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यूपी में 20 जून तक आ सकता है मानसून, जल संचय को एक्शन में सरकार
Sun, 18 Apr 2021 07:24 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Sun, 18 Apr 2021 07:24 PM IST
सार
यूपी में 20 जून तक मानसून आ सकता है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। बारिश की एक-एक बूंद को सहेजने के लिए कमर कस ली है।
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मानसून (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
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विस्तार
यूपी में 20 जून तक मानसून आ सकता है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। बारिश की एक-एक बूंद को सहेजने के लिए कमर कस ली है। खासतौर पर बुंदेलखंड क्षेत्र समेत प्रदेश के अतिदोहित इलाकों के लिए विशेष तैयारी है। सरकार ने जल संग्रहण की 85 योजनाएं शुरू की हैं। उम्मीद है कि योजनाएं सूबे के सूखाग्रस्त और अतिदोहित इलाकों में पेयजल व खेती के लिए होने वाली पानी की किल्लत वर्षा जल से पूरी करेंगी।
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दरअसल प्रदेश सरकार ने केंद्र के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सहयोग से 2021-22 में वर्षा आधारित 31 जिलों समेत अतिदोहित व सूखा ग्रस्त क्षेत्रों के 4.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में जल संग्रहण की 85 परियोजनाओं को शुरू किया है।
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वर्षा जल संग्रहण परियोजना के जरिए इस साल सूखाग्रस्त इलाकों में पेयजल की समस्या काफी हद तक हल हो जाएगी। साथ ही किसानों को खेती के लिए आसानी से पानी भी मिल सकेगा। इसकी प्राथमिक परियोजना प्रतिवेदन (पीपीआर) तैयार करने की जिम्मेदारी ग्रेटर शारदा सहायक समादेश परियोजना अधिकारी को दी गई है।
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भूमि संसाधन विकास व केन्द्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के सहयोग से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-वाटरशेड योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके संचालन के लिए जिला स्तर पर वाटरशेड सेल कम डाटा सेंटर (डब्लूसीडीसी ) और ग्राम पंचायत स्तर पर जल संग्रहण समिति का गठन किया गया है। इस योजना के जरिए गांवों में जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण करा कर वर्षा जल एकत्र कर सूखे की स्थिति में जल की कमी को पूरा करना है।
पांच लाख से ज्यादा का किया है कौशल विकास
वित्तीय वर्ष 2009-10 से 2018-19 तक 21219 जल संरचनाओं का निर्माण करते हुए 53978 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अतिरिक्त सिंचन क्षमता विकसित की गई थी। इस योजना के जरिए 5,72,176 लाभार्थियों का कौशल विकास भी किया गया है। वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए कार्य योजना बन कर तैयार हो गई है। प्रदेश में 85 वर्षा जल संचयन परियोजनाओं के जरिए किसानों की पानी की किल्लत सरकार दूर करेगी।