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Lucknow News: मरीज को निजी अस्पताल भेजने वाले डॉक्टर पर कार्रवाई नहीं
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केजीएमयू।
लखनऊ। मरीज को केजीएमयू से निजी अस्पताल में भर्ती कराने के आरोपों से घिरे डॉक्टर पर प्रशासन की कार्रवाई 27 दिन बाद भी अटकी है। शिकायत और साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद आरोपी डॉक्टर की तैनाती अभी विभाग में बनी हुई है। आरोप है कि वह जरूरतमंद मरीजों को डायलिसिस और इलाज के लिए निजी अस्पताल भेजते थे।
बस्ती के कुदरहा ब्लॉक निवासी पुष्पा (54) किडनी रोग से पीड़ित थीं। परिजन उन्हें केजीएमयू के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि संविदा पर तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर ने फेफड़े में संक्रमण बताते हुए जान बचाने के लिए पाइप डालने की जरूरत बताई। केजीएमयू में प्रक्रिया में देरी होने की बात कहकर मरीज को 9 सितंबर को दुबग्गा स्थित फाह हॉस्पिटल भेज दिया गया। परिजनों को आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज की बात भी बताई गई।
परिजनों ने डॉक्टर की बात पर मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। आरोप है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल में करीब एक लाख रुपये वसूले गए। मरीज के बेटे विजय कुमार चौधरी ने डॉक्टर पर इलाज के नाम पर वसूली कराने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी।
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विभागाध्यक्ष ने आरोपी डॉक्टर के बयान भी दर्ज किए थे। हालांकि, डॉक्टर आरोपों से इन्कार करते रहे। इसके बाद विभागाध्यक्ष ने रिपोर्ट कुलपति कार्यालय भेज दी थी। आरोप है कि शिकायत और डॉक्टर की रिकॉर्डिंग होने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि एक-दो दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट कुलपति को सौंपी जाएगी।
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बस्ती के कुदरहा ब्लॉक निवासी पुष्पा (54) किडनी रोग से पीड़ित थीं। परिजन उन्हें केजीएमयू के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि संविदा पर तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर ने फेफड़े में संक्रमण बताते हुए जान बचाने के लिए पाइप डालने की जरूरत बताई। केजीएमयू में प्रक्रिया में देरी होने की बात कहकर मरीज को 9 सितंबर को दुबग्गा स्थित फाह हॉस्पिटल भेज दिया गया। परिजनों को आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज की बात भी बताई गई।
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परिजनों ने डॉक्टर की बात पर मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। आरोप है कि आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल में करीब एक लाख रुपये वसूले गए। मरीज के बेटे विजय कुमार चौधरी ने डॉक्टर पर इलाज के नाम पर वसूली कराने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी।
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विभागाध्यक्ष ने आरोपी डॉक्टर के बयान भी दर्ज किए थे। हालांकि, डॉक्टर आरोपों से इन्कार करते रहे। इसके बाद विभागाध्यक्ष ने रिपोर्ट कुलपति कार्यालय भेज दी थी। आरोप है कि शिकायत और डॉक्टर की रिकॉर्डिंग होने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया कि एक-दो दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट कुलपति को सौंपी जाएगी।