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मंच पर क्या कर रहे तौकीर, सोम और राणा?
अखिलेश वाजपेई/लखनऊ
Updated Fri, 22 Nov 2013 11:35 AM IST
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यूपी के सियासी अखाड़े में भाजपा व सपा आमने-सामने हैं।
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सपा अपनी मुस्लिम हितैषी छवि को धार देने में जुटी है तो भाजपा हिंदू हितैषी छवि से कोई समझौता करने को तैयार नहीं है।
शायद यही वजह रही कि यूपी के सियासी अखाड़े की दो धुर विरोधी पार्टियां बरेली और आगरा में एक राह चलती नजर आईं।
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बरेली में मुलायम की पार्टी के मंच पर मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी तौकीर रजा विराजमान थे तो इसी मामले में आरोपी भाजपा विधायक संगीत सोम व सुरेश राणा को भाजपा ने आगरा में सम्मानित किया।
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फर्क सिर्फ यह रहा
दोनों रैलियों में सिर्फ एक फर्क रहा। भाजपा ने आगरा में पहले इन दोनों विधायकों को मंच पर सम्मानित किया, पर मोदी और राजनाथ के आने से पहले ही मंच से हटा भी दिया गया।
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वहीं बरेली में तौकीर रजा पूरे समय मंच पर जमे रहे। आगरा में जिस तरह दोनों विधायकों को मोदी के आने से पहले मंच से हटाया गया, उससे पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर खींचतान के संकेत ही मिलते हैं।
कहीं इसलिए तो लेट नहीं हुए मोदी व राजनाथ
भाजपा के सूत्रों का कहना है कि मोदी व राजनाथ रैली के मंच पर दोनों विधायकों को सम्मानित करने से सहमत नहीं थे।
इन नेताओं को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने इस तरह का कार्यक्रम न करने की नसीहत भी दी। पर, इस तर्क पर कि इससे मामला उल्टा गले पड़ सकता है।
जाट व गुर्जर नाराज हो सकते हैं, यह रास्ता निकाला गया कि मोदी व राजनाथ के आने से पहले दोनों विधायकों का सम्मान करके उन्हें मंच से हटा लिया जाए।
इसके बावजूद भाजपा कठघरे में खड़ा होने से बच नहीं पाई। यह सवाल उठने लगा है कि सपा पर तुष्टीकरण का आरोप लगाने वाली भाजपा भी उसी नीति पर है। भले ही समुदाय अलग-अलग हों।
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