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'शास्त्रीय संगीत सरीखा है सचिन का क्रिकेट'

Sat, 12 Oct 2013 10:34 AM IST
मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ
मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ Updated Sat, 12 Oct 2013 10:34 AM IST
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music in sachin cricket

सचिन लाजवाब हैं। उनका क्रिकेट खेल नहीं, संगीत का सा रे गा मा है। जिसमें धुन है, क्लासिकी है, सुर ताल का अद्भुत समन्वय है। समर्पण और असीम धैर्य भी।

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उनको खेलते देखने में वही सुख मिलता है, जो उम्दा शास्त्रीय संगीत सुनने में मिलता है। उनमें क्रिकेट के प्रति समर्पण व जुनून का वही भाव दिखता है, जो शास्त्रीय संगीत के किसी बड़े कलाकार में होता है।
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दरअसल, सचिन ने क्रिकेट खेला नहीं जिया है। एक खिलाड़ी ही नहीं बल्कि क्रिकेट की मुकम्मल किताब हैं। पर इन सबसे ऊपर वो इंसान भी बेहतरीन हैं।

सचिन के प्रति यह उद्गार किसी खिलाड़ी के नहीं, बल्कि शास्त्रीय संगीत के मशहूर गायक पंडित राजन मिश्र के हैं।
यूं तो राजन-साजन मिश्र की जोड़ी दुनिया में अपनी ख्याल गायिकी के लिए जानी जाती है, पर दोनों भाई क्रिकेट के भी जबरदस्त दीवाने हैं।

दीवानगी इस कदर है कि संगीत का पहले से निर्धारित कार्यक्रम न हो तो वे गेंद-बल्ले का खेल देखने लॉर्ड्स व शरजाह तक चले जाते हैं।

आए तो थे लखनऊ एक संगीत संध्या में शरीक होने, पर मंच पर प्रस्तुति से पहले सचिन का जिक्र करने पर पंडित राजन मिश्र एकदम चिहुक पड़ते हैं।

कलाकारों के साथ सुर-ताल और राग रागिनियों पर चल रही बातों का रुख अचानक बदलकर सचिन पर केंद्रित हो जाता है। वे बेतकल्लुफी से कहते हैं कि किक्रेट का दीवाना हूं। उससे अधिक सचिन का।
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सचिन मुझे इसलिए आकर्षित करते हैं क्योंकि वह डूब कर खेलते हैं। लगता है उनके रोम-रोम में किक्रेट है। उनके हर शॉट में एक शास्त्रीयता होती है।

कभी विवादों में नहीं घिरे और हमेशा खेल भावना से खेले, जीत-हार की भावना से नहीं। टेस्ट मैच से अलविदा कहने का उनका फैसला काबिलेतारीफ भी और साहसी भी।

जब हुनर उरोज पर हो तो उसे छोड़ने का फैसला बहुत कठिन होता है। ऐसा करने के लिए सचिन होना पड़ेगा, सिर्फ सचिन।

राजन मिश्र जब सचिन पर भावभीने उद्गार बयां कर रहे थे, बगल में बैठे साजन मिश्र अपने को रोक नहीं पाते। अपनी बेताबी साझा करते हुए कहते हैं कि सचिन का स्क्वायर कट तो अच्छा है ही पर लेग साइड का स्वीप बेहतरीन।


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रिस्ट और फुटवर्क का इतना अच्छा तालमेल दुनिया के किसी खिलाड़ी में देखने को नहीं मिलता। अद्भुत तो यह भी है कि ट्वेंटी-20, वन-डे और टेस्ट मैच तीनों में खेलने की शैली भी अलग-अलग।

यह वैविध्य दुर्लभ है। मुझे उनका सबसे बड़ा गुण यह लगता है कि वह खेलते समय टेम्परामेंट नहीं खोते। सचिन की कमी बेहद खलेगी। क्रिकेट में सा रे गा मा तलाशने वाली मेरी नजरें तो बरसों क्रीज पर सचिन को ढूंढेंगी। बस सचिन।

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