बजट तो आया पर नहीं आएंगे यूपी भाजपा के अच्छे दिन
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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट से उत्तर प्रदेश को 2017 में भाजपा के लिए अच्छे दिन के संकेत नहीं मिल सके। दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बरेली में 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने का जो सपना दिखाया था, जेटली ने बजट भाषण में इसकी घोषणा कर दी लेकिन इसका कोई रोडमैप नहीं दिया।
वहीं, आयकर सीमा बढ़ाए जाने की मांग नजरअंदाज किए जाने से नौकरीपेशा और मिडिल क्लास में उत्साह का संचार नहीं हो पाया।
प्रदेश में 2017 की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने हैं। उम्मीद थी, अरुण जेटली कुछ ऐसा करेंगे जिससे लंबे समय से प्रदेश की सत्ता से दूर भाजपा के अच्छे दिन लौट आएंगे।
बजट में कुछ कवायद तो हुई है, लेकिन ऐसा कोई सीधा संदेश नहीं मिल सका कि यूपी में भाजपा को इससे बड़ा चुनावी लाभ मिले। सूखे की जबर्दस्त मार झेल रहे बुंदेलखंड के लिए कोई सौगात नहीं मिली।
प्रदेश में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत किसानों की आमदनी बढ़ाने की योजना पहले से चल रही है, लेकिन इसके बहुत अच्छे नतीजे देखने को नहीं मिले हैं।
पूरी नहीं हुईं किसानों की उम्मीदें
भाकियू के प्रमुख नेता राकेश टिकैत कहते हैं कि केंद्र सरकार ने 2014-15 में कृषि सेक्टर के लिए 32 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। 2015-16 में इसे घटाकर 25 हजार करोड़ कर दिया था। इस बार यह राशि 36 हजार करोड़ से कुछ कम है। यदि महंगाई दर जोड़ दी जाए तो कृषि बजट का आवंटन लगभग दो साल पहले जितना है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि किसानों की आमदनी कैसे दोगुनी की जाएगी? प्रतिकूल मौसम की मार से जूझ रहे किसानों को बजट से बहुत ज्यादा उम्मीद थी, लेकिन वह पूरी नहीं हुई।
टैक्स में राहत न मिलने से मायूसी
सामाजिक-आर्थिक विषयों के जानकार सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. अशोक शास्त्री कहते हैं कि बजट में पंचायतों को धनावंटन बढ़ाने के अलावा ऐसा कुछ नहीं लग रहा है जिसे भाजपा राजनीतिक तौर पर भुना सके। 1 जनवरी 2016 से सातवां वेतन आयोग लागू होना है।
कार्मिकों के खातों में 2016-17 में अतिरिक्त पैसे आएंगे। आयकर में राहत न मिलने से उनके बढ़े वेतन का एक हिस्सा सरकार टैक्स के रूप में ले लेगी। निजी क्षेत्र में काम करने वाले कामगार भी आयकर में छूट उम्मीदें संजोए हुए थे, लेकिन वे मायूस हैं।
पंचायतों को लुभाया, दोगुने से ज्यादा धन मिलेगा
वित्त मंत्री ने ग्राम पंचायतों, पालिका परिषदों और नगर निगमों को दी जाने वाली ग्रांट में खासी वृद्धि की है। पिछले बजट की तुलना में यह बढ़ोतरी 228 फीसदी है। यूपी में सर्वाधिक ग्राम पंचायतें और नगर पालिका परिषद व नगर पंचायतें हैं। जाहिर है, यूपी को इसका सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा।
प्रदेश की 59 हजार ग्राम पंचायतों के विकास में तेजी आएगी, वहीं भाजपा को यह कहने का मौका मिलेगा कि मोदी सरकार गांवों की चिंता करती है। यदि पंचायतों, पालिकाओं को भरपूर मदद मिली तो भाजपा गांवों में टीम खड़ी कर सकती है और 2017 में इसे प्रचारित कर चुनावी लाभ उठा सकती है।
जारी रहेगी मंदी, नहीं बढ़ेगा धन का फ्लो
आर्थिक मामलों के जानकार मानते हैं कि बजट प्रावधानों से बाजार में छाई मंदी दूर नहीं होगी। बैंकों का 1.25 लाख करोड़ रुपये ऋण डूबा हुआ है। इसके बावजूद वित्त मंत्री ने बैंकों के लिए मात्र 25 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे मार्केट में धन का फ्लो बढ़ने की संभावना नहीं है। लिहाजा कारोबार में भी तेजी नहीं आ पाएगी।