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रामगोपाल को हटाने के बाद अब मुलायम के अगले कदम पर नजर, 25 को ले सकते हैं बड़ा फैसला

Fri, 22 Sep 2017 10:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 22 Sep 2017 10:00 AM IST
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Mulayam can take step to form a new front on sep 25.
मुलायम सिंह यादव

लोहिया ट्रस्ट के सचिव पद से रामगोपाल यादव को हटाने के बाद नजरें अब मुलायम सिंह यादव के अगले कदम पर हैं। वे लोहिया ट्रस्ट में 25 सितंबर को मीडिया से रू-ब-रू होंगे। माना जा रहा है कि वे कोई बड़ा राजनीतिक एलान कर सकते हैं।

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लोहिया ट्रस्ट के सचिव बनाए गए शिवपाल सिंह यादव ने बताया कि नेताजी 25 सितंबर को जो भी फैसला लेंगे, उसे स्वीकार करेंगे। सपा सूत्रों के मुताबिक संकेत ऐसे मिल रहे हैं कि मुलायम अलग राजनीतिक प्लेटफॉर्म बना सकते हैं। चर्चा है कि फिलहाल वे नए मोर्चे के गठन की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं।
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करारी हार के बाद भी नहीं थमी रार
सपा में विधानसभा चुनाव से पहले शुरू हुआ विवाद चुनाव में करारी पराजय के बाद भी खत्म नहीं हुआ है। इस विवाद में एक तरफ सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव व महासचिव रामगोपाल यादव हैं तो दूसरी तरफ हाशिये पर चल रहे संस्थापक अध्यक्ष मुलायम सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव हैं। लोहिया ट्रस्ट पर भी इस विवाद की छाया पड़ गई है।
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लोहिया ट्रस्ट के कार्यालय में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में रामगोपाल यादव को सर्वसम्मति से ट्रस्ट के सचिव पद से हटा दिया गया। सपा में उठापटक शुरू होने के बाद से वह मुलायम के निशाने पर हैं। बतौर अध्यक्ष मुलायम उन्हें पार्टी से बर्खास्त भी कर चुके हैं, हालांकि बाद में उन्हें पार्टी में वापस ले लिया गया।

मुलायम को अध्यक्ष पद से हटाने में मुख्य भूमिका रामगोपाल की ही थी

Mulayam can take step to form a new front on sep 25.

एक जनवरी 2017 को सपा का विशेष अधिवेशन बुलाकर मुलायम सिंह की जगह अखिलेश यादव को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया। इस अधिवेशन के आयोजन में मुख्य भूमिका रामगोपाल यादव की ही थी।

मुलायम को किनारे करने से सिमटी सपा
लोहिया ट्रस्ट की बैठक में डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों, सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया। चर्चा के दौरान प्रदेश में समाजवादी आंदोलन के कमजोर होने पर भी चिंता जताई गई। कहा गया कि जिस समाजवादी पार्टी ने अखिल भारतीय स्वरूप बनाया था, वह लगातार कमजोर हुई है। सपा विधायकों की संख्या 231 से घटकर 47 पर आ गई। सभी की राय थी कि मुलायम सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाए जाने का गलत संदेश गया है। इसके बावजूद सपा नेतृत्व कोई सबक नहीं ले रहा।

पहली बार सपा के सम्मेलनों से दूर रहेंगे मुलायम
मुलायम ने जिस समाजवादी पार्टी का गठन किया, 24 साल जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, प्रदेश में दो-दो बार सपा सरकार के मुख्यमंत्री रहे, वे पहली बार सपा के सम्मेलनों में नहीं दिखेंगे। शिवपाल सिंह यादव ने बताया कि 23 सितंबर के प्रदेश सम्मेलन और 5 अक्तूबर के राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए उन्हें या मुलायम सिंह को निमंत्रण नहीं मिला है।

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