फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   MSME: Timely payment and guarantee free loan claims limited to documents

एमएसएमई : समय पर भुगतान और गारंटी फ्री कर्ज के दावे दस्तावेज तक सीमित

Sun, 29 Jun 2025 01:45 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Sun, 29 Jun 2025 01:45 AM IST
विज्ञापन
MSME: Timely payment and guarantee free loan claims limited to documents
एमएसएमई : समय पर भुगतान और गारंटी फ्री कर्ज के दावे दस्तावेज तक सीमित
लखनऊ। एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर को मजबूती देने के लिए बनाई गई सरकारी योजनाएं विभाग की दोहरी नीतियों और बैंकों की शर्तों के चलते प्रभावहीन होती जा रही हैं। समय पर भुगतान और गारंटी फ्री कर्ज जैसे उपाय केवल दस्तावेज तक सीमित रह गए हैं, जिससे उद्यमियों को अपना व्यवसाय चलाना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
विज्ञापन


एमएसएमई को 45 दिन के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए नियम पर अमल नहीं हो रहा है। खुद सरकारी उपक्रम समय पर भुगतान नहीं कर रहे। उद्यमी हरजिंदर सिंह के अनुसार, विभाग को या तो इस नियम को प्रभावी रूप से लागू करना चाहिए या इसे समाप्त करना चाहिए। ढुलमुल रवैये से उद्यमियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि भुगतान तय समय पर नहीं होता, तो खरीदार को कर में छूट नहीं मिलती और ब्याज का बोझ भी उठाना पड़ता है। हरजिंदर सिंह ने सरकार से इसके लिए ऑटो ऑडिट प्रक्रिया लागू करने की मांग की है।
विज्ञापन


सीजीटीएमएसई योजना में बैंक नहीं दे रहे पूरी गारंटी फ्री कर्ज सुविधा

एमएसएमई के लिए घोषित क्रेडिट गारंटी योजना (सीजीटीएमएसई) का लाभ भी उद्यमियों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है। इस योजना में विभाग 5 करोड़ तक का कर्ज देने वाले बैंकों को अपनी तरफ से गारंटी प्रदान करता है। बैंकों की ओर से कर्ज देने से पहले कई जटिल जांच की जाती है, और कई बार वे मनमर्जी से आवेदन खारिज कर देते हैं। आईआईए लखनऊ चैप्टर के चेयरमैन विकास खन्ना बताते हैं कि कर्ज देने से पहले बैंक टर्नओवर, प्रोफिटैबिलिटी चेक करने समेत तमाम छानबीन करती है। इसके बावजूद कर्ज वितरण में मनमानी करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


उद्यमी व मानक ब्यूरो सदस्य हरजिंदर सिंह के अनुसार, बैंक पूरी राशि पर गारंटी फ्री कर्ज नहीं देते। उदाहरण के लिए, दो करोड़ रुपये के कर्ज में से केवल एक करोड़ ही बिना गारंटी के दिया जाता है, बाकी पर गारंटी मांगी जाती है। साथ ही विभाग को गारंटी शुल्क भी देना होता है, जिससे ब्याज दर बाजार दर से लगभग दो प्रतिशत अधिक हो जाती है। कुल मिलाकर, सरकार की मंशा कर्ज आसान बनाने की थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed