शर्मनाकः नवजात का गला रेता, टॉयलेट में फेंका!
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क्रूरता...निर्दयता...नृशंसता...अमानवीयता...बेरहमी...। शायद ये शब्द इस घिनौने अपराध के आगे बौने पड़ जाएं। बाराबंकी के जिला अस्पताल में जन्म के महज दो-तीन घंटे बाद ही बच्ची का गला रेत अस्पताल के टॉयलेट में फेंक दिया गया।
डॉक्टरों ने कोशिश बहुत की पर नन्ही जान इस क्रूर दुनिया को अलविदा कह गई। डीएम योगेश्वर राम मिश्र ने इस अमानवीयता की जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के टॉयलेट में शुक्रवार रात करीब 11:30 बजे नवजात बच्ची गंभीर हालत में पड़ी मिली।
स्टाफ नर्स ने उसे इमरजेंसी पहुंचाया। इमरजेंसी ड्यूटी पर मौजूद डॉ. अमित वर्मा ने उपचार शुरू किया। मदद के लिए डॉ. हनफी और डॉ. एसके सिंह को बुलाया गया। तीनों डॉक्टर ने उसे बचाने का काफी प्रयास किया लेकिन असफल रहे।
टॉयलेट तक कैसे पहुंची बच्ची
बाराबंकी के जिला अस्पताल के टॉयलेट में मिली बच्ची को लेकर सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर वो यहां कैसे पहुंची। शुक्रवार रात को गंभीर हालत में मिली इस बच्ची ने शनिवार को सुबह छह बजे दम तोड़ दिया। डॉक्टर लाख कोशिश करने के बाद भी इसे बचा नहीं सके।
डॉ. एसके सिंह के मुताबिक नवजात का गला रेता हुआ था। उसके दोनों पैरों में गंभीर चोटें थीं। सबसे बड़ा सवाल है कि बच्चे इमरजेंसी के टॉयलेट तक कैसे पहुंची। न तो वार्ड में भर्ती मरीज और न उनके तीमारदार और न ही ड्यूटी पर मौजूद लोग यह बता सके कि बच्ची वहां कैसे पहुंची।
सीएमएस डॉ. सर्वेश सक्सेना ने बताया कि बच्ची प्रसाधन कक्ष तक कैसे पहुंची इसकी जांच की जा रही है। मगर इस निमर्मता के पीछे जिसका भी हाथ से उसे सजा जरूर मिलनी चाहिए।