जांच घर पहुंच गया। हफ्तेभर बाद लक्षण आने पर डॉक्टर की सलाह पर मरीज ने जांच कराई। रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
ओमिक्रॉन के मामले सामने आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग आगरा एक्सप्रेस-वे पर जांच की व्यवस्था नहीं कर पाया है तो वहीं, एयरपोर्ट से घरेलू उड़ानों के सैकड़ों यात्री टेस्टिंग से बचकर निकल जा रहे हैं।
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ये यात्री होम आइसोलेशन का भी पालन नहीं कर रहे हैं। इसके चलते ही बाद में इनमें से पॉजिटिव निकलने वाले यात्री संक्रमण की नई चेन बना रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर में भी यही लापरवाही हुई थी और परिणाम भयावह थे।
आगरा एक्सप्रेस-वे पर कोविड जांच अभी तक नहीं शुरू हुई है। ऐसे में दूसरे राज्यों से आने वाली गाड़ियां बिना रोकटोक निकल रही हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अफसर जांच होने का दावा कर रहे हैं, पर टोल प्लाजा पर रूटीन में कितनी जांचें हो रही हैं, इसका जवाब नहीं दे पा रहे हैं। वहीं, रेल और बस से आने वाले यात्रियों की भी जांचें नहीं हो पा रही हैं।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग एयरपोर्ट पर विदेश से आने वाली हर फ्लाइट के सभी यात्रियों की जांच होने का दावा कर रहा है। सऊदी अरब, जद्दा और कुवैत समेत अन्य खाड़ी देशों से करीब छह से सात फ्लाइट में रोज करीब 1800 यात्री आ रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग जांच एक हजार पर रोज होने का दावा कर रहा है। ऐसे में 800 यात्री बिना जांच के निकल जा रहे हैं।
रोज दस हजार से अधिक सैंपलिंग
डिप्टी सीएमओ डॉ. मिलिंद वर्धन के मुताबिक, अन्य राज्यों में ओमिक्रॉन के मामले मिलने के बाद जांच का दायरा तीस प्रतिशत बढ़ाया गया है। पहले जिले में छह से सात हजार जांच हो रही थी। अब यह ग्राफ बढ़कर दस से 12 हजार रोज का पहुंच गया है। एयरपोर्ट पर विदेश से आने वाले हर यात्री की जांच कराई जा रही है। घरेलू उड़ान से आने वाले यात्रियों की रैडम सैंपलिंग कराई जा रही है।
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विभूतिखंड का रहने वाला एक यात्री दूसरे राज्य से वापस लौटा था। एयरपोर्ट पर उतरने के बाद बिना जांच घर पहुंच गया। हफ्तेभर बाद लक्षण आने पर डॉक्टर की सलाह पर मरीज ने जांच कराई। रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
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ओमिक्रॉन के मामले सामने आने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग आगरा एक्सप्रेस-वे पर जांच की व्यवस्था नहीं कर पाया है तो वहीं, एयरपोर्ट से घरेलू उड़ानों के सैकड़ों यात्री टेस्टिंग से बचकर निकल जा रहे हैं।
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ये यात्री होम आइसोलेशन का भी पालन नहीं कर रहे हैं। इसके चलते ही बाद में इनमें से पॉजिटिव निकलने वाले यात्री संक्रमण की नई चेन बना रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर में भी यही लापरवाही हुई थी और परिणाम भयावह थे।
आगरा एक्सप्रेस-वे पर कोविड जांच अभी तक नहीं शुरू हुई है। ऐसे में दूसरे राज्यों से आने वाली गाड़ियां बिना रोकटोक निकल रही हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अफसर जांच होने का दावा कर रहे हैं, पर टोल प्लाजा पर रूटीन में कितनी जांचें हो रही हैं, इसका जवाब नहीं दे पा रहे हैं। वहीं, रेल और बस से आने वाले यात्रियों की भी जांचें नहीं हो पा रही हैं।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग एयरपोर्ट पर विदेश से आने वाली हर फ्लाइट के सभी यात्रियों की जांच होने का दावा कर रहा है। सऊदी अरब, जद्दा और कुवैत समेत अन्य खाड़ी देशों से करीब छह से सात फ्लाइट में रोज करीब 1800 यात्री आ रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग जांच एक हजार पर रोज होने का दावा कर रहा है। ऐसे में 800 यात्री बिना जांच के निकल जा रहे हैं।
रोज दस हजार से अधिक सैंपलिंग
डिप्टी सीएमओ डॉ. मिलिंद वर्धन के मुताबिक, अन्य राज्यों में ओमिक्रॉन के मामले मिलने के बाद जांच का दायरा तीस प्रतिशत बढ़ाया गया है। पहले जिले में छह से सात हजार जांच हो रही थी। अब यह ग्राफ बढ़कर दस से 12 हजार रोज का पहुंच गया है। एयरपोर्ट पर विदेश से आने वाले हर यात्री की जांच कराई जा रही है। घरेलू उड़ान से आने वाले यात्रियों की रैडम सैंपलिंग कराई जा रही है।