सपा को दूसरा झटका, बर्खास्त पूर्व मंत्री बसपा में शामिल
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सपा को एक और झटका लगा है। पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी के बाद पूर्व मंत्री नारद राय ने भी सपा से इस्तीफा देकर बसपा का दामन थाम लिया है। बसपा सुप्रीमो मायावती की ओर से राय को बलिया सदर से प्रत्याशी भी बनाने का एलान कर दिया गया।
वे यहीं से मौजूदा विधायक हैं। इस वजह से पूर्व में घोषित प्रत्याशी रामजी गुप्ता का टिकट काट दिया गया है। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीशचंद्र मिश्र ने अपने आवास पर राय को बसपा में शामिल किए जाने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि नारद राय रविवार को बसपा अध्यक्ष मायावती से मिले और बिना शर्त बसपा में शामिल होने की इच्छा जताई।
राय समाजवादी पार्टी में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के विश्वस्त लोगों में रहे हैं। उनका पूर्वांचल के भूमिहार समाज में प्रभाव माना जाता है। मुख्यमंत्री ने उन्हें दो बार मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया। पहली बार अक्तूबर 2015 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री अंबिका चौधरी सहित आठ मंत्रियों के साथ। दूसरी बार पिछले साल अक्तूबर 2016 में पारिवारिक कलह के बीच शिवपाल सिंह यादव, ओमप्रकाश सिंह व शादाब फातिमा के साथ बर्खास्त किया गया।
राय इस दौरान तत्कालीन सपा मुखिया मुलायम व शिवपाल के साथ रहे। अखिलेश यादव ने सपा की कमान संभालने के बाद राय का टिकट काट दिया था। इसके बाद से ही राय के बसपा में जाने की अटकलें लग रही थीं।
सीएम ऐसा अपमान कर रहे थे, जैसा कोई नौकर का भी नहीं करता
नारद राय ने बसपा में शामिल होते ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर आरोपों की बौछार की। राय ने कहा, मुख्यमंत्री ने मुझे जिस तरह दो बार मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया, इस तरह तो कोई अपने नौकर को भी अपमानित नहीं करता। जब मुख्यमंत्री ने नेताजी का अपमान करना शुरू कर दिया, तो तय हो गया कि अब सपा में रहना अब संभव नहीं है।
सपा को आगे भी झटका देने की तैयारी
नारद राय से सवाल हुआ कि वह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर मुलायम सिंह यादव को अपमानित करने का आरोप लगाते हैं और सीएम कहते हैं कि उनका आशीर्वाद उनके साथ है?
राय ने कहा कि देखते जाइए, आगे होता है क्या? इससे इस बात को और बल मिल गया है कि सपा के कुछ और प्रमुख चेहरे भी बसपा में शामिल हो सकते हैं। एक अन्य सवाल के जवाब में मिश्र ने कहा कि मुलायम पहले ही कह चुके हैं कि अखिलेश मुस्लिम विरोधी हैं।
राम मंदिर व गोहत्या पर रोक जैसे मुद्दे उठाने का आयोग ले संज्ञान
सतीशचंद्र मिश्र ने कहा कि चुनाव आयोग को इस बात का संज्ञान लेना चाहिए कि क्या सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मुद्दे को चुनाव में उठाया जा सकता है। उनसे भाजपा द्वारा राम मंदिर और गोहत्या पर रोक जैसे मुद्दे उठाए जाने पर सवाल हुआ था। उन्होंने कहा कि गोहत्या वहीं ज्यादा हो रही है, जहां भाजपा की सरकारें हैं।