विपक्ष को लेकर मुलायम ने भाजपा को दी खुली चुनौती!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा कि 1960 के दशक में डॉ. राम मनोहर लोहिया ने गैर कांग्रेसवाद का नारा देकर विपक्षी दलों को एकजुट किया था। अब भाजपा के खिलाफ यही काम वे कर रहे हैं। एकता पर दूसरे दलों को ऐतराज नहीं है। तीन दौर की बैठकें हो चुकी हैं, उम्मीद है जल्दी ही विपक्षी एक साथ आ जाएंगे।
मुलायम सिंह शनिवार को सपा मुख्यालय में प्रखर समाजवादी नेता बदरी विशाल पित्ती के जन्म दिवस पर आयोजित समारोह में बोल रहे थे। कहा, डॉ. लोहिया ने गैर कांग्रेस दलों को एक मंच पर जोड़ा था तब अयोध्या का मुद्दा नहीं था। इसी एकजुटता का नतीजा था कि आगे चलकर तत्कालीन प्रधानमंत्री भी चुनाव हारीं और उनके बेटे भी।
अब स्थितियां बदल गई हैं लेकिन दिल्ली में गैर भाजपा दलों को एकजुट करने का काम वह कर रहे हैं। इस मुद्दे पर बातचीत हुई है। अन्य दलों के नेता सहमत है। जब मजबूत होते हैं तो लोग स्वीकार कर लेते हैं, कमजोर को कोई स्वीकार नहीं करता।
डॉ. लोहिया के विचारों का लोहा दूसरे दलों के लोग भी मानते हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पंजाब विश्वविद्यालय में उनका भाषण सुना था। एक सम्मेलन में मार्क्सवादी नेता प्रकाश करात लोहिया की सप्त क्रांति पर बोले तो मैं चकित रह गया।
साहित्य पढ़ने वाले ही पाएंगे टिकट
मुलायम ने पार्टी नेताओं, खासतौर से युवाओं को समाजवादी साहित्य पढ़ने की सलाह दी। कहा, समाजवादी साहित्य खरीदने और पढ़ने वालों को ही चुनाव में पार्टी का टिकट दिया जाएगा।
उन्होंने नौजवानों से कहा, नारे लगाना अच्छी बात है, इससे जोश पैदा होता है पढ़ना भी शुरू करो। मेरी नजर उन पर है।
तीन-चार लड़के (युवा नेता) बोलते हैं तो समझ लेता हूं कि समाजवादी साहित्य पढ़ रहे हैं। लोहिया ट्रस्ट में पूरा समाजवादी साहित्य है। उनके भाषण भी रखे हैं।
चुनाव में हम टिकट उसी को देते हैं जो समाजवादी साहित्य लेता है। आजकल संगठन धड़ाधड़ बन रहे हैं। पता नहीं पार्टी पदाधिकारियों ने पार्टी (समाजवादी) का साहित्य पढ़ा भी या नहीं।
राज्य और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लोगों में भी पता नहीं कितनों ने साहित्य खरीदा है ? इस पर विचार करेंगे कि वही पदाधिकारी बने जिसने समाजवादी साहित्य खरीदा व पढ़ा हो। अध्यक्ष और महामंत्री वही बनेंगे जो साहित्य लेंगे और पढ़ेंगे।
बदरी न होते तो लोग लोहिया को समझ न पाते
सपा मुखिया ने बदरी विशाल पित्ती को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए समाजवादी आंदोलन में उनके योगदान को सराहा। कहा, उन्होंने डॉ. लोहिया का साहित्य लिखा व प्रकाशित न किया होता तो इतने लोग, डॉ. लोहिया को न जानते। उनकी मेहनत से लोग लोहिया को इतना समझ सके हैं।
पहली बार उन्होंने बदरी को फर्रुखाबाद चुनाव में देखा था। डॉ. लोहिया के निधन के बाद पूना सम्मेलन से उनसे नजदीकियां बढ़ीं। वह उद्योगपति परिवार से थे लेकिन गरीबों, किसानों की बात करते थे।
जातिवादी ताकतों की तरफ इशारा करते हुए मुलायम ने पूछा, क्या बदरी विशाल पिछड़े थे, क्या डॉ. लोहिया पिछड़े थे ? फिर कहा, वे पिछड़े नहीं थे लेकिन पिछड़ों, गरीबों, किसानों, मजदूरों और अल्पसंख्यकों की आवाज उठाते थे।
छोटी नदियां साफ किए बिना गंगा साफ नहीं होगी
मुलायम ने कहा, विपक्षी दलों के नेता आमतौर पर डॉ. लोहिया का अपने भाषणों में जिक्र करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी संसद सत्र में लोहिया के नदियां साफ करने के नारे का हवाला दिया।
कहा, हमने गंगा सफाई अभियान प्रारंभ किया है लेकिन नदियां और भी हैं। यदि गंगा में गिरने वाली नदियां साफ नहीं होंगी तो गंगा सफाई कैसे सफल हो पाएगी।