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Lucknow News: पदक पाने वाले पांच विद्यार्थियों के नाम बदले
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लखनऊ। संशोधन के बाद लविवि में दीक्षांत समारोह के लिए पदकों, पुरस्कारों की अंतिम सूची जारी कर दी है। पांच विद्यार्थियों के नामों में बदलाव किया गया है। इस संबंध में परीक्षा नियंत्रक ने आदेश जारी कर दिया है।
परीक्षा नियंत्रक विद्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि अनंतिम सूची के सापेक्ष आपत्तियां मांगी गई थी। पांच पदक के लिए आईं आपत्तियों को सही माना गया। पदक पाने वालों के नाम बदलकर अंतिम सूची विवि की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है।
भृगु प्रसाद मेमोरियल प्राइज इन साइकोलॉजी अवॉर्ड निशा अवस्थी के बजाय अब स्वाति गुप्ता को मिलेगा। पदक अध्यादेश को आधार बनाते हुए छात्रा के तीसरे व चौथे सेमेस्टर के विषय को जोड़ा गया 0है। इसी तरह डॉ. इंद्रजीत सिंह गोल्ड मेडल श्वेतांशु उपाध्याय के स्थान पर जिज्ञासा वर्मा, पंडित जगपाल कृष्ण गोल्ड मेडल अनुष्का श्रीवास्तव की जगह आकांक्षा पवन, चांसलर ब्रोंज मेडल सुरुचि शुक्ला के बजाय दिव्या शुक्ला और उदय शंकर मेमोरियल गोल्ड मेडल आस्था श्रीवास्तव से अब विजय पटेल की झोली में आएगा। दीक्षांत में पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार को मिलेगी मानद उपाधि
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लखनऊ विश्वविद्यालय में 10 सितंबर को होने वाले 68वें दीक्षांत समारोह में पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार को मानद उपाधि से नवाजा जाएगा। पूर्व सीएसआईआर महानिदेशक डॉ. शेखर सी. मांडे बतौर मुख्य अतिथि दीक्षांत उद्बोधन देंगे। दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि और मानद उपाधि प्रदान करने के लिए कुलपति की ओर से राजभवन को तीन नाम भेजे गए थे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इनमें से इन दोनों नामों पर मंजूरी दी है। प्रशांत कुमार पूर्व पुलिस महानिदेशक और 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वह मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से आते हैं। उनकी पहचान तेज तर्रार, निर्णयात्मक अफसर के रूप में रही है। साहस और नेतृत्व के लिए उन्हें लगातार वर्ष 2020, 2021, 2022 और 2023 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया।
डॉ. शेखर सी. मांडे प्रोटीन संरचना और कार्य, क्षयरोग (टीबी) जीवविज्ञान, जैवभौतिकी एवं जैवरसायन दृष्टिकोण तथा संगणकीय जीव विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए विश्वभर में ख्याति प्राप्त हैं। उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलूरू से मॉलिक्यूलर बायोफिजिक्स में पीएचडी की है। अक्तूबर 2018 में उन्होंने डीएसआईआर सचिव और सीएसआईआर महानिदेशक के रूप में पदभार संभाला। उन्हें कई सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार (2005), बीएम बिरला यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड (1999), भारत अस्मिता तंत्रविज्ञान पुरस्कार (2019) और एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा से डॉक्टर ऑफ साइंस (डिग्री ऑफ ऑनोरिस कॉज़ा) शामिल हैं। डॉ. शेखर भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय विज्ञान अकादमी, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज और आंध्र प्रदेश अकादमी ऑफ साइंसेज़ के फेलो भी हैं।
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परीक्षा नियंत्रक विद्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि अनंतिम सूची के सापेक्ष आपत्तियां मांगी गई थी। पांच पदक के लिए आईं आपत्तियों को सही माना गया। पदक पाने वालों के नाम बदलकर अंतिम सूची विवि की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है।
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भृगु प्रसाद मेमोरियल प्राइज इन साइकोलॉजी अवॉर्ड निशा अवस्थी के बजाय अब स्वाति गुप्ता को मिलेगा। पदक अध्यादेश को आधार बनाते हुए छात्रा के तीसरे व चौथे सेमेस्टर के विषय को जोड़ा गया 0है। इसी तरह डॉ. इंद्रजीत सिंह गोल्ड मेडल श्वेतांशु उपाध्याय के स्थान पर जिज्ञासा वर्मा, पंडित जगपाल कृष्ण गोल्ड मेडल अनुष्का श्रीवास्तव की जगह आकांक्षा पवन, चांसलर ब्रोंज मेडल सुरुचि शुक्ला के बजाय दिव्या शुक्ला और उदय शंकर मेमोरियल गोल्ड मेडल आस्था श्रीवास्तव से अब विजय पटेल की झोली में आएगा। दीक्षांत में पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार को मिलेगी मानद उपाधि
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लखनऊ विश्वविद्यालय में 10 सितंबर को होने वाले 68वें दीक्षांत समारोह में पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रशांत कुमार को मानद उपाधि से नवाजा जाएगा। पूर्व सीएसआईआर महानिदेशक डॉ. शेखर सी. मांडे बतौर मुख्य अतिथि दीक्षांत उद्बोधन देंगे। दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि और मानद उपाधि प्रदान करने के लिए कुलपति की ओर से राजभवन को तीन नाम भेजे गए थे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इनमें से इन दोनों नामों पर मंजूरी दी है। प्रशांत कुमार पूर्व पुलिस महानिदेशक और 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वह मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से आते हैं। उनकी पहचान तेज तर्रार, निर्णयात्मक अफसर के रूप में रही है। साहस और नेतृत्व के लिए उन्हें लगातार वर्ष 2020, 2021, 2022 और 2023 में राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया।
डॉ. शेखर सी. मांडे प्रोटीन संरचना और कार्य, क्षयरोग (टीबी) जीवविज्ञान, जैवभौतिकी एवं जैवरसायन दृष्टिकोण तथा संगणकीय जीव विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए विश्वभर में ख्याति प्राप्त हैं। उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलूरू से मॉलिक्यूलर बायोफिजिक्स में पीएचडी की है। अक्तूबर 2018 में उन्होंने डीएसआईआर सचिव और सीएसआईआर महानिदेशक के रूप में पदभार संभाला। उन्हें कई सम्मान प्राप्त हुए, जिनमें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार (2005), बीएम बिरला यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड (1999), भारत अस्मिता तंत्रविज्ञान पुरस्कार (2019) और एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा से डॉक्टर ऑफ साइंस (डिग्री ऑफ ऑनोरिस कॉज़ा) शामिल हैं। डॉ. शेखर भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय विज्ञान अकादमी, नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज और आंध्र प्रदेश अकादमी ऑफ साइंसेज़ के फेलो भी हैं।