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मुजफ्फरनगर: अभी भी कायम है दहशत
अनिल श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Sat, 21 Dec 2013 09:13 AM IST
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मुजफ्फरनगर दंगे से प्रभावित नौ गांवों के करीब डेढ़ हजार परिवार अपने घरों को नहीं लौटना चाहते। इन्हें कहीं और बसने के लिए पांच-पांच लाख रुपये की मदद मुहैया कराई गई है।
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राहत कैंपों में रहने वाले दंगा प्रभावितों को हो रही कठिनाइयों और अव्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों पर सफाई देने के लिए मुख्य सचिव जावेद उस्मानी शुक्रवार शाम यहां मीडिया से रू-ब-रू हुए।
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उन्होंने माना कि मुजफ्फरनगर के फुगाना, कुटवा, कुटवी, काकड़ा, मोहम्मदपुर रायसिंह तथा मुंडभर व शामली के लिसाड़, लाक व बहावड़ी गांव के 1534 परिवार अपने घर नहीं लौटना चाहते।
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उन्होंने कहा कि इन्हें कहीं और बसने के लिए पांच-पांच लाख रुपये के हिसाब से कुल 76.70 करोड़ रुपये की मदद मुहैया कराई गई है। इन परिवारों में लगभग 8500 सदस्य हैं।
कुछ परिवारों में आपसी विवाद भी है और वयस्क सदस्य अलग से सहायता चाहते हैं। मुख्य सचिव ने दंगा प्रभावितों को 95 करोड़ रुपये से ज्यादा की मदद मुहैया कराए जाने का दावा करते हुए सफाई दी कि किसी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती गई।
उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर तथा आसपास के जिलों में 7-8 सितंबर को हुई सांप्रदायिक हिंसा में 65 लोगों की मौत हुई और 85 घायल हुए थे।
दंगे के बाद विभिन्न गांवों के लगभग 51 हजार लोगों ने मुजफ्फरनगर और शामली के 58 कैंपों में शरण ली।
ये राहत शिविर निजी तौर पर लगाए गए थे, जहां बाद में सरकार ने जरूरी व्यवस्थाएं कीं और लोगों को सहायता उपलब्ध कराई।
इन शिविरों में रह रहे ज्यादातर लोग अपने घरों को लौट गए हैं। पांच कैंपों में सिर्फ 4783 लोग रह गए हैं। इनमें एक कैंप मुजफ्फरनगर तथा चार शामली में हैं।
बच्चों की मौतों में रिपोर्ट का इंतजार
राहत कैंपों में ठंड और बीमारी से लगभग ढाई दर्जन बच्चों की मौत के सवाल पर मुख्य सचिव ने कहा कि इसकी जांच के लिए मेरठ के मंडलायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है, जो सारे तथ्यों का पता लगा रही है।
तीन-चार दिन में रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस बारे में कुछ बताया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जहां 51 हजार लोग रहेंगे, वहां कुछ न कुछ समस्या आएगी ही। जहां तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सवाल है तो शासन की ओर से लगातार तथ्यात्मक रिपोर्ट दी जा रही है।