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टूटा पैर लिए डेढ़ महीने से भटक रहा मजदूर, डॉक्टर ने दिया ये जवाब

Wed, 22 Feb 2017 02:06 AM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Wed, 22 Feb 2017 02:06 AM IST
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negligence of doctor towards poor patient
इलाज म‌िलने के इंतजार में बृज मोहन - फोटो : amar ujala
सरकारी अस्पतालों में इलाज मिलना तो दूर गरीबों के साथ इंसान जैसा व्यवहार मिलना भी मुश्किल होता है। ताजा मामला सिविल अस्पताल का है। गरीबी के कारण इलाज की आस में पहुंचा एक मजदूर बीते डेढ़ माह से टूटा पैर लिए अस्पताल परिसर में ही पड़ा है। 
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उसके पैर से रिस रहा खून प्लास्टर में ही सूख रहा है। जख्म और दर्द तो वह भूल चुका है। बस उसे इंतजार इस बात का रहता है कि सफेद लिबास में यहां से गुजरते एक डॉक्टर की भी रहम हो जाए तो वह फिर से खड़ा हो जाएगा। 
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लखीमपुर के देवीदीन पुरवां गांव के बृजमोहन (28) को सिविल अस्पताल के पार्किंग में असहाय देख अमर उजाला रिपोर्टर पहुंची तो डॉक्टरों की संवेदनहीनता सामने आ गई। पेश से मरीज की वो हर बात जो उसने रिपोर्टर से कही... 
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negligence of doctor towards poor patient
कब म‌िलेगा इलाज

क्या हुआ?
पैर टूट गया है।

भर्ती क्यों नहीं हुए?
डॉक्टर ने नहीं किया। कहा- गरीब हो, बाहर ही रहकर इलाज करा लोगे।

इलाज चल रहा है?
नहीं चल रहा है। चार जनवरी को ओपीडी में दिखाया था। डॉक्टर ने दवा लिखी और प्लास्टर कराने को भेजा। लेकिन प्लास्टर रूम में पहुंचे तो प्लास्टर नहीं किया गया।

दवा खा रहे हो?
हां, जो दवा पहली बार लिखी थी, वही दवा काउंटर से हर हफ्ते ले आता हूं। 

कोई साथ में है?
नहीं, मां-पिता की मौत हो चुकी है। यहां अकेले ही मजदूरी करता था।

पैर टूटा कैसे?
जनेश्वर पार्क में एक भारी लकड़ी उठा रहा था कि बाएं पैर पर गिर गया। मजदूर साथी लोहिया अस्पताल ले गए। वहां कच्चा प्लास्टर लग गया। फिर साथियों के साथ लौट आया। लेकिन तीन दिन बाद ही खून आने लगा तो फिर लोहिया अस्पताल गए। वहां से डॉक्टरों ने सिविल अस्पताल भेज दिया। कहा कि वहां अच्छा इलाज मिलेगा। 

खर्च कैसे चलता है?
खाना अस्पताल का ही मिल जाता है। अस्पताल के ही एक सुपरवाइजर साहब रोज खाना देते हैं। खाना लेने के लिए सुबह-शाम अस्पताल के अंदर जाना पड़ता है। एक पॉलीथिन में खाना मिल जाता है, और फिर बाहर आ जाता हूं।

पढ़िए सिविल अस्पताल के निदेशक का जवाब
आपके अस्पताल में एक मजदूर टूटा पैर लिए परिसर में पड़ा है। उसे भर्ती क्यों नहीं किया जा रहा है।
- भर्ती होने के बाद लोग खुद ही वार्ड छोड़ कर चले जाते हैं।
वह डेढ़ माह से परिसर में ही पड़ा है। वह भर्ती होना चाहता है।
- मुझे इस बात की जानकारी नहीं है। अगर ऐसा है तो वह दोबारा इमरजेंसी में दिखाए, मैं उसे भर्ती करा दूंगा।

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