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महंत की हत्या: करोड़ों रुपये की जमीन के लालच में पहले गुरू और अब चेले को उतारा मौत के घाट

Wed, 02 Jan 2019 08:15 PM IST
ishwar ashish धर्मेश त्रिवेदी/अमर उजाला, रायबरेली
धर्मेश त्रिवेदी/अमर उजाला, रायबरेली Published by: ishwar ashish Updated Wed, 02 Jan 2019 08:15 PM IST
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murder of mahant in raebareli.
रस्सी से लटकता मिला महंत का शव। - फोटो : amar ujala

करोड़ों रुपये कीमत की जमीन के लालच में आरोपियों ने आस्था को दागदार कर दिया। पहले गुरु और अब चेले को इंसाफ मांगने की कीमत चुकानी पड़ी। न्याय पाने के लिए मृतक महंत स्वामी बाबा प्रेमदास कभी डीएम तो कभी एसपी दफ्तर से लेकर तहसील के अफसरों तक की दौड़ लगाते रहे।'

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हर बार आश्वासन की घुट्टी पिलाई गई, लेकिन कब्जा दिलाने के नाम पर किसी ने जहमत नहीं उठाई। आरोपी बराबर धमकी देते रहे। थाने पर एफआईआर लिखी जाती रहीं। कागज पर ही इंसाफ दिलाने की कोशिशें की गईं। और आखिरकार इंसाफ की लड़ाई में महंत हार गए।
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रायबरेली-प्रयागराज राजमार्ग पर जगतपुर से कुछ दूरी पर बाबा का पुरवा मजरे इटौरा बुजुर्ग गांव पड़ता है। यहीं पर रामजानकी मंदिर है। साथ ही हाईवे पर ही पंचशील महाविद्यालय भी है। मंदिर के नाम पर करीब 65 बीघा जमीन दर्ज है। इसमें से करीब दस बीघा से ज्यादा की जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। मंदिर के महंत स्वामी सत्यनारायण दास ने इसका विरोध शुरू किया। नतीजा रहा कि पांच साल पहले सत्यनारायण दास की हत्या कर दी गई।
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सत्यनारायण के मर्डर के बाद इंसाफ पाने की मुहिम मृतक महंत स्वामी प्रेमदास ने शुरू की। कोर्ट के चक्कर काटे। पुलिस-प्रशासन के दफ्तरों की चौखट घिसी। कई साल तक प्रेमदास जमीन पर कब्जा पाने के लिए लड़ता रहा। मंगलवार रात प्रेमदास को भी रास्ते से हटा दिया। करोड़ों रुपये कीमत की इस जमीन के लालच में आस्था का प्रतीक कहे जाने वाले मंदिर को भी खून से रंग दिया।

इसको लेकर लोगों में आक्रोश है और सभी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। मौके पर पहुंचे कमिश्नर अनिल गर्ग और आईजी सुजीत पांडेय ने कहा कि घटना के हर बिंदु की पड़ताल कराई जा रही है। घटना में किसकी लापरवाही है, जांच के बाद पता चलेगा। जांच में जो भी दोषी होगा, उसे किसी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

जमीन ट्रस्ट के नाम हो गई थी, पर नहीं मिला कब्जा

murder of mahant in raebareli.

कहा जा रहा है कि बाबा प्रेमदास की कानूनी लड़ाई रंग लाने लगी थी। कई साल की लड़ाई के बाद कब्जे वाली जमीन मंदिर के नाम दर्ज करा दी गई थी। बस जमीन पर कब्जा दिलाना बाकी थी।

जमीन पर कब्जा दिलाने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की थी, लेकिन आरोपियों की पहुंच ऊपर तक होने की वजह से तहसील प्रशासन मौन साधे था। सीओ डलमऊ विनीत सिंह का कहना है कि जमीन ट्रस्ट के नाम हो गई थी। बस कब्जा दिलाने की प्रक्रिया चल रही थी।

मृतक महंत और आरोपियों के बीच चल रहा था गहरा विवाद

murder of mahant in raebareli.

मृतक महंत स्वामी प्रेमदास और आरोपियों के बीच जमीन को लेकर गहरा विवाद चल रहा था। बीच-बीच में प्रेमदास को जान से मारने की धमकी मिलती थी। करीब तीन माह पहले मृतक को जान से मारने की धमकी मिली थी, जिसकी एफआईआर सदर कोतवाली में दर्ज कराई गई थी।

यही नहीं आरोपी पक्ष की तरफ से भी मृतक के खिलाफ ऊंचाहार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। अंतत: आस्था के मंदिर को बचाने की लड़ाई में बाबा प्रेमदास को मौत के घाट उतार दिया गया।

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