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Lucknow News: मियावाकी विधि से एक और वन लगाएगा नगर निगम
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लखनऊ। हरियाली बढ़ाने और स्वच्छ हवा को लेकर नगर निगम मियावाकी विधि से एक और वन विकसित करेगा। इसके लिए कुर्सी रोड स्थित रसूलपुर कायस्थ गांव में चार हेक्टेयर जमीन चिह्नित कर ली गई है। जहां 1.79 लाख पौधे लगाए जाएंगे। इसकी शुरुआत पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर होगी।
नगर निगम के उद्यान अधीक्षक गंगाराम गौतम ने बताया कि नगर निगम मियावाकी विधि से चार वन विकसित कर चुका है। इनमें अलीगंज सेक्टर डी पार्क, सेक्टर ओ पार्क और सेक्टर एफ पार्क व अमौसी में कान्हा उपवन शामिल है। यह वन छोटे हैं। ऐसे में अब रसूलपुर कायस्थ गांव में शुक्ला चौराहा के पास चार हेक्टेयर में बड़ा वन विकसित किया जाएगा। इसमें अमरूद, हरसिंगार, आम, कटहल, अमलतास, जामुन, अर्जुन, कदम्ब, पलाश, शीशम, टीक, चम्पा, चांदनी, एरिका पाम, आंवला, कंजी, गुलाब, शहतूत, लौंग, बांस व अनार आदि के पौधे लगाए जाएंगे। वन तीन महीने में विकसित करने की योजना है। क्षेत्र में पौधरोपण की जरूरत को देखते ही कुर्सी रोड स्थित रसूलपुर कायस्थ गांव का चयन किया गया है।
उद्यान अधीक्षक गंगाराम गौतम का कहना है कि मियावाकी विधि जापान की है। सामान्यत: एक वन 100 साल में विकसित हो पाता है जबकि मियावाकी विधि में पौधे लगाने पर यह 10 साल में ही विकसित हो जाता है। मियावाकी विधि से लगाए जाने वाले पौधे 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और कम समय मेंं ही 30 गुना घने हो जाते हैं।
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नगर निगम के उद्यान अधीक्षक गंगाराम गौतम ने बताया कि नगर निगम मियावाकी विधि से चार वन विकसित कर चुका है। इनमें अलीगंज सेक्टर डी पार्क, सेक्टर ओ पार्क और सेक्टर एफ पार्क व अमौसी में कान्हा उपवन शामिल है। यह वन छोटे हैं। ऐसे में अब रसूलपुर कायस्थ गांव में शुक्ला चौराहा के पास चार हेक्टेयर में बड़ा वन विकसित किया जाएगा। इसमें अमरूद, हरसिंगार, आम, कटहल, अमलतास, जामुन, अर्जुन, कदम्ब, पलाश, शीशम, टीक, चम्पा, चांदनी, एरिका पाम, आंवला, कंजी, गुलाब, शहतूत, लौंग, बांस व अनार आदि के पौधे लगाए जाएंगे। वन तीन महीने में विकसित करने की योजना है। क्षेत्र में पौधरोपण की जरूरत को देखते ही कुर्सी रोड स्थित रसूलपुर कायस्थ गांव का चयन किया गया है।
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उद्यान अधीक्षक गंगाराम गौतम का कहना है कि मियावाकी विधि जापान की है। सामान्यत: एक वन 100 साल में विकसित हो पाता है जबकि मियावाकी विधि में पौधे लगाने पर यह 10 साल में ही विकसित हो जाता है। मियावाकी विधि से लगाए जाने वाले पौधे 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और कम समय मेंं ही 30 गुना घने हो जाते हैं।
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