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UP News : आय बढ़ाने के लिए नगर निकाय नहीं गंभीर, गृहकर वसूली में लापरवाही से करोड़ों का नुकसान

Wed, 22 Jun 2022 04:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 22 Jun 2022 04:35 AM IST
सार

नव गठित निकायों को छोड़ दें तो पुराने 651 निकायों में से सिर्फ 57  निकायों में ही एमएसएमई से गृहकर की वसूली हुई है। इससे नगर निकायों को करोड़ों रुपये का सालाना नुकसान हो रहा है।

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Municipal body in up itself is not serious to increase income, loss of crores due to negligence in collection of house tax
demo pic... - फोटो : istock

विस्तार

नगर निकायों की आय बढ़ाने को लेकर शासन स्तर से भले ही प्रयास हो रहे हों, लेकिन निकाय खुद अपनी आय बढ़ाने के लिए गंभीर नहीं हैं। बीते पांच साल में सूक्ष्म, लघु और मध्यम औद्योगिक  इकाइयों (एमएसएमई) से गृहकर वसूली की स्थिति को देखकर तो यही कहा जा सकता है। नव गठित निकायों को छोड़ दें तो पुराने 651 निकायों में से सिर्फ 57  निकायों में ही एमएसएमई से गृहकर की वसूली हुई है। इससे नगर निकायों को करोड़ों रुपये का सालाना नुकसान हो रहा है।

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वर्तमान में प्रदेश में नगर निकायों की कुल संख्या 734 हैं। इसमें 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद और 517 नगर पंचायतें शामिल हैं। इनमें 83 नव गठित निकाय भी शामिल हैं। स्थानीय निकाय निदेशालय ने नव गठित निकायों को छोड़कर सभी पुराने 651 नगर निकायों से पांच वर्ष में एमएसएमई से गृहकर वसूली की रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन 517 नगर निकायों ने ही रिपोर्ट निदेशालय को उपलब्ध कराया है। रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ 57 नगर निकायों ने ही गृहकर वसूला है। 
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वसूली में नगर निगमों की स्थिति सबसे खराब
वसूली में सबसे खराब स्थिति नगर निगमों की है। सिर्फ 8 नगर निगमों ने ही एमएसएमई से गृहकर वसूला है। कानपुर नगर निगम ने एक भी एमएसएमई से गृहकर नहीं वसूला है। यही स्थिति वाराणसी नगर निगम की भी है। गोरखपुर, बरेली, मेरठ व आगरा नगर निगमों ने भी पांच साल के दौरान गृहकर नहीं वसूला है। अयोध्या और मथुरा-वृंदावन निगमों ने रिपोर्ट नहीं भेजी है। स्थानीय निकाय निदेशालय ने अब फिर बचे 134 नगर निकायों से एमएसएमई से गृहकर वसूली की रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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पुराने नगर निकाय में गृहकर का निर्धारण तक नहीं
गृहकर वसूली को लेकर नगर निकायों की उदासीनता का आलम यह है कि कई पुराने निकायों में अब तक गृहकर का निर्धारण तक नहीं हुआ है। उदाहरण के तौर पर वाराणसी की रामनगर नगर पालिका परिषद को देखा जा सकता है। इस निकाय क्षेत्र में ही इंडस्ट्रियल एरिया है, जहां हजारों की संख्या में औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं। इसके बावजूद रामनगर पालिका परिषद ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि अब तक एमएसएमई इकाइयों पर गृहकर का निर्धारण ही नहीं किया गया है।

इन नगर निगमों ने पांच वर्ष में एमएसएई से वसूला इतना गृहकर
नगर निकाय    सूक्ष्म                                 लघु                                मध्यम
गाजियाबाद    1590.80                           2546.65                      6972.75
मुरादाबाद      2825.75                           1640.45                     1185.35
लखनऊ        210.04                              350.24                       15.08
अलीगढ़         56.08                                11.83                           00
शाहजहांपुर    25.05                               12.67                            00
फिरोजाबाद    14.23                               44.52                          14.43
प्रयागराज       44.86                              10.37                             00
सहारनपुर      29.17                              23.58                           60.84
नोट : वसूली की रकम लाख रुपये में।

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