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यूपी के सवा सौ विधायकों पर दर्ज हैं गंभीर आपराधिक मामले, कोर्ट का आदेश नहीं मान रहीं पार्टियां

Fri, 14 Feb 2020 05:04 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Fri, 14 Feb 2020 05:04 PM IST
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More than 100 MLAs are alleged in serious criminal cases in UP Vidhansabha.
कुलदीप सिंह सेंगर, मुख्तार अंसारी, ब्रजेश सिंह (नीचे, बायें) व विजय मिश्र (नीचे दाएं) - फोटो : amar ujala

यूपी विधानसभा में 143 ऐसे विधायक हैं जिन पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसमें 101 विधायकों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज हैं। जिसमें हत्या, हत्या के प्रयास, छेड़छाड़ और धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं।

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एडीआर के आंकड़ों के मुताबिक यूपी विधानसभा में बीजेपी के 83, समाजवादी पार्टी के 11, बसपा के चार और कांग्रेस के एक विधायक के अलावा 3 अन्य विधायकों पर गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज है।
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एडीआर यूपी के संयोजक संजय सिंह बताते हैं कि न्यायालय के निर्देश पर पूर्व में भी आपराधिक छवि के उम्मीदवारों को प्रतिष्ठित अखबारों में विज्ञापन छापने, राजनैतिक दलों की वेबसाइट पर अपलोड कराने जैसे निर्देश दिए थे।
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इसकी निगरानी के लिए जिला स्तर पर जिलाधिकारियों को जिम्मेदारी भी दी गई थी, लेकिन अधिकतर उम्मीदवारों और राजनैतिक दलों ने इसका पालन ही नहीं किया। एक विधायक महिला से छेड़छाड़ के आरोपी हैं और 58 विधायकों के खिलाफ अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

कुलदीप, मुख्तार, ब्रजेश, विजय मिश्र जैसे बाहुबली

मौजूदा विधानसभा में 8 विधायक ऐसे हैं जिनपर हत्या का मुकदमा चल रहा है जबकि 34 विधायकों पर हत्या के प्रयास का मुकदमा चल रहा है। एक विधायक महिला से छेड़छाड़ के आरोपी हैं और 58 विधायकों के खिलाफ अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है।

इनमें 20 मंत्री भी शामिल हैं। मुख्तार अंसारी, ब्रजेश सिंह, राजा भैया, सुशील सिंह, विजय मिश्रा समेत कई बाहुबली इस समय विधायक हैं। मुख्तार और विजय मिश्र पर 16-16 मुकदमे दर्ज हैं। धौलाना के बसपा विधायक असलम अली पर 10 मामले दर्ज हैं। विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उम्रकैद की सजा पा चुका है लेकिन विधायक बना हुआ है।

15 वर्षों में दागी सांसदों की तादाद 20 फीसदी बढ़ी

लोकसभा में ही पिछले 15 वर्षों में दागी सांसदों की तादाद 20 फीसदी बढ़ी है। निचले सदन में मौजूदा करीब आधे सांसद आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं। पिछले चार लोकसभा चुनावों पर नजर डालें तो 2004 में 24 फीसदी सांसद दागी थे तो 2009 में इनकी संख्या छह फीसदी बढ़कर 30 फीसदी हो गई। वहीं, 2014 में इसमें इजाफा जारी रहा और 185 यानी 34 फीसदी दागी लोकसभा पहुंचे।

इस लिहाज से हर तीसरे सांसद पर कोई न कोई आपराधिक आरोप था। इनमें से 21 फीसदी पर तो गंभीर मामले थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में तो दागी सांसदों की तादाद 10 फीसदी और बढ़ गई। अब 43 फीसदी सांसदों पर मामले चल रहे हैं। इनमें से 29 फीसदी यानी 159 पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं। कांग्रेस के इड्डुकी (केरल) के सांसद डीन कुरियाकोस पर सबसे ज्यादा 204 मुकदमें हैं।

उम्रकैद की सजा के बाद भी कुलदीप सिंह सेंगर को बचाती रही भाजपा

विधानसभाओं का हाल भी ऐसा ही है। सभी राज्यों में ऐसे विधायक मिल जाएंगे जिन पर संगीन मुकदमे दर्ज हैं। दल इन्हें सियासी मुकदमे कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। उत्तर प्रदेश में तो भाजपा कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रकैद की सजा के बाद भी बचाती रही। अंतत: छिछालेदार के बाद उसे पार्टी से निकाला। आज भी वो विधायक है।

इनके अलावा हरिशंकर तिवारी, रघुराज प्रताप सिंह, अतीक अहमद, अमरमणि त्रिपाठी, धनंजय सिंह, ब्रजेश सिंह, सुशील सिंह आदि माफिया राजनीति में हाथ आजमा चुके हैं।

हाल में संपन्न हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 विधायकों में से 43 पर मुकदमें

दिल्ली विधानसभा...हाल में संपन्न हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 विधायकों में से 43 यानी 61% विधायकों पर मुकदमे हैं। इनमें से 37 पर गंभीर मामले। झारखंड में 81 में 44 विधायकों पर मामले हैं। यानी आधे से ज्यादा विधानसभा सदस्य दागी हैं। महाराष्ट्र में 176 विधायकों पर आपराधिक मामले हैं। यानी 62% दागी। वहीं, हरियाणा में 13% दागी विधायक हैं।

देश के 33% सांसद और विधायकों पर मुकदमे
अप्रैल 2018 की एडीआर रिपोर्ट के अनुसार, 4,845 सांसदों-विधायकों के हलफनामों के विश्लेषण में सामने आया कि 1,580 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

10 प्रमुख सांसदों पर हत्या के मामले

साध्वी प्रज्ञा सिंह (भोपाल) - भाजपा
निसिथ प्रमाणिक (कूच बिहार)  - भाजपा
अजय कुमार मिश्र (खीरी) - भाजपा
छतर सिंह दरबार (धार)  - भाजपा

अतुल राय (घोसी) - बसपा
अफजाल अंसारी (गाजीपुर) - बसपा
नाबा कुमार सरानिया (कोकराझार) - कांग्रेस
कुरुवा गोरान्तला माधव (हिन्दुपुर) - वाईआरसीपी

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