बूथ स्तर तक संगठन होता तो न हारते चुनाव: मुलायम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने सोमवार को सहारनपुर, नोएडा और लखनऊ पूरब सीट पर उपचुनाव में पार्टी की हार की समीक्षा की।
प्रभारी मंत्रियों, जिलाध्यक्षों, प्रत्याशियों और अन्य नेताओं से मिले फीडबैक के बाद उन्होंने कहा कि बूथ स्तर तक संगठन मजबूत होता तो इन सीटों पर भी पराजय न मिलती। उन्होंने सभी से कहा कि हार-जीत चुनाव का हिस्सा है। हार को पीछे छोड़कर आगे बढ़िए, संगठन को मजबूत बनाइए।
सपा को विधानसभा की 11 सीटों के उपचुनाव में आठ पर सफलता मिली है। जिन तीन सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, सोमवार को उन्हीं के प्रभारी, सहप्रभारी, प्रत्याशी, जिलाध्यक्ष और कुछ अन्य नेता बुलाए गए थे।
मुलायम सिंह ने हर सीट की अलग-अलग समीक्षा की। सबसे पहले सहारनपुर के नेताओं को बुलाकर हार की वजह पूछी।
हारने पर भी बढ़ा वोट प्रतिशत
इस सीट के प्रभारी मंत्री बलराम यादव ने कहा कि यदि हम मुसलमानों में और विश्वास कायम कर पाते तो उनके और ज्यादा वोट मिल सकते थे और ज्यादा मतदान हो सकता था।
श्रम मंत्री शाहिद मंजूर ने कहा, वैश्य जाति का उम्मीदवार इस उद्देश्य से उतारा गया था कि उन्हें सजातीय और अन्य जातियों के वोट मिलेंगे। मुस्लिम वोट तो मिले लेकिन अन्य जातियों के ज्यादा वोट नहीं मिल सके।
समाजवादी व्यापार सभा के अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल ने इससे असहमति जताई। उन्होंने कहा, हिंदू वोट भी अच्छी तादाद में मिले हैं।
यही वजह है कि जिस सीट पर 2012 में छह हजार वोट मिले थे, वहां इस बार हारकर भी 81 हजार से ज्यादा वोट मिले हैं। इन वोटों को सहेज कर रखने की जरूरत है। कई और नेताओं ने भी अपनी राय रखी।
विधायक ने की बदसलूकी
नोएडा की समीक्षा बैठक में प्रत्याशी और उनके परिजनों को लेकर सवाल उठाए गए। एक नेता ने कहा, प्रत्याशी काजल शर्मा के पति गुड्ड पंडित और देवर मुकेश शर्मा दोनों पार्टी विधायक हैं। मुकेश शर्मा का व्यवहार कार्यकर्ताओं के प्रति अच्छा नहीं रहा। कई लोगों ने तो बदसलूकी की भी शिकायत की। ऐसे में चुनाव में टीम वर्क नहीं हो पाया।
मुलायम सिंह ने सख्त रुख दिखाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही। इस पर गुड्डू पंडित ने उनकी तरफ से अफसोस जताया।
एक नेता का कहना था कि नोएडा क्षेत्र में अधिकतर वोट शहरी हैं। इस सीट पर नौकरीपेशा या बिजनेसमैन लोग ज्यादा रहते हैं। सभी पढ़े-लिखे हैं। वहां ऐसा प्रत्याशी होना चाहिए था जिस पर कोई अंगुली न उठा सके। उनका इशारा सपा प्रत्याशी के परिवार की छवि की तरफ था।
कम वोटिंग बनी हार की वजह
लखनऊ पूरब सीट की समीक्षा में कहा गया कि मुस्लिम मतदाताओं ने अच्छी तादाद में वोट दिया लेकिन दूसरे तबकों से उम्मीद के मुताबिक वोट नहीं मिल सके। नेताओं का कहना था कि बूथ प्रबंधन उतना प्रभावी नहीं रहा, जिस कारण वोटरों को मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंचाया जा सका।
भाजपा इस मामले में आगे रही। उसने अपने वोटरों को बूथ तक पहुंचा दिया। यहां कम मतदान भी पार्टी की हार का कारण बना।
बताई संगठन की महत्ता
मुलायम ने कहा कि चुनाव में हार-जीत होती रहती है। इससे आगे बढ़ने की जरूरत है। सहारनपुर में नेताओं के बीच हार के कारणों पर मतभेद पर उन्होंने कहा, संगठन कमजोर होने से चुनाव हारे हैं। हमारा संगठन मजबूत नहीं था।
यदि बूथ स्तर तक संगठन होता, सही प्रबंधन होता तो चुनाव जीत जाते। उन्होंने कहा, संगठन से बड़े-बड़े काम हो जाते हैं। बौद्ध धर्म तभी फैला जब अशोक ने संगठन तैयार किया।