लखनऊ। संस्कृति विभाग की ओर से राज्य संग्रहालय में चल रहे 10 दिवसीय कला अभिरुचि पाठ्यक्रम के मौके पर दूसरे दिन बृहस्पतिवार को भारतीय प्राचीन कला के बारे में बताया गया। मुख्य वक्ता भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक डॉ. राकेश तिवारी ने प्राचीन कला के उद्भव विकास विषय पर प्रकाश डाला। भारतीय प्राचीन कला को समझने की जरूरत है। प्राचीन कला हजारों वर्षों की सांस्कृतिक, धार्मिक और दार्शनिक विरासत को समेटे हुए है, जो आध्यात्मिक उद्देश्यों, प्रतीकात्मकता को दर्शाती है। उन्होंने शैल कला का परिचय देते हुए उसके अलग-अलग रूप के बारे में भी बताया। वहीं, वाल्मिीकि रामायण के अयोध्या कांड में शामिल शैल चित्रों वाली एक पहाड़ी के बारे में भी बताया। कार्यक्रम में प्रख्यात साहित्यकार, कवि व चित्रकार प्रो. जगदीश गुप्ता के विचारों को भी साझा किया गया। सहायक निदेशक डॉ. मीनाक्षी खेमका, शारदा प्रसाद, प्रीती साहनी, डॉ. अनीता चौरसिया, धनंजय कुमार राय, शशिकला राय, शालिनी श्रीवास्तव, प्रमोद कुमार, राहुल सैनी मौजूद रहे।

राज्य संग्रहालय में चल रहे कायर्क्रम में बृहस्पतिवार को संबोधित करते भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण