नेशनल हॉकी प्लेयर ने की जान देने की कोशिश!
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केडी सिंह बाबू स्टेडियम स्थित स्पोर्ट्स हॉस्टल में नेशनल हॉकी प्लेयर संजीत सिंह चौहान ने जहर खाकर खुदकुशी की कोशिश की। बुधवार शाम करीब पांच बजे हॉकी प्रशिक्षु हॉस्टल पहुंचे तो संजीत बेसुध मिला।
आनन-फानन में उसे सिविल अस्पताल ले जाया गया। होश में आने पर उसने वार्डन जीडी बारीकी पर प्रताड़ना का आरोप लगाया। संजीत को शनिवार को रैगिंग के आरोप के चलते हॉस्टल से निकाल दिया गया था।
हॉस्टल के खिलाड़ियों ने उसे निकाले जाने का सोमवार को विरोध किया था। हालांकि घरवालों के दबाव में खिलाड़ियों ने बाद में पल्ला झाड़ लिया। संजीत सिंह को केडी सिंह बाबू हॉस्टल में रहते हुए छह साल और दस महीने हो चुके थे।
नेशनल, जूनियर और सब जूनियर नेशनल खेलने वाले इस खिलाड़ी पर आरोप था कि उसने हॉस्टल में रहने वाले एक अन्य खिलाड़ी अभिषेक की पिटाई कर दी थी।
होश में आने के बाद संजीत ने बताया कि खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए खेल निदेशक आरपी सिंह से भी मिला था। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया, लेकिन कोई रास्ता न दिखने पर मुझे यह कदम उठाना पड़ा।
घेरे में खेल कार्यालय की कार्यशैली
केडी सिंह बाबू स्टेडियम के आवासीय छात्रावास में हॉकी खिलाड़ी संजीत सिंह चौहान के जहर खाने की घटना से यह तो साफ हो गया कि खिलाड़ियों पर खेल विभाग के अधिकारी नियंत्रण कसने में नाकाम रहे हैं।
शनिवार को स्टेडियम से निकाले जाने के बावजूद यह खिलाड़ी छात्रावास में कैसे रह रहा था। साथ ही बॉयज वार्डन की लगातार शिकायतों के बावजूद आरएसओ की ओर से कोई भी कार्यवाही न किया जाना निराशाजनक है।
वार्डन ने उत्पीड़न की बात नकारी
खाने को लेकर भी पिछले काफी समय से खिलाड़ी विरोध जता रहे थे, लेकिन इस पर भी खेल कार्यालय ने चुप्पी साधे रखी। संजीत का कहना है कहा कि हॉस्टल के वार्डन जीडी बारीकी पिछले काफी समय से खिलाड़ियों का उत्पीड़न कर रहे हैं। हालांकि वार्डन जीडी बारीकी इसको सिरे से नकारते हैं।
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी एलआर पटेल का कहना है कि मुझे इसका कतई भी अंदाजा नहीं था कि बात यहां तक पहुंचेगी। संजीत को निकालने के लिए उसके कोच और वार्डन के अलावा एक खिलाड़ी ने लिखित शिकायत की थी। इस आधार पर उसके खिलाफ कार्यवाही की गई।
फिलहाल मैंने हादसे की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दे दी है। उनके बात करने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा कि आगे क्या फैसला करना है।’
वहीं सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशुतोष दुबे का कहना है, संजीत को प्वाइजनिंगकी शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जांच में सब कुछ सामान्य है और जहर खाने का कोई लक्षण नहीं मिला है। ऑब्जर्वेशन के तौर पर भर्ती किया गया लेकिन उसकी हालत सामान्य और पहले से बेहतर है और किसी तरह की कोई चिंताजनक बात नहीं है।