मुस्लिमों के लिए मुलायम ने रचा इतिहास!
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समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार का चेहरा बदलने की कवायद शुरू कर दी है। अखिलेश यादव मंत्रिपरिषद के शुक्रवार को हुए पुनर्गठन एवं विस्तार में मुसलमानों पर डोरे डाले गए। मुस्लिम चेहरे के रूप में तीन कैबिनेट और एक राज्यमंत्री को शपथ दिलाकर मुजफ्फरनगर दंगों से आहत मुस्लिम मन को सहलाने की कोशिश हुई। प्रदेश में पहली बार किसी सरकार में मुस्लिम वर्ग से पांच कैबिनेट और पांच राज्यमंत्री बनाए गए।
जानिए, क्या है पीछे की सियासी गणित
सपा की नजर इन दिनों लोकसभा चुनाव और मुस्लिम वोटों पर खास तौर पर टिकी है। वेस्ट यूपी में मुसलमानों की तादाद अपेक्षाकृत ज्यादा है। वहां करीब 15 जिलों में मुस्लिम आबादी 25 से 50 प्रतिशत के बीच है। वेस्ट यूपी में मुस्लिम वोट ही सपा को सबसे बड़ा सहारा देता रहा है। मुजफ्फरनगर-शामली में सांप्रदायिक दंगों के बाद सपा का गणित थोड़ा गड़बड़ाया तो इसे साधने की कोशिशें की गईं। पश्चिमी यूपी के कई जिलों में मुस्लिम नेताओं को राज्यमंत्री का दर्जा लेकर लालबत्ती से नवाजा। सपा मुखिया ने बड़ी तादाद में धार्मिक नेताओं, मदरसा संचालकों और मुस्लिमों के डेलीगेशन से मुलाकात कर उनकी कई मांगें पूरी कीं। दंगे में मारे गए लोगों के आश्रितों को दस-दस लाख रुपये मुआवजा दिया। उनके परिवार के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी। दंगा पीड़ितों मुस्लिम के पुनर्वास के लिए प्रति परिवार पांच-पांच लाख (कुल 90 करोड़) रुपये दिए।
पढ़िए, इन चेहरों को दंगा कनेक्शन
अब सरकार में नुमाइंदगी बढ़ाकर मुस्लिमों में राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की र्गई है। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव में सपा फिर मुस्लिमों पर दांव खेलने जा रही है। इसी के चलते अखिलेश यादव मंत्रिमंडल में जिन तीन राज्यमंत्रियों को प्रोन्नति देकर कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, वे मुस्लिम चेहरे के रूप में खासी पहचान रखते हैं। मुजफ्फरनगर दंगे के समय भी उन्हें वहां शांति और भाईचारा कायम करने के लिए भेजा गया था। यासर शाह को राज्यमंत्री बनाया गया है। उनके पिता डॉ. वकार अहमद शाह कैबिनेट मंत्री थे। वहीं, कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रोन्नत होने वाले शाहिद मंजूर मेरठ जिले की किठौर से लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए हैं। उनके पिता मंजूर अहमद भी कई बार मंत्री रह चुके हैं। शाहिद मेरठ लोकसभा सीट से सपा के प्रत्याशी भी हैं। इसी तरह इकबाल महमूद पांचवीं बार संभल से निर्वाचित हुए हैं। महबूब अली एक बार कांठ और तीन बार अमरोहा से चुनाव जीत चुके हैं। तीनों राज्यमंत्रियों को लोकसभा चुनाव से पहले मुस्लिम चेहरे के तौर पर कैबिनेट में शामिल किया गया है।
पांच कैबिनेट-पांच राज्यमंत्री
पहली बार किसी सरकार में पांच मुस्लिम कैबिनेट मंत्री हैं। अभी तक आजम खां, अहमद हसन और डॉ. वकार अहमद शाह काबीना मंत्री थे। डॉ. वकार गंभीर रूप से बीमार हैं और करीब छह महीने से मंत्रालय के कामकाज से दूर हैं। उन्हें मंत्री पद से मुक्त कर तीन और कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं। मंत्रिपरिषद में पांच राज्यमंत्री भी हैं। इनमें रियाज अहमद, फरीद महफूज किदवई, वसीम अहमद, कमाल अख्तर और यासर शाह शामिल हैं। सपा के कुल 40 मुस्लिम विधायक हैं। इनमें 10 मंत्री हैं, यानी औसतन हर चौथा मुस्लिम विधायक मंत्री है।
पश्चिमी यूपी की नुमाइंदगी बढ़ी
सपा सरकार में पश्चिमी यूपी से अभी तक केवल आजम खां ही कैबिनेट मंत्री थे। यूं तो राजेंद्र चौधरी भी गाजियाबाद जिले से हैं लेकिन उनका कार्यक्षेत्र लंबे समय से लखनऊ ही है। तीन और मंत्री बन जाने से वेस्ट यूपी से कैबिनेट में चार मंत्री हो गए हैं।
16वीं विधानसभा में मुस्लिमों की नुमाइंदगी
कुल विधायक--63
सपा से जीते--40
कुल मंत्री--10
कैबिनेट मंत्री---05
राज्यमंत्री--05
आजम विरोधी बने कैबिनेट मंत्री
जिन तीन राज्यमंत्रियों को प्रोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, उनके नगर विकास एवं अल्पसंख्क कल्याण मंत्री आजम खां से मधुर रिश्ते नहीं हैं। कई बार तो उनमें कड़वाहट सामने भी आई है। इसी महीने आजम खां मेरठ में एक गर्ल्स स्कूल का शिलान्यास करने गए तो शाहिद मंजूर उसमें शामिल नहीं हुए। यह सिलसिला लंबे वक्त से चल रहा है। कमोबेश ऐसे ही रिश्ते ‘नवाब साहब’ नाम से मशहूर इकबाल महमूद के आजम खां से हैं। उन्हें सपा की आजम विरोधी लॉबी में गिना जाता है।
रियाज और शहजिल को सियासी झटका
मंत्रिमंडल विस्तार और पुनर्गठन में पीलीभीत से पांच बार विधायक चुने जा चुके खादी ग्रामोद्योग राज्यमंत्री रियाज अहमद को झटका लगा है। वे सपा के वरिष्ठतम विधायकों में हैं। उन्हें पदोन्नति की उम्मीद थी। इसी तरह बरेली की भोजीपुरा सीट से विधायक शहजिल इस्लाम मंत्री बनने के दावेदार थे। प्रोन्नति पाने वालों में मेरठ मंडल से एक और मुरादाबाद मंडल के दो राज्यमंत्री शामिल हैं। बरेली मंडल को प्रमोशन का मौका नहीं मिल पाया।