UP News: ''नफीस'' सॉफ्टवेयर बताएगा अपराधियों की कुंडली, उंगली स्कैन करते ही सामने आएगा पूरा डाटा
नफीस सॉफ्टवेयर के जरिए एनसीआरबी में अपराधियों का डाटा सुरक्षित रखा जाएगा। दूसरे प्रांत में पकड़े गए तो उंगली स्कैन करते ही पूरा आपराधिक रिकॉर्ड सामने आ जाएगा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कमिश्नरेट पुलिस हाईटेक हो रही है। अब नए सॉफ्टवेयर ''नफीस'' (नेशनल ऑटोमेटिक फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) के जरिये एक क्लिक पर अपराधियों की कुंडली पूरे देश में कहीं भी मिल जाएगी। कमिश्नरेट में इसके सेल का गठन कर दिया गया है। इस सॉफ्टवेयर के जरिये बदमाशों का डाटा एनसीआरबी में भी सुरक्षित रखा जाएगा। केंद्र सरकार ने ऐसे अपराधियों की कुंडली रखने के लिए इस सॉफ्टवेयर का निर्माण कराया है। इसमें नाम व पहचान डालते ही संबंधित बदमाश की पूरी कुंडली खुल जाएगी। इसके अलावा नाम बदलकर और छिपकर वारदात करने वाले शातिरों पर भी शिकंजा कसा जाएगा। इसके अलावा कुछ ऐसे बदमाश भी हैं जो कहीं बड़े व छोटे अपराध में जेल चले जाते हैं, लेकिन रिकॉर्ड न होने के कारण पुलिस उन पर कार्रवाई नहीं कर पाती। ऐसे बदमाशों को बेनकाब करने के लिए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो का ''नफीस'' काफी कारगर रहेगा। खासकर ऐसे जो अपने जिलों में शरीफ बनकर रहते हैं और दूसरे जिलों व प्रांत में गिरोह चलाते हैं।
छह महीने पहले शुरू हुआ ''नफीस'' सेल
एडीसीपी क्राइम अखिलेश सिंह के मुताबिक, केंद्र सरकार ने अपराधियों के रिकॉर्ड ऑनलाइन रखने के लिए ''नफीस'' बनाया है। लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट में इस व्यवस्था को जनवरी में लागू किया गया है। इसमें तीन पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इंस्पेक्टर गीता द्विवेदी को प्रभारी बनाया गया है। इसके अलावा एक उपनिरीक्षक व एक मुख्य आरक्षी को रखा गया है।
ये भी पढ़ें - गोलमाल: मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं, बिल 10 लाख रुपये महीना, कार्यदायी संस्थाओं ने किया खेल
ये भी पढ़ें - एक और नया खुलासा, शूटर विजय को हत्या के बाद मिलनी थी सुपारी की रकम, अब असलम से संपर्क टूटा
अब तक 1231 अपराधियों का डाटा जुटाया
एडीसीपी क्राइम के मुताबिक, जनवरी से शुरू किए गए इस सेल में तैनात पुलिसकर्मी सतर्कता से काम कर रहे हैं। अब तक कमिश्नरेट के 52 थानों से जेल भेजे गए 1231 अपराधियों का डाटा जुटाया गया है। जून में महज 15 दिन में 178 अपराधियों का बायोमीट्रिक रिकॉर्ड दर्ज कराया जा चुका है। एडीसीपी के मुताबिक, प्रतिदिन यह सेल सात से आठ अपराधियों का रिकॉर्ड जुटा रहा है। हालांकि, इस जून में यह आकंड़ा प्रति 11 से 12 के बीच पहुंच गया है।
ऐसे काम करता है सेल
अपराधी की गिरफ्तारी के साथ ही नफीस सेल का काम शुरू हो जाता है। पुलिस टीम जीडी में दाखिला करने के बाद और कोर्ट ले जाने से पहले अपराधी को नफीस सेल लेकर आती है। यहां अपराधी की उंगलियों के छाप मशीन पर लिए जाते हैं। इसके बाद कंप्यूटर में पूरा डाटा फीड किया जाता है। अपराधी के नाम, पते, कितने थानों में मुकदमें, किस धारा में मुकदमा दर्ज है और उसके गिरोह के बारे में पूरी जानकारी फीड की जाती है।