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Lucknow News: एमटेक और एमबीए पास निकला लावारिस वार्ड में भर्ती मरीज
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बलरामपुर अस्पताल।
लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल के लावारिस वार्ड में एक सप्ताह पहले भर्ती हुआ मरीज एमटेक और एमबीए पास है। मरीज को खोजते-खोजते बुधवार को जब मरीज का कोलकाता निवासी परिवार पहुंचा तो इसकी जानकारी हुई। उसके घरवालों ने मरीज की देखरेख करने के लिए बलरामपुर अस्पताल प्रशासन को धन्यवाद दिया है।
बलरामपुर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवाशीष शुक्ला ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले आरपीएफ ने विक्षिप्त अवस्था में करीब 55 वर्षीय मरीज को चोटिल हालत में भर्ती कराया था। जांच करने पर पता चला कि मरीज को सिजोफ्रेनिया की समस्या थी। इस बीमारी में व्यक्ति को ऐसी बातों और लोगों का भ्रम होता है, जो वास्तव में होते ही नहीं हैं।
मरीज को भर्ती करके उपचार शुरू किया गया। इस दौरान मरीज खुद को भगवान शिव का पुत्र होने और उनसे सीधे बातचीत करने की बात दोहराता रहा। चार दिन पहले कोलकाता से एक फोन आया और उन्होंने कहा कि मेरा भाई आपके अस्पताल में भर्ती है। आरपीएफ ने उन्हें फोन कर भाई के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद परिवार अस्पताल पहुंचा तो लावारिस वार्ड में उनसे भेंट हो गई।
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मरीज के भाई प्रवेंदु ने बताया कि मरीज उनका खोया भाई दिव्येंदु बागची है। एमटेक और एमबीए करने के बाद दिव्येंदु ने कई नामी कंपनियों में काम किया। करीब 15 वर्ष पहले उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। उनकी पत्नी भी अवसाद में थीं। बीते आठ अगस्त को वे दिल्ली जाने की बात कहकर निकले थे। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया। प्रवेंदु ने बलरामपुर अस्पताल प्रशासन को मरीज का ध्यान रखने के लिए आभार जताया। अब वे फ्लाइट से अपने भाई को कोलकाता ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
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बलरामपुर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवाशीष शुक्ला ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले आरपीएफ ने विक्षिप्त अवस्था में करीब 55 वर्षीय मरीज को चोटिल हालत में भर्ती कराया था। जांच करने पर पता चला कि मरीज को सिजोफ्रेनिया की समस्या थी। इस बीमारी में व्यक्ति को ऐसी बातों और लोगों का भ्रम होता है, जो वास्तव में होते ही नहीं हैं।
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मरीज को भर्ती करके उपचार शुरू किया गया। इस दौरान मरीज खुद को भगवान शिव का पुत्र होने और उनसे सीधे बातचीत करने की बात दोहराता रहा। चार दिन पहले कोलकाता से एक फोन आया और उन्होंने कहा कि मेरा भाई आपके अस्पताल में भर्ती है। आरपीएफ ने उन्हें फोन कर भाई के बारे में जानकारी दी थी। इसके बाद परिवार अस्पताल पहुंचा तो लावारिस वार्ड में उनसे भेंट हो गई।
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मरीज के भाई प्रवेंदु ने बताया कि मरीज उनका खोया भाई दिव्येंदु बागची है। एमटेक और एमबीए करने के बाद दिव्येंदु ने कई नामी कंपनियों में काम किया। करीब 15 वर्ष पहले उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी। उनकी पत्नी भी अवसाद में थीं। बीते आठ अगस्त को वे दिल्ली जाने की बात कहकर निकले थे। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया। प्रवेंदु ने बलरामपुर अस्पताल प्रशासन को मरीज का ध्यान रखने के लिए आभार जताया। अब वे फ्लाइट से अपने भाई को कोलकाता ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।