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बालकनी से गिरकर मौत की तरफ इशारा कर रहे हालात

Fri, 19 Jul 2019 01:48 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jul 2019 01:48 AM IST
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New tunr in case of death of maneger of midland hospital
मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर की मौत मामले में नया मोड़ : हत्या नहीं हादसे की ओर इशारा कर रहे हालात
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महानगर स्थित मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर व गोमतीनगर निवासी विश्वजीत सिंह पुंडीर (30) की मौत के हालात हत्या से ज्यादा हादसे की ओर इशारा कर रहे हैं।
परिवारीजन भले ही इसे हत्या बता रहे हों, लेकिन उन्होंने न किसी पर संदेह जताया और न ही हत्या की वजह बता सके हैं।
उधर, पुलिस की अब तक की पड़ताल में विश्वजीत के बालकनी से बाउंड्रीवाल पर लगी लोहे की ग्रिल पर गिरने से चोट की बात ही सामने आ रही है।
हालांकि, मामला बड़े लोगों से जुड़ा होने के चलते पुलिस फूंक-फूंककर कदम रख रही है। इंस्पेक्टर राम सूरत सोनकर का कहना है कि सच्चाई का पता लगाने के लिए पूरे घटनाक्रम का रीक्रिएशन कराने के लिए अधिकारियों से अनुमति मांगी गई है।
साथ ही विश्वजीत के परिवारीजनों और करीबियों से संपर्क करके सच्चाई का पता लगाने का प्रयास हो रहा है। इंस्पेक्टर ने बताया कि रीक्रिएशन में फॉरेंसिक विशेषज्ञों को भी साथ लिया जाएगा। विश्वजीत के कमरे की भी फॉरेंसिक एक्सपर्ट से जांच कराई जाएगी।
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बालकनी से पेड़ की शाखाओं से टकराते हुए गिरने की आशंका
जांचकर्ता टीम का मानना है कि विश्वजीत अपने कमरे की बालकनी से गिरकर घायल हुआ था। टीम के मुताबिक वह बाउंड्रीवाल की ग्रिल पर सीधे नहीं गिरा। अगर ऐसा होता तो उसके शरीर की हालत कुछ और ही होती। वह बालकनी से पहले पेड़ पर गिरा और शाखाओं से टकराते हुए नीचे ग्रिल तक पहुंचा। लोहे की ग्रिल के दो सरिया उसके शरीर के बायें हिस्से में कंधे और कमर के बीच धंस गए। पेड़ से टकराने से उसके गिरने की गति कम हो गई और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोट नहीं लगी।
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पेड़ की टूटी शाखाओं और ग्रिल पर लगा खून बता रहा कहानी
हत्या और हादसे के बीच हो रही जांच में पुलिस को महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि पेड़ की टूटी शाखाएं हादसे की थ्योरी को साफ कर रही हैं। साथ ही ग्रिल की जिस हिस्से में विश्वजीत गिरा, वहां मिले खून के निशान भी कहानी बयां कर रहे हैं। विश्वजीत के हाथ-पैर पर मिले खरोंच के निशान और ग्रिल की दो चोटों के पास ही लगा कट का निशान पेड़ की शाखाओं से ही लगने की बात कही जा रही है।
अत्यधिक रक्तस्त्राव और हार्ट पंचर होने से हुई मौत
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विश्वजीत की मौत की वजह अत्यधिक रक्तस्त्राव और हार्ट पंचर होने से बताई गई है। रिपोर्ट में विश्वजीत के बायें हाथ के नीचे और कमर के बीच में दो गहरे घाव हैं। आसपास कट व खरोंचें दिख रही हैं। इससे साफ है कि वह बाई तरफ से ही ग्रिल पर गिरा था। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों के मुताबिक उसके दोनों घाव करीब ढाई इंच गहरे हैं। पहले उसे गोली मारने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन विशेषज्ञों ने बताया कि यह घाव किसी नुकीली सरिया जैसी वस्तु के लग रहे हैं।
10 सेमी है ग्रिल के सरियों और घाव के बीच की दूरी
विश्वजीत के गिरकर घायल होने की पुलिस की थ्योरी का आधार उसके शरीर पर लगे दोनों घाव और बाउंड्रीवाल पर लगे ग्रिल के सरियों के बीच की दूसरी भी है। दोनों के बीच 10 सेंटीमीटर की दूरी है। विश्वजीत के शरीर पर लगे घाव की दिशा भी महत्वपूर्ण है। दोनों घाव इस तरह के हैं जिससे दो एंगल के बीच में शरीर फंसा होने की पुष्टि होती है। पुलिस ने उसकी टी-शर्ट लोहे की ग्रिल में लगाकर इसकी जांच भी की। दोनों छेद ग्रिल के सरियों में आसानी से घुस गए।
बीयर और गांजे के नशे से असंतुलित होकर गिरा!
विश्वजीत के कमरे से पुलिस को बीयर के चार खाली कैन, मुट्ठीभर गांजा, गांजे की भरी सिगरेट और डिब्बी में रखी सिगरेट मिली हैं। कमरे में वॉशरूम से लेकर बेड तक सिगरेट के जले हुए बड्स भी थे। पुलिस का मानना है कि विश्वजीत ने बीयर पीने के साथ ही गांजे से भरी सिगरेट पी थीं, जिससे उसे अत्यधिक नशा हो गया था। हो सकता है कि इस वजह से उसे घुटन महसूस होने लगी हो और वह ताजी हवा के लिए बालकनी में चला गया हो। वहां असंतुलित होकर वह नीचे गिर पड़ा हो। यह भी माना जा रहा है कि नशे में होने की वजह से वह अपनी चोटों के दर्द और गंभीरता को नहीं भांप सका और खुद ही कमरे में आकर कपड़े बदलने की कोशिश की।
हत्या होती तो चीख-पुकार मचती, सामान अस्त-व्यस्त होता
पुलिस टीम का मानना है कि जिस तरह के हालात हैं, उसमें हत्या छिप नहीं सकती थी। विश्वजीत के कमरे से लेकर बाथरूम, गलियारे और सीढ़ियों पर खून फैला है। यानी वह घायल होने के बाद लहूलुहान हालत में घूमता रहा था। अगर कोई हत्यारा होता तो बिखरे खून को संघर्ष के निशान माना जा सकता था। ऐसे हालात में विश्वजीत अपनी जान बचाने को चीख-पुकार भी मचाता। बचने की कोशिश में उसके शरीर पर कई अन्य गहरे घाव हो जाते। साथ ही कमरे या अन्य जगहों पर रखे सामान में तोड़फोड़ भी होती, लेकिन घटनास्थल पर ऐसे निशान नहीं मिले। घर के सदस्यों व नौकर ने भी किसी तरह की आवाज या चीख-पुकार न सुनने की जानकारी दी। सिर्फ खून बिखरा था जो बता रहा है कि विश्वजीत घायल था और मां के कमरे में पहुंचने से पहले अकेला ही घर में ऊपर से नीचे घूम रहा था।
नशे के शौक से नाराज थी मां, इसलिए दरवाजा खोलते ही मांगी थी माफी
विश्वजीत के नशे के शौक से पूरा परिवार परिचित था। वह अक्सर घर में दोस्तों के साथ देर रात की पार्टी करता था। यही वजह थी कि घर में आने-जाने के लिए उसके पास एक चाबी हमेशा रहती थी। उसकी नशे की आदत से मां बहुत नाराज रहती थीं। जांच टीम का मानना है कि यही वजह थी जब मंगलवार रात हालात विश्वजीत के हाथ से बाहर निकलने लगे तो वह किसी तरह मां के पास पहुंचा। पुलिस का मानना है कि दरवाजा खटखटाने पर मां बाहर आईं तो विश्वजीत ने उनसे माफी मांगी।
कमरे के हालात
एसी चालू हालत में पुलिस को सुबह तक मिले। पुलिस के पहुंचने तक टीवी चालू था। कमरे में विश्वजीत के अलावा किसी का प्रवेश नहीं मिला। यहां तक कि परिवारीजन उसे लेकर सीधे अस्पताल गए। इसके बाद घर के निचले हिस्से में रुके रहें। बाथरूम में विश्वजीत का गीला लोअर मिला, जिस पर खून लगा था। वहीं, टीशर्ट भी मिली। इस पर दो जगह छेद थे, उस पर खून लगा था। बिस्तर भी सलीके से था।
विश्वजीत के रूट का निकलेगा फुटेज
क्षेत्राधिकारी गोमतीनगर अवनीश्वर चंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक, कॉलोनी में लगे सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे हैं। विश्वजीत के जिम से घर के रूट का भी फुटेज निकाला जाएगा। अब तक की पड़ताल में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो सके कि कमरे में विश्वजीत के अलावा कोई और था।

मोबाइल की हो रही तकनीकी जांच
क्षेत्राधिकारी के मुताबिक ,विश्वजीत के मोबाइल का पैटर्न लॉक बुधवार दोपहर में खोल लिया गया था। उसके आधार पर मंगलवार पूरे दिन जिन लोगों से बातचीत की थी। उनकी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। मोबाइल को तकनीकी जांच के लिए भेज दिया है।
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