पांच वर्षों से अधिक समय से स्थापित विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों का नैक मूल्यांकन अनिवार्य हो- राज्यपाल आनंदीबेन
-राज्यपाल ने कहा, कुलपति का कार्यकाल पांच वर्ष का होना चाहिए
-खेद की बात है कि विश्वविद्यालय में शिक्षकों के पद शत प्रतिशत नहीं भरे
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि पांच वर्षों से अधिक समय से स्थापित सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के लिए नैक द्वारा मूल्यांकन अनिवार्य होना चाहिए। नैक मूल्यांकन नहीं कराने पर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थाओं को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान अथवा किन्हीं अन्य संस्थाओं से वित्तीय सहायता प्राप्त करनी है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से नैक संस्था से मूल्यांकन कराना ही होगा। राज्यपाल ने कहा कि यह खेद का विषय है कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के शत प्रतिशत पद भरे नहीं हैं, उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों को पदों को भरने के लिए गंभीरता से विचार करना चाहिए।
राज्यपाल मंगलवार को राजभवन से उच्च शिक्षा विभाग तथा राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘नैक मूल्यांकन एवं उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार’ विषय पर आधारित वेबिनार को संबोधित कर रहीं थीं। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा में तेजी से आए बदलाव के कारण उच्च शिक्षा की गुणवत्तापरक वृद्धि के सतत प्रयासों के लिए तकनीकी संसाधनों का प्रयोग भी आवश्यक होगा। वर्तमान परिस्थितियों में ऑनलाइन शिक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा।
राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश के 20 राज्य विश्वविद्यालयों में से कोई भी विश्वविद्यालय ‘ए’ ग्रेड में नहीं है। सिर्फ 6 विश्वविद्यालय ही नैक संस्था से मूल्यांकित हैं। 159 राजकीय महाविद्यालयों में से भी कोई ‘ए’ श्रेणी में नहीं हैं, मात्र 29 नैक मूल्यांकित हैं। यह आदर्श स्थिति नहीं है।
एक विश्वविद्यालय 300 महाविद्यालय को ही संबद्धता दे
राज्यपाल ने कहा कि महाविद्यालयों की संबद्धता के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किया जाना चाहिए। अधिकतम 300 महाविद्यालयों को ही एक विश्वविद्यालय द्वारा संबद्धता दी जानी चाहिए। जबकि एक-एक विश्वविद्यालय से एक हजार से अधिक महाविद्यालय संबद्ध हैं। ऐसी स्थिति में कुलपति कैसे नियंत्रण कर सकेंगे। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में भरे हुए पदों के आधार पर ही नैक मूल्यांकन किया जाता है। संविदा पर नियुक्त शिक्षक नैक मूल्यांकन के मापदंड में नहीं आते हैं। इसलिए शत-प्रतिशत शिक्षकों के पदों को भरा जाना चाहिए।
विश्वविद्यालय और विभाग के बीच संबंध अच्छे हों
राज्यपाल ने कहा कि कुलपति की नियुक्ति राजभवन से होती है और रजिस्ट्रार, कंट्रोलर और वित्त अधिकारी की नियुक्ति उच्च शिक्षा विभाग द्वारा होती है। ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षा विभाग के मध्य सहज संबंध आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि कुलपति और शासन के अधिकारियों के बीच परस्पर समन्वय का वातावरण बने, इसलिए यह आवश्यक है कि हर माह किसी दिन दो या तीन विश्वविद्यालयों के अधिकारियों को बुलाकर उनकी समस्याओं को समझकर उचित समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि कुलपति का कार्यकाल 5 वर्ष का होना चाहिए। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए पाठ्यक्रम तीन-चार वर्षों में निरंतर अपडेट करने का प्रावधान होना चाहिए।
राज्य विश्विद्यालय रिक्रूटमेंट सेल गठित करें
राज्यपाल ने कहा कि अधिकांश राज्य विश्वविद्यालयों में नियुक्ति की कोई संस्थागत व्यवस्था नहीं होने से प्रमोशन व नियुक्तियां वर्षों अटकी रहती हैं। उन्होंने कहा कि सभी राज्य विश्वविद्यालयों द्वारा नियुक्ति व प्रोन्नति के लिए यूजीसी रेगुलेशन 2018 को स्वीकार करते हुए अपनी परिनियमावली में संशोधन कर एक रिक्रूटमेन्ट सेल का गठन किया जाना चाहिए ताकि कार्य में पारदर्शिता के साथ गति भी मिले।
उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता लाएंगे
उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि उच्च शिक्षा में उत्कृष्टता लाने के लिए सरकार दृढ़ संकल्प है। कोविड-19 के दौरान भी उच्च शिक्षा को प्रभावित नहीं होने दिया गया है। विभिन्न विषयों पर शिक्षकों द्वारा ई-कन्टेन्ट तैयार कर छात्रों को ऑनलाइन, व्हाट्सअप और यू-ट्यूब के माध्यम से उपलब्ध कराया गया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फेमवर्क (एन.आई.आर.एफ) में स्थान प्राप्त करने का प्रयास करें।