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नीट में चमके राजधानी के सितारे, यशफीन शहरान को 115वीं तो नैंसी को 449वीं रैंक
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लखनऊ। देशभर के चिकित्सा स्नातक के पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए आयोजित राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नीट) 2012 में राजधानी के मेधावियों ने अपनी सफलता की कहानी गढ़ी है। यशफीन शहरान ने 115, अनूप राय ने 507 और नंदिनी सपरा ने ऑल इंडिया 706 रैंक हासिल कर शहर का मान बढ़ाया है। इन मेधावियों की पहली पसंद दिल्ली केचिकित्सा संस्थान हैं। इसके बाद ये केजीएमयू के लिए दावेदारी कर रहे हैं।
विषय से प्यार करें, बोझ लेकर न पढ़ें
मैं शुरू से ही स्कूल की टॉपर रही हूं और हमेशा से ही मेडिकल क्षेत्र में जाना चाहती थी। सीआईएससीई के क्लास 10 बोर्ड परीक्षा में ऑल इंडिया छठवीं तो 12वीं बोर्ड परीक्षा में ऑल इंडिया प्रथम रैंक हासिल की थी। इंटर के बाद एक साल ड्रॉप किया और पहले प्रयास में सफलता पाई। देर रात तक पढ़ती थी और सुबह जल्दी उठ जाती थी। पढ़ने के बाद बार-बार रिवीजन किया। पिता डॉ. सहरान अहमद चिकित्सक हैं और मां सुमैया गृहिणी। दूसरे छात्रों को सलाह है कि मेडिकल क्षेत्र में तभी आएं जब विषय से प्यार हो। लगन के साथ पढ़ें। बोझ लेकर कभी न पढ़ें।
- यशफीन शहरान, रैंक 115
सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट पक्की
मैंने आरएलबी से इंटर उत्तीर्ण किया है और निरंतर पढ़ाई, बार-बार रिवीजन और टेस्ट सीरिज की बदौलत सफलता प्राप्त की है। ऑल इंडिया 449 रैंक हासिल कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट पक्की कर ली है। अपनी सफलता का श्रेय अभिभावकों, शिक्षकों को देती हूं।
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- नैंसी यादव, रैंक 449
बिना कोचिंग पहले प्रयास में सफलता
अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देता हूं। आरएलबी से इंटर करने के बाद पहले ही प्रयास में बिना कोचिंग के सफलता पाई। सभी से कहता हूं कि संबंधित विषयों में वास्तविक रुचि हो तो कोचिंग की जरूरत नहीं होती। सेल्फ स्टडी की। रोज आठ से 10 घंटे पढ़ाई की। जो पढ़ा उसका बार-बार रिवीजन किया। जमकर प्रश्नपत्र हल किए। मेरी बहन शगुन भी केजीएमयू से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों को सलाह है कि अपने विषय पर पकड़ बनाओ और जमकर अभ्यास करो। पिता आनंद प्रकाश राय सचिवालय में अनुसचिव हैं।
- अनूप कमार राय, रैंक 507
नीट से पहले के 40 दिन रहे अहम
मैंने इसी वर्ष गोमती नगर सीएमएस से इंटर की परीक्षा 99 प्रतिशत के साथ उत्तीर्ण की और पहले प्रयास में ही सफलता पाई। परीक्षा खत्म होने और नीट से पहले मुझे करीब 40 दिन का समय मिला। इसने अंत समय में मेरी तैयारी में काफी सहयोग किया। इस दौरान पुराने टॉपिक को फिर से पढ़ा और अभ्यास किया। नए टॉपिक के प्रश्नपत्र हल करती थी। परीक्षा से पहले काफी टेस्ट दिए। दूसरे छात्रों को सलाह है कि वे खूब टेस्ट दें। मुझे एमबीबीएस के बाद ऑन्कोलॉजी में विशेषज्ञता हासिल करनी है। पिता सुरेश कुमार सपरा उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम हैं।
- नंदिनी सपरा, रैंक 706
एनसीईआरटी की किताबों से की तैयारी
सफलता यूं ही नहीं मिलती। मैंने सीएमएस स्टेशन रोड से इंटर उत्तीर्ण करने के बाद एक साल ड्रॉप कर नीट की तैयारी की। पूरे कोर्स को बार-बार पढ़ा, ताकि अभ्यस्त हो जाऊं। एनसीईआरटी की किताबों को मैंने रेग्युलर फॉलो किया, बाकी कोचिंग के टीचर्स के नोट्स काम आए। पढ़ाई के अलावा रिवीजन बहुत जरूरी है। इसलिए मैंने रिवीजन में कोई कसर नहीं छोड़ी। दूसरे छात्रों को टिप्स हैं कि कोर्स को पूरा करने के लिए समय दें और निरंतर बढ़ते रहें। पिता धीरेंद्र मिश्रा राजभवन में उद्यान अधीक्षक हैं। फिलहाल मेरा फोकस एमबीबीएस पर ही है।
- अमृतेश कुमार मिश्रा, रैंक 2906
तीन साल लखनऊ में रहकर की तैयारी
मूलरूप से मैं वाराणसी की रहने वाली हूं। प्रयागराज से स्कूलिंग करने केबाद मैंने तीन साल लखनऊ में रहकर नीट की तैयारी की। मेरा लक्ष्य डॉक्टर बनना ही था, इसलिए मैंने काफी समय दिया। जितने भी प्रयास किए, अपनी कमियों को पहचान कर अभ्यास व टेस्ट के जरिए मजबूत किया। फिजिक्स पर ज्यादा फोकस किया। अंत में मैंने ज्यादा से ज्यादा टेस्ट सीरीज दिए। दूसरे छात्रों को सलाह है कि वे अभ्यास और टेस्ट पर ज्यादा फोकस करें। इससे उन्हें मालूम चल जाएगा कि उनका बेसिक कितना तैयार है।
- सौम्या चौबे, रैंक 3183
ज्यादा से ज्यादा पेपर हल करें
मूलरूप से मैं बाराबंकी का रहना वाला हूं और पिता शंखनाथ वर्मा खेती करते हैं। मैंने रायबरेली से 2019 में इंटर किया, उके बाद लखनऊ आकर तीन साल तैयारी की। मेरा लक्ष्य शुरू से ही डॉक्टर बनना था। एमबीबीएस केबाद मैं ऑर्थो सर्जन बनना चाहता हूं। तैयारी के दौरान मैंने कोचिंग नोट्स के अलावा एनसीईआरटी के सिलेबस को फॉलो किया। परीक्षा से पहले करीब 70 टेस्ट दिए, तब जाकर आत्मविश्वास आया। दूसरे छात्रों को सलाह है कि ज्यादा से ज्यादा पेपर हल करें।
- चक्रपानी पटेल, रैंक 5306
बेसिक पर पहले बनाई पकड़
मूलरूप से मैं सिद्घार्थनगर का रहना वाला हूं। पिछले तीन साल से लखनऊ में रहकर तैयारी कर रहा था। क्योंकि मैंने गांव के स्कूल से पढ़ाई की थी, इसलिए मुझे अपना बेसिक तैयार करने में समय लगा। बायोलॉजी के लिए एनसीईआरटी की किताबों का सहारा लिया। बाकी विषयों की तैयारी कोचिंग के नोट्स से की। नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने के लिए पेपर काफी हल करने पड़ते हैं। साथ ही कोचिंग के टेस्ट सीरीज भी देना जरूरी है। जितना हो सके उतने टेस्ट दें।
- अली अहमद, रैंक 6749
सिक्योरिटी गार्ड की बेटी ने मारी बाजी
पिता एस तकी अब्बास एक साल से बीमार हैं और बेड रेस्ट पर हैं। इससे पहले वे सिक्योरिटी गार्ड थे। मां तबस्सुम गृहिणी है। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, लेकिन परिवार के बाकी सदस्यों का सहयोग मिलता रहता है। कोचिंग स्टाफ से भी मदद मिली। आर्थिक सहयोग भी मिला। एक भाई था जिसकी दो वर्ष पहले दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। मैंने ठान लिया कि डॉक्टर बनकर अपने परिवार की समस्याओं को खत्म करूंगी। यह मेरा दूसरा प्रयास था। जब मन करता था टारगेट तय करके पढ़ती थी, कोई टाइम टेबल सेट नहीं किया था। सेल्फ स्टडी पर ज्यादा ध्यान दिया। दूसरे छात्रों को सलाह है कि वे खुद की पढ़ाई पर आत्मविश्वास रखें।
- समइया अब्बास, रैक 6382
कड़ी मेहनत से मिली सफलता
कड़ी मेहनत से किसी भी परीक्षा में सफलता प्राप्त की जा सकती है। मैंने भी कड़ी मेहनत व लगन से नीट उत्तीर्ण किया है। इसका श्रेय माता-पिता और भगवान को देती हूं। शुरू से ही डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी, जो आज पूरा हो रहा है।
- शांभवी पांडेय, रैंक 7809
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विषय से प्यार करें, बोझ लेकर न पढ़ें
मैं शुरू से ही स्कूल की टॉपर रही हूं और हमेशा से ही मेडिकल क्षेत्र में जाना चाहती थी। सीआईएससीई के क्लास 10 बोर्ड परीक्षा में ऑल इंडिया छठवीं तो 12वीं बोर्ड परीक्षा में ऑल इंडिया प्रथम रैंक हासिल की थी। इंटर के बाद एक साल ड्रॉप किया और पहले प्रयास में सफलता पाई। देर रात तक पढ़ती थी और सुबह जल्दी उठ जाती थी। पढ़ने के बाद बार-बार रिवीजन किया। पिता डॉ. सहरान अहमद चिकित्सक हैं और मां सुमैया गृहिणी। दूसरे छात्रों को सलाह है कि मेडिकल क्षेत्र में तभी आएं जब विषय से प्यार हो। लगन के साथ पढ़ें। बोझ लेकर कभी न पढ़ें।
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- यशफीन शहरान, रैंक 115
सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट पक्की
मैंने आरएलबी से इंटर उत्तीर्ण किया है और निरंतर पढ़ाई, बार-बार रिवीजन और टेस्ट सीरिज की बदौलत सफलता प्राप्त की है। ऑल इंडिया 449 रैंक हासिल कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीट पक्की कर ली है। अपनी सफलता का श्रेय अभिभावकों, शिक्षकों को देती हूं।
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- नैंसी यादव, रैंक 449
बिना कोचिंग पहले प्रयास में सफलता
अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देता हूं। आरएलबी से इंटर करने के बाद पहले ही प्रयास में बिना कोचिंग के सफलता पाई। सभी से कहता हूं कि संबंधित विषयों में वास्तविक रुचि हो तो कोचिंग की जरूरत नहीं होती। सेल्फ स्टडी की। रोज आठ से 10 घंटे पढ़ाई की। जो पढ़ा उसका बार-बार रिवीजन किया। जमकर प्रश्नपत्र हल किए। मेरी बहन शगुन भी केजीएमयू से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों को सलाह है कि अपने विषय पर पकड़ बनाओ और जमकर अभ्यास करो। पिता आनंद प्रकाश राय सचिवालय में अनुसचिव हैं।
- अनूप कमार राय, रैंक 507
नीट से पहले के 40 दिन रहे अहम
मैंने इसी वर्ष गोमती नगर सीएमएस से इंटर की परीक्षा 99 प्रतिशत के साथ उत्तीर्ण की और पहले प्रयास में ही सफलता पाई। परीक्षा खत्म होने और नीट से पहले मुझे करीब 40 दिन का समय मिला। इसने अंत समय में मेरी तैयारी में काफी सहयोग किया। इस दौरान पुराने टॉपिक को फिर से पढ़ा और अभ्यास किया। नए टॉपिक के प्रश्नपत्र हल करती थी। परीक्षा से पहले काफी टेस्ट दिए। दूसरे छात्रों को सलाह है कि वे खूब टेस्ट दें। मुझे एमबीबीएस के बाद ऑन्कोलॉजी में विशेषज्ञता हासिल करनी है। पिता सुरेश कुमार सपरा उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के डीआरएम हैं।
- नंदिनी सपरा, रैंक 706
एनसीईआरटी की किताबों से की तैयारी
सफलता यूं ही नहीं मिलती। मैंने सीएमएस स्टेशन रोड से इंटर उत्तीर्ण करने के बाद एक साल ड्रॉप कर नीट की तैयारी की। पूरे कोर्स को बार-बार पढ़ा, ताकि अभ्यस्त हो जाऊं। एनसीईआरटी की किताबों को मैंने रेग्युलर फॉलो किया, बाकी कोचिंग के टीचर्स के नोट्स काम आए। पढ़ाई के अलावा रिवीजन बहुत जरूरी है। इसलिए मैंने रिवीजन में कोई कसर नहीं छोड़ी। दूसरे छात्रों को टिप्स हैं कि कोर्स को पूरा करने के लिए समय दें और निरंतर बढ़ते रहें। पिता धीरेंद्र मिश्रा राजभवन में उद्यान अधीक्षक हैं। फिलहाल मेरा फोकस एमबीबीएस पर ही है।
- अमृतेश कुमार मिश्रा, रैंक 2906
तीन साल लखनऊ में रहकर की तैयारी
मूलरूप से मैं वाराणसी की रहने वाली हूं। प्रयागराज से स्कूलिंग करने केबाद मैंने तीन साल लखनऊ में रहकर नीट की तैयारी की। मेरा लक्ष्य डॉक्टर बनना ही था, इसलिए मैंने काफी समय दिया। जितने भी प्रयास किए, अपनी कमियों को पहचान कर अभ्यास व टेस्ट के जरिए मजबूत किया। फिजिक्स पर ज्यादा फोकस किया। अंत में मैंने ज्यादा से ज्यादा टेस्ट सीरीज दिए। दूसरे छात्रों को सलाह है कि वे अभ्यास और टेस्ट पर ज्यादा फोकस करें। इससे उन्हें मालूम चल जाएगा कि उनका बेसिक कितना तैयार है।
- सौम्या चौबे, रैंक 3183
ज्यादा से ज्यादा पेपर हल करें
मूलरूप से मैं बाराबंकी का रहना वाला हूं और पिता शंखनाथ वर्मा खेती करते हैं। मैंने रायबरेली से 2019 में इंटर किया, उके बाद लखनऊ आकर तीन साल तैयारी की। मेरा लक्ष्य शुरू से ही डॉक्टर बनना था। एमबीबीएस केबाद मैं ऑर्थो सर्जन बनना चाहता हूं। तैयारी के दौरान मैंने कोचिंग नोट्स के अलावा एनसीईआरटी के सिलेबस को फॉलो किया। परीक्षा से पहले करीब 70 टेस्ट दिए, तब जाकर आत्मविश्वास आया। दूसरे छात्रों को सलाह है कि ज्यादा से ज्यादा पेपर हल करें।
- चक्रपानी पटेल, रैंक 5306
बेसिक पर पहले बनाई पकड़
मूलरूप से मैं सिद्घार्थनगर का रहना वाला हूं। पिछले तीन साल से लखनऊ में रहकर तैयारी कर रहा था। क्योंकि मैंने गांव के स्कूल से पढ़ाई की थी, इसलिए मुझे अपना बेसिक तैयार करने में समय लगा। बायोलॉजी के लिए एनसीईआरटी की किताबों का सहारा लिया। बाकी विषयों की तैयारी कोचिंग के नोट्स से की। नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने के लिए पेपर काफी हल करने पड़ते हैं। साथ ही कोचिंग के टेस्ट सीरीज भी देना जरूरी है। जितना हो सके उतने टेस्ट दें।
- अली अहमद, रैंक 6749
सिक्योरिटी गार्ड की बेटी ने मारी बाजी
पिता एस तकी अब्बास एक साल से बीमार हैं और बेड रेस्ट पर हैं। इससे पहले वे सिक्योरिटी गार्ड थे। मां तबस्सुम गृहिणी है। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है, लेकिन परिवार के बाकी सदस्यों का सहयोग मिलता रहता है। कोचिंग स्टाफ से भी मदद मिली। आर्थिक सहयोग भी मिला। एक भाई था जिसकी दो वर्ष पहले दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। मैंने ठान लिया कि डॉक्टर बनकर अपने परिवार की समस्याओं को खत्म करूंगी। यह मेरा दूसरा प्रयास था। जब मन करता था टारगेट तय करके पढ़ती थी, कोई टाइम टेबल सेट नहीं किया था। सेल्फ स्टडी पर ज्यादा ध्यान दिया। दूसरे छात्रों को सलाह है कि वे खुद की पढ़ाई पर आत्मविश्वास रखें।
- समइया अब्बास, रैक 6382
कड़ी मेहनत से मिली सफलता
कड़ी मेहनत से किसी भी परीक्षा में सफलता प्राप्त की जा सकती है। मैंने भी कड़ी मेहनत व लगन से नीट उत्तीर्ण किया है। इसका श्रेय माता-पिता और भगवान को देती हूं। शुरू से ही डॉक्टर बनने का सपना देख रही थी, जो आज पूरा हो रहा है।
- शांभवी पांडेय, रैंक 7809