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शहर में करना है प्रचार तो अब देना होगा लाइसेंस शुल्क, नगर निगम ने लागू की नई नीति

Wed, 03 Feb 2021 02:08 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 03 Feb 2021 02:08 AM IST
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Municipal corporation launched new policy
Municipal corporation launched new policy
प्रवेंद्र गुप्ता
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लखनऊ। नगर निगम की सीमा में किसी भी तरह के विज्ञापन के लिए अब लाइसेंस लेना अनिवार्य हो गया है। विज्ञापन करने वालों को शुल्क भी देना होगा। नगर निगम की ओर से बनाई उपविधि विज्ञापन पर अनुज्ञा शुल्क का निर्धारण और वसूली 2018 का सरकार ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जो एक फरवरी से प्रभावी हो गया। अब बिना नगर निगम की अनुमति के शहर में प्रचार नहीं किया जा सकेगा। मेट्रो और रेलवे को भी विज्ञापन के लिए शुल्क देकर लाइसेंस लेना होगा।
जीएसटी लागू होने के बाद शहर में विज्ञापन का कारोबार करने वालों के साथ दस हजार से अधिक वे भवनस्वामी भी निगम के टैक्स से बच गए थे, जिनकी भूमि या भवन पर होर्डिंग लगी हैं। जीएसटी से पहले निगम विज्ञापन कर वसूलता था, जिससे सालाना करीब नौ करोड़ की आय होती थी। जीएसटी के बाद यह अधिकार खत्म हो गया था। ऐसे में नगर निगम ने उपविधि बनाकर लाइसेंस शुल्क की नई नीति बनाई है। उधर, मेट्रो के पिलर और रेलवे की बाउंड्रीवाल से बाहर सड़क की ओर लगाए विज्ञापन पर नगर निगम को शुल्क नहीं मिल रहा था। निजी भवन वाले भी अनुमति लिए बिना होर्डिंग लगा ले रहे थे, जो अब नहीं हो पाएगा।
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विवादों पर लगेगी लगाम, बढ़ेगी आय
नगर निगम के पास प्रचार शुल्क को लेकर कोई अधिकृत नियमावली नहीं थी। इससे विज्ञापन शुल्क वसूली को लेकर कानूूनी विवाद हो रहे थे। नई उपविधि के गजट नोटिफिकेशन के बाद अब यह समस्या नहीं रहेगी। क्षेत्र के हिसाब से विज्ञापन की दरें और लाइसेंस फीस तय कर दी गई है। नोटिफिकेशन से पहले उपविधि पर आपत्तियां व सुझाव भी लिए गए थे। इसके निस्तारण के बाद शासन ने गजट नोटिफिकेशन किया है। वहीं, शहर में कहां होर्डिंग लग सकती है, किसे आवंटन होगी, यह समिति तय करेंगी। इसे लेकर आवंटन और स्थल चयन समिति भी बनाई जाएगी।
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करोड़ों का ठेका, शुल्क कोई नहीं
एयरपोर्ट से मुंशीपुलिया तक मेट्रो के पिलर और ओवरहेड ट्रैक पर खूब विज्ञापन किया जा रहा है। बड़े-बड़े विज्ञापन पट लगे हैं। करोड़ों का ठेका है, पर नगर निगम को एक पैसा विज्ञापन शुल्क के रूप में मेट्रो से नहीं मिलता है। अब नई उपविधि में मेट्रो के पिलर भी इस दायरे में आ गए हैं।

नगर निगम की स्वामित्व वाली जमीन पर होर्डिंग शुल्क
ए श्रेणी क्षेत्र- 2400 रुपये
बी श्रेणी-2000 रुपये
सी श्रेणी-1600 रुपये
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यूनीपोल
ए श्रेणी-4000 रुपये
बी श्रेणी-3000 रुपये
सी श्रेणी-2000 रुपये
बस शेल्टर, पुलिस बूथ, ट्रैफिक बूथ
ए श्रेणी-5000 रुपये
बी श्रेणी-4000 रुपये
सी श्रेणी- 3000 रुपये
सालाना शुल्क प्रतिवर्ग मीटर की दर से
निजी भूमि-भवन पर विज्ञापन का वार्षिक शुल्क
200 से 300 वर्गफीट तक - 20,400 रुपये
301 से 600 वर्गफीट तक - 40,800 रुपये
601 से 1200 वर्गफीट तक - 81,600 रुपये
1200 से अधिक व 1800 वर्गफीट तक - 1,02,000 रुपये
नई नीति से जल्द होंगे टेंडर
अपर नगर आयुक्त अर्चना द्विवेदी उपविधि का गजट नोटिफिकेशन एक फरवरी से प्रभावी हो गया है। नई दरों के तहत सभी तरह के विज्ञापन पटों और प्रचार के लिए जल्द टेंडर जारी करने की तैयारी भी शुरू कर दी है। नई उपविधि से निगम की आय में वृद्धि के साथ अवैध प्रचार पर सख्ती से कार्रवाई भी होगी।
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