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रेलवे ठेकेदार को दिनदहाड़े घर में घुसकर गोली मारी
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लखनऊ। कैंट के निलमथा बाजार में रहने वाले रेलवे ठेकेदार वीरेंद्र ठाकुर (42) की शनिवार दोपहर चार में से तीन बदमाशों ने घर में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात में शामिल बदमाशों ने सेना की वर्दी पहन रखी थी। वहीं हरे रंग का कैप लगा रखा था। पुलिस के मुताबिक, बदमाश घर में लगे सीसीटीवी कैमरों के डीवीआर भी उठा ले गए। वीरेंद्र ठाकुर पर तीन साल पहले भी चारबाग स्टेशन पर हमला हुआ था। पुलिस जांच कर रही है।
एडीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी के मुताबिक, मूलरूप से बिहार के पश्चिमी चंपारण के बेतिया जिला निवासी वीरेंद्र ठाकुर कैंट एरिया के निलमथा बाजार में परिवार सहित रहते थे। परिवार में दूसरी पत्नी खुशबू, तीन बेटे अभिषेक, ऋषि और अंश (सभी पहली पत्नी प्रियंका से हैं) हैं। परिवारीजनों के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब 12.30 बजे तीन बदमाश घर के अंदर दाखिल हुए जो सेना की वर्दी पहने थे। उन्होंने घुसते ही बच्चों को एक कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद वीरेंद्र ठाकुर के कमरे में गए जहां वे बेड पर लेटे हुए थे। बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इसमें से वीरेंद्र को दो गोलियां लगीं। गंभीर हालत में परिवारीजन उनको लेकर सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
2019 में हुआ था चारबाग पर हमला
पुलिस के मुताबिक, वीरेंद्र ठाकुर का कुछ लोगों से ठेके को लेकर विवाद हुआ था जिसके बाद उन पर 2 जुलाई 2019 को रात 12 बजे चारबाग रेलवे स्टेशन परिसर में फायरिंग की गई थी। इसका मुकदमा वीरेंद्र की पहली पत्नी प्रियंका ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ जीआरपी थाने में दर्ज कराया था। इस वारदात में गोली वीरेंद्र के कमर में लगी थी। इसकी वजह से उन्हें बाद में चलने में दिक्कतें होनी लगी।
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पहली पत्नी से चल रहा है विवाद
पुलिस के मुताबिक, 2019 में हुए हमले के कुछ दिन बाद से ही पहली पत्नी प्रियंका से वीरेंद्र की दूरियां बढ़ने लगीं। इसी बीच वीरेंद्र की नजदीकी खुशबू से बढ़ गई थी। विवाद इतना अधिक हो गया कि प्रियंका व वीरेंद्र अलग-अलग रहने लगे लेकिन वीरेंद्र ने पहली पत्नी के तीनों बच्चों को अपने पास ही रख लिया था। बच्चों को लेकर कई बार कहासुनी व विवाद भी हुआ।
जनवरी से ले रखी थी निजी सुरक्षा
वीरेंद्र ठाकुर को अपने ऊपर हमले की आशंका थी। इसीलिए उसने जनवरी में ही निजी सुरक्षा एजेंसी से चार सुरक्षाकर्मी ले रखे थे जो 24 घंटे उसके साथ चलते थे। शनिवार को वीरेंद्र के घर पर तीन ही सुरक्षाकर्मी मौजूद थे जो वारदात के बाद से ही लापता बताए जा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के मुताबिक, हमलावर नकाबपोश थे। शुरूआती पड़ताल में सामने आया है कि बदमाशों ने सुरक्षाकर्मियों, बच्चों को कमरे में बंद कर दिया। लेकिन वारदात के बाद से एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं मिला है। इस बिंदु पर भी पड़ताल की जा रही है।
किलाबंद घर, सीसीटीवी कैमरे से लैस
वीरेंद्र तीन साल पहले हुए हमले के बाद से खुद की सुरक्षा को लेकर काफी संजीदा हो गया था। उसने पूरे घर को एक किले की तरह बनवा रखा था। घर के दरवाजे और दीवारों में जगह तक नहीं छोड़ी। वहीं चारदीवारी पर कंटीले कील लगवा रखे थे ताकि कोई अंदर न दाखिल हो सके। घर के अंदर से लेकर बाहर हर तरफ सीसीटीवी कैमरों का जाल है। वह लगातार अपने कमरे में बैठकर खुद ही कैमरों में आने जाने वालों पर नजर रखता था।
बिना आदेश के नहीं खुलता था दरवाजा
पुलिस के मुताबिक, पड़ताल में सामने आया है कि सुरक्षाकर्मी बिना वीरेंद्र की अनुमति के दरवाजा नहीं खोलते थे। वह सिर्फ अपने करीबी परिचितों को ही अक्सर घर के अंदर आने की अनुमति देता था। बाकी लोगों से काम पूछकर दरवाजे से ही वापस भेज देता था। यहां तक कि मोहल्ले में किसी से नहीं मिलता था। दूसरी पत्नी खुशबू ने पुलिस को बताया कि वीरेंद्र सिर्फ दीपावली में या किसी विशेष जरूरत पर ही घर से निकलता था। उसके साथ हरवक्त सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते थे।
बिहार में दर्ज हैं कई मुकदमे, पुलिस खंगाल रही वजह
एडीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी के मुताबिक, वीरेंद्र ठाकुर पर बेतिया जिले में कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने बेतिया एसएसपी से संपर्क कर उसके आपराधिक इतिहास की जानकारी मांगी है। शुरूआती बातचीत में 6-7 केस दर्ज होने की बात सामने आई है। आपराधिक इतिहास की जानकारी मिलने इसे भी विवेचना में शामिल किया जाएगा। पुलिस की एक टीम जहां बिहार से जुड़े मामलों की डिटेल खंगाल रही है तो एक टीम वीरेंद्र ठाकुर के लखनऊ से जुड़ी जानकारियां जुटा रही है। पुलिस के मुताबिक, बिहार के पुरानी रंजिश में हत्या होने की ज्यादा आशंका है। वहीं लखनऊ में रेलवे के ठेकेदार का विवाद भी हत्या का कारण हो सकता है। पहली पत्नी से विवाद की भी जांच की जा रही है।
वारदात के बाद भागे सुरक्षाकर्मी भी संदेह के घेरे में
एडीसीपी पूर्वी के मुताबिक, वारदात के बाद जब पुलिस घर पहुंची तो सुरक्षाकर्मियों के बारे में जानकारी मांगी गई। इस पर पत्नी ने बताया कि गोली चलने के बाद ही तीनों सुरक्षाकर्मी वहां से अपना सारा सामान लेकर भाग गए। उन्होंने कहा कि हमारी जान को खतरा है। हम यहां नहीं रुक सकते। पुलिस, सुरक्षाकर्मियों की भी कुंडली खंगाल रही है।
सीसीटीवी कैमरे में दिखे चार संदिग्ध
वारदात के बाद पुलिस ने आसपास इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जिसमें चार बदमाश दिखे। फुटेज में दो वर्दी पहने हैं जबकि दो सादे कपड़ों में हैं। एक ने हरे रंग की कैप लगा रखी है। पुलिस ने जब आसपास लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि चार पहिया वाहन से बदमाश आए थे। सड़क पर गाड़ी खड़ी कर वीरेंद्र के घर तक पैदल गए और वारदात के बाद वापस उसी गाड़ी से लौट गए।
13 साल से लखनऊ में बनाया था ठिकाना
वीरेंद्र ठाकुर ने पिछले 13 साल से लखनऊ में अपना ठिकाना बना रखा था। वह खुद की पहचान छिपाने के लिए आसपास के लोगों से भी नहीं मिलता था। यहां तक कि बच्चे मोहल्ले में होली या दिवाली पर ही लोगों से मिलने जाते थे। वह खुद भी घर न के बराबर ही निकलता था।
लखनऊ से कोलकाता तक फैला था वीरेंद्र का कारोबार
लखनऊ। रेलवे ठेकेदार वीरेंद्र उर्फ गोरख ठाकुर का कारोबार लखनऊ से लेकर, बिहार व कोलकाता तक फैला था। कारोबार के विवाद में ही उस पर कई बार हमले हुए। वीरेंद्र रेलवे स्टेशनों के स्टैंडों का बड़ा ठेकेदार था। वहीं बिहार में उसके खिलाफ 23 मुकदमे दर्ज हैं जिसमें से एक में उसे पुलिस ने वांटेड भी बना रखा है। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
पुलिस के मुताबिक, वीरेंद्र रेलवे स्टेशनों के स्टैंड का ठेका लेता था जिसे उसके कर्मचारी संचालित करते थे। उसके अधीन चारबाग रेलवे स्टेशन का भी स्टैंड है। पुलिस के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार, कोलकाता में उसने कई करोड़ के ठेके हासिल कर रखे थे। अनुमान के अनुसार, 50 से 70 करोड़ के ठेकों का संचालन वीरेंद्र करता था। स्टैंड के ठेके को लेकर ही 2019 में चारबाग स्टेशन परिसर में उस पर हमला हुआ था।
महिला को आगे कर बनाया था शिकार
पुलिस के मुताबिक, वीरेंद्र पर 2019 में रात 12 बजे हमला हुआ था। उसे फंसाने के लिए विरोधी ठेकेदारों ने महिला का प्रयोग किया था। एक ठेकेदार ने अपनी घर की ही महिला को आगे कर वीडियो कॉल के जरिए उसे फंसाया। फिर मिलने के लिए बुलाया था। उसने अपने जाल में फंसाने के लिए वीरेंद्र के मोबाइल पर दो-तीन युवतियों की फोटो भी भेजी थी। पुलिस के मुताबिक, पहली महिला ने उससे मिलने के लिए सीतापुर रोड पर स्थित एक होटल में बुलाया लेकिन वीरेंद्र को संदेह हुआ तो उसने मना कर दिया। उसने व्हाट्सएप पर भेजे गए फोटो वाली युवतियों से मिलने के लिए कहा तो कुछ देर बाद ही उसके पास कॉल आई। बताया गया कि युवतियां चारबाग स्टेशन के पास ही एक होटल में हैं। युवती के मोबाइल नंबर भी दिए गए। जिस पर वीरेंद्र ने कॉल किया तो दोनों युवतियों ने स्टेशन पर मिलने के लिए बुलाया। वहां वीरेंद्र के पहुंचते ही ताबड़तोड़ फायरिंग कर हमला कर दिया गया।
तीन गोलियां रीढ़ की हड्डी में लगने से हुआ दिव्यांग
पुलिस के मुताबिक, चारबाग में हुए हमले में वीरेंद्र को तीन गोलियां लगी थीं। पूर्वोत्तर रेलवे की तरफ मंदिर के पास हुई वारदात में गोलियां वीरेंद्र की रीढ़ की हड्डी में फंस गई थीं जिसके बाद उसे पैरालैसिस अटैक हो गया। वह चलने फिरने में असमर्थ हो गया। मामले में जीआरपी ने कोलकाता से एकयुवक और दो युवतियों को गिरफ्तार किया था जबकि दो अन्य फरार हो गए। जीआरपी के मुताबिक, वीरेंद्र ठाकुर पर हमला करने वाला एक इंजीनियरिंग का छात्र था। पुलिस ने तीनों को जेल भेज दिया था।
1.05 घंटे तक हमलावर रहे इलाके में
पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज मिला है जिसमें चार हमलावर एक चार पहिया वाहन से निलमथा बाजार पहुंचे। उनके आने का समय करीब 12.32 बजे था। हमलावर करीब 1.47 बजे वापस गए। करीब 1.05 बजे वारदात को अंजाम देने के लिए पूरे इलाके में बदमाशों ने समय बिताया था। पुलिस के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चारों संदिग्ध हमलावरों की तलाश की जा रही है। वहीं बाजार में कई दुकानदार यह समझ रहे थे कि पुलिस टीम आई है। किसी की तलाश करने के लिए। वापस जाते समय भी किसी को इस बात का अहसास नहीं हो सका कि यह पुलिसकर्मी नहीं, बदमाश हैं।
हमलावरों के आने व जाने का समय
- 12.32 बजे एक ज्वैलरी शॉप के सामने से कार निकली।
- 12.34 बजे एक संदिग्ध निकला, जिसने सफेद पैंट-टीशर्ट व हरे रंग की टोपी पहनी थी।
- 12.35 बजे तीन लोग गाड़ी से निकले। इनमें से दो वर्दी पहने थे। वर्दी बिहार पुलिस की थी। सभी वीरेंद्र ठाकुर के घर वाली गली में घुस गए।
- 12.50 बजे वीरेंद्र के घर में सभी हमलावर घुसे, परिवारीजनों को बंधक बनाया। करीब आधे घंटे तक हमलावर घर के अंदर रहे।
- 1.20 बजे चारों वापस कार के पास पहुंचे। कार वापस छावनी इलाके की तरफ निकल गई।
- 1.47 बजे कार वापस आई। बिना रुके तेजी से आगे निकल गई।
वर्जन-
बिहार के पश्चिमी चंपारण के बेतिया के रहने वाले वीरेंद्र ठाकुर की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। उसके सिर में दो गोली लगी हैं। हमलावर घर के अंदर दाखिल हुए। इसके बाद बच्चों को कमरे में बंद कर वीरेंद्र की हत्या कर दी। पुलिस हर बिंदु पर जांच कर रही है। जल्द ही खुलासा किया जाएगा।
- डीके ठाकुर, पुलिस कमिश्नर लखनऊ
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एडीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी के मुताबिक, मूलरूप से बिहार के पश्चिमी चंपारण के बेतिया जिला निवासी वीरेंद्र ठाकुर कैंट एरिया के निलमथा बाजार में परिवार सहित रहते थे। परिवार में दूसरी पत्नी खुशबू, तीन बेटे अभिषेक, ऋषि और अंश (सभी पहली पत्नी प्रियंका से हैं) हैं। परिवारीजनों के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब 12.30 बजे तीन बदमाश घर के अंदर दाखिल हुए जो सेना की वर्दी पहने थे। उन्होंने घुसते ही बच्चों को एक कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद वीरेंद्र ठाकुर के कमरे में गए जहां वे बेड पर लेटे हुए थे। बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इसमें से वीरेंद्र को दो गोलियां लगीं। गंभीर हालत में परिवारीजन उनको लेकर सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
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2019 में हुआ था चारबाग पर हमला
पुलिस के मुताबिक, वीरेंद्र ठाकुर का कुछ लोगों से ठेके को लेकर विवाद हुआ था जिसके बाद उन पर 2 जुलाई 2019 को रात 12 बजे चारबाग रेलवे स्टेशन परिसर में फायरिंग की गई थी। इसका मुकदमा वीरेंद्र की पहली पत्नी प्रियंका ने अज्ञात हमलावरों के खिलाफ जीआरपी थाने में दर्ज कराया था। इस वारदात में गोली वीरेंद्र के कमर में लगी थी। इसकी वजह से उन्हें बाद में चलने में दिक्कतें होनी लगी।
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पहली पत्नी से चल रहा है विवाद
पुलिस के मुताबिक, 2019 में हुए हमले के कुछ दिन बाद से ही पहली पत्नी प्रियंका से वीरेंद्र की दूरियां बढ़ने लगीं। इसी बीच वीरेंद्र की नजदीकी खुशबू से बढ़ गई थी। विवाद इतना अधिक हो गया कि प्रियंका व वीरेंद्र अलग-अलग रहने लगे लेकिन वीरेंद्र ने पहली पत्नी के तीनों बच्चों को अपने पास ही रख लिया था। बच्चों को लेकर कई बार कहासुनी व विवाद भी हुआ।
जनवरी से ले रखी थी निजी सुरक्षा
वीरेंद्र ठाकुर को अपने ऊपर हमले की आशंका थी। इसीलिए उसने जनवरी में ही निजी सुरक्षा एजेंसी से चार सुरक्षाकर्मी ले रखे थे जो 24 घंटे उसके साथ चलते थे। शनिवार को वीरेंद्र के घर पर तीन ही सुरक्षाकर्मी मौजूद थे जो वारदात के बाद से ही लापता बताए जा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर के मुताबिक, हमलावर नकाबपोश थे। शुरूआती पड़ताल में सामने आया है कि बदमाशों ने सुरक्षाकर्मियों, बच्चों को कमरे में बंद कर दिया। लेकिन वारदात के बाद से एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं मिला है। इस बिंदु पर भी पड़ताल की जा रही है।
किलाबंद घर, सीसीटीवी कैमरे से लैस
वीरेंद्र तीन साल पहले हुए हमले के बाद से खुद की सुरक्षा को लेकर काफी संजीदा हो गया था। उसने पूरे घर को एक किले की तरह बनवा रखा था। घर के दरवाजे और दीवारों में जगह तक नहीं छोड़ी। वहीं चारदीवारी पर कंटीले कील लगवा रखे थे ताकि कोई अंदर न दाखिल हो सके। घर के अंदर से लेकर बाहर हर तरफ सीसीटीवी कैमरों का जाल है। वह लगातार अपने कमरे में बैठकर खुद ही कैमरों में आने जाने वालों पर नजर रखता था।
बिना आदेश के नहीं खुलता था दरवाजा
पुलिस के मुताबिक, पड़ताल में सामने आया है कि सुरक्षाकर्मी बिना वीरेंद्र की अनुमति के दरवाजा नहीं खोलते थे। वह सिर्फ अपने करीबी परिचितों को ही अक्सर घर के अंदर आने की अनुमति देता था। बाकी लोगों से काम पूछकर दरवाजे से ही वापस भेज देता था। यहां तक कि मोहल्ले में किसी से नहीं मिलता था। दूसरी पत्नी खुशबू ने पुलिस को बताया कि वीरेंद्र सिर्फ दीपावली में या किसी विशेष जरूरत पर ही घर से निकलता था। उसके साथ हरवक्त सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते थे।
बिहार में दर्ज हैं कई मुकदमे, पुलिस खंगाल रही वजह
एडीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी के मुताबिक, वीरेंद्र ठाकुर पर बेतिया जिले में कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस ने बेतिया एसएसपी से संपर्क कर उसके आपराधिक इतिहास की जानकारी मांगी है। शुरूआती बातचीत में 6-7 केस दर्ज होने की बात सामने आई है। आपराधिक इतिहास की जानकारी मिलने इसे भी विवेचना में शामिल किया जाएगा। पुलिस की एक टीम जहां बिहार से जुड़े मामलों की डिटेल खंगाल रही है तो एक टीम वीरेंद्र ठाकुर के लखनऊ से जुड़ी जानकारियां जुटा रही है। पुलिस के मुताबिक, बिहार के पुरानी रंजिश में हत्या होने की ज्यादा आशंका है। वहीं लखनऊ में रेलवे के ठेकेदार का विवाद भी हत्या का कारण हो सकता है। पहली पत्नी से विवाद की भी जांच की जा रही है।
वारदात के बाद भागे सुरक्षाकर्मी भी संदेह के घेरे में
एडीसीपी पूर्वी के मुताबिक, वारदात के बाद जब पुलिस घर पहुंची तो सुरक्षाकर्मियों के बारे में जानकारी मांगी गई। इस पर पत्नी ने बताया कि गोली चलने के बाद ही तीनों सुरक्षाकर्मी वहां से अपना सारा सामान लेकर भाग गए। उन्होंने कहा कि हमारी जान को खतरा है। हम यहां नहीं रुक सकते। पुलिस, सुरक्षाकर्मियों की भी कुंडली खंगाल रही है।
सीसीटीवी कैमरे में दिखे चार संदिग्ध
वारदात के बाद पुलिस ने आसपास इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जिसमें चार बदमाश दिखे। फुटेज में दो वर्दी पहने हैं जबकि दो सादे कपड़ों में हैं। एक ने हरे रंग की कैप लगा रखी है। पुलिस ने जब आसपास लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि चार पहिया वाहन से बदमाश आए थे। सड़क पर गाड़ी खड़ी कर वीरेंद्र के घर तक पैदल गए और वारदात के बाद वापस उसी गाड़ी से लौट गए।
13 साल से लखनऊ में बनाया था ठिकाना
वीरेंद्र ठाकुर ने पिछले 13 साल से लखनऊ में अपना ठिकाना बना रखा था। वह खुद की पहचान छिपाने के लिए आसपास के लोगों से भी नहीं मिलता था। यहां तक कि बच्चे मोहल्ले में होली या दिवाली पर ही लोगों से मिलने जाते थे। वह खुद भी घर न के बराबर ही निकलता था।
लखनऊ से कोलकाता तक फैला था वीरेंद्र का कारोबार
लखनऊ। रेलवे ठेकेदार वीरेंद्र उर्फ गोरख ठाकुर का कारोबार लखनऊ से लेकर, बिहार व कोलकाता तक फैला था। कारोबार के विवाद में ही उस पर कई बार हमले हुए। वीरेंद्र रेलवे स्टेशनों के स्टैंडों का बड़ा ठेकेदार था। वहीं बिहार में उसके खिलाफ 23 मुकदमे दर्ज हैं जिसमें से एक में उसे पुलिस ने वांटेड भी बना रखा है। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
पुलिस के मुताबिक, वीरेंद्र रेलवे स्टेशनों के स्टैंड का ठेका लेता था जिसे उसके कर्मचारी संचालित करते थे। उसके अधीन चारबाग रेलवे स्टेशन का भी स्टैंड है। पुलिस के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार, कोलकाता में उसने कई करोड़ के ठेके हासिल कर रखे थे। अनुमान के अनुसार, 50 से 70 करोड़ के ठेकों का संचालन वीरेंद्र करता था। स्टैंड के ठेके को लेकर ही 2019 में चारबाग स्टेशन परिसर में उस पर हमला हुआ था।
महिला को आगे कर बनाया था शिकार
पुलिस के मुताबिक, वीरेंद्र पर 2019 में रात 12 बजे हमला हुआ था। उसे फंसाने के लिए विरोधी ठेकेदारों ने महिला का प्रयोग किया था। एक ठेकेदार ने अपनी घर की ही महिला को आगे कर वीडियो कॉल के जरिए उसे फंसाया। फिर मिलने के लिए बुलाया था। उसने अपने जाल में फंसाने के लिए वीरेंद्र के मोबाइल पर दो-तीन युवतियों की फोटो भी भेजी थी। पुलिस के मुताबिक, पहली महिला ने उससे मिलने के लिए सीतापुर रोड पर स्थित एक होटल में बुलाया लेकिन वीरेंद्र को संदेह हुआ तो उसने मना कर दिया। उसने व्हाट्सएप पर भेजे गए फोटो वाली युवतियों से मिलने के लिए कहा तो कुछ देर बाद ही उसके पास कॉल आई। बताया गया कि युवतियां चारबाग स्टेशन के पास ही एक होटल में हैं। युवती के मोबाइल नंबर भी दिए गए। जिस पर वीरेंद्र ने कॉल किया तो दोनों युवतियों ने स्टेशन पर मिलने के लिए बुलाया। वहां वीरेंद्र के पहुंचते ही ताबड़तोड़ फायरिंग कर हमला कर दिया गया।
तीन गोलियां रीढ़ की हड्डी में लगने से हुआ दिव्यांग
पुलिस के मुताबिक, चारबाग में हुए हमले में वीरेंद्र को तीन गोलियां लगी थीं। पूर्वोत्तर रेलवे की तरफ मंदिर के पास हुई वारदात में गोलियां वीरेंद्र की रीढ़ की हड्डी में फंस गई थीं जिसके बाद उसे पैरालैसिस अटैक हो गया। वह चलने फिरने में असमर्थ हो गया। मामले में जीआरपी ने कोलकाता से एकयुवक और दो युवतियों को गिरफ्तार किया था जबकि दो अन्य फरार हो गए। जीआरपी के मुताबिक, वीरेंद्र ठाकुर पर हमला करने वाला एक इंजीनियरिंग का छात्र था। पुलिस ने तीनों को जेल भेज दिया था।
1.05 घंटे तक हमलावर रहे इलाके में
पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज मिला है जिसमें चार हमलावर एक चार पहिया वाहन से निलमथा बाजार पहुंचे। उनके आने का समय करीब 12.32 बजे था। हमलावर करीब 1.47 बजे वापस गए। करीब 1.05 बजे वारदात को अंजाम देने के लिए पूरे इलाके में बदमाशों ने समय बिताया था। पुलिस के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चारों संदिग्ध हमलावरों की तलाश की जा रही है। वहीं बाजार में कई दुकानदार यह समझ रहे थे कि पुलिस टीम आई है। किसी की तलाश करने के लिए। वापस जाते समय भी किसी को इस बात का अहसास नहीं हो सका कि यह पुलिसकर्मी नहीं, बदमाश हैं।
हमलावरों के आने व जाने का समय
- 12.32 बजे एक ज्वैलरी शॉप के सामने से कार निकली।
- 12.34 बजे एक संदिग्ध निकला, जिसने सफेद पैंट-टीशर्ट व हरे रंग की टोपी पहनी थी।
- 12.35 बजे तीन लोग गाड़ी से निकले। इनमें से दो वर्दी पहने थे। वर्दी बिहार पुलिस की थी। सभी वीरेंद्र ठाकुर के घर वाली गली में घुस गए।
- 12.50 बजे वीरेंद्र के घर में सभी हमलावर घुसे, परिवारीजनों को बंधक बनाया। करीब आधे घंटे तक हमलावर घर के अंदर रहे।
- 1.20 बजे चारों वापस कार के पास पहुंचे। कार वापस छावनी इलाके की तरफ निकल गई।
- 1.47 बजे कार वापस आई। बिना रुके तेजी से आगे निकल गई।
वर्जन-
बिहार के पश्चिमी चंपारण के बेतिया के रहने वाले वीरेंद्र ठाकुर की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। उसके सिर में दो गोली लगी हैं। हमलावर घर के अंदर दाखिल हुए। इसके बाद बच्चों को कमरे में बंद कर वीरेंद्र की हत्या कर दी। पुलिस हर बिंदु पर जांच कर रही है। जल्द ही खुलासा किया जाएगा।
- डीके ठाकुर, पुलिस कमिश्नर लखनऊ