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लखनऊः निर्माण परियोजनाओं में घपलों पर नजर रखेगी मॉनीटरिंग एंड ऑडिट अथॉरिटी

Thu, 24 Sep 2020 06:34 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 24 Sep 2020 06:34 AM IST
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Monitoring and Audit Authority will monitor scams in construction projects
सांकेतिक तस्वीर... - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश की निर्माण परियोजनाओं की लागत की जांच व गुणवत्ता की निगरानी के लिए मॉनीटरिंग एंड ऑडिट अथॉरिटी के गठन का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए उच्चस्तर पर सहमति बन चुकी है। जल्द ही संबंधित प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। इस अथॉरिटी में पीडब्ल्यूडी के एक सेवानिवृत्त विभागाध्यक्ष को अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।

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निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी पर प्रभावी रोक और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इस अथॉरिटी के गठन का निर्णय लिया गया है। कुछ समय पहले इस बाबत मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुतिकरण भी दिया जा चुका है। प्रस्ताव के अनुसार, अथॉरिटी का गठन नियोजन विभाग के अंतर्गत किया जाएगा। परियोजनाओं की रचना, मूल्यांकन, मॉनीटरिंग, ऑडिट और अभिनव प्रयोग इसके मुख्य उद्देश्य होंगे। इसके माध्यम से परियोजना रचना एवं मूल्यांकन प्रभाग के कार्यों का पर्यवेक्षण किया जाएगा। 
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पांच करोड़ रुपये से अधिक और 25 करोड़ रुपये तक के विभिन्न विभागों की परियोजनाओं (जहां मुख्य अभियंता न हों) का परीक्षण किया जाएगा। 25 करोड़ रुपये से अधिक लागत की परियोजनाओं में व्यय वित्त समिति को अथॉरिटी तकनीकी सहयोग देगी। 10 प्रतिशत से अधिक लागत वृद्धि वाली परियोजनाओं और छह माह से अधिक कार्य अवधि वृद्धि वाली परियोजनाओं की तिमाही समीक्षा करने की जिम्मेदारी होगी।
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मॉनीटरिंग एंड ऑडिट अथॉरिटी त्वरित आर्थिक एवं विकास योजना, बीएडीपी, बुंदेलखंड पैकेज, पूर्वांचल एवं बुंदेलखंड विकास बोर्ड आदि की योजनाओं पर तकनीकी सुझाव देगी। इसमें सलाहकार प्राविधिक के पद पर प्रमुख अभियंता स्तर के कार्यरत या सेवानिवृत्त अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा सिविल-प्राविधिक, परियोजना मूल्यांकन, वास्तुविद और आर्थिक व वित्तीय मूल्यांकन के लिहाज से तीन विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी।

तैयार प्रस्ताव के अनुसार, सलाहकार प्राविधिक ऑनलाइन मॉनीटरिंग टूल विकसित कर प्रशासकीय विभाग को उपलब्ध कराएंगे। राज्य स्तर पर निगरानी की व्यवस्था देखेंगे। निर्माण कार्यों में आवश्यकता से अधिक भुगतान करने, अनियमितता, दोषपूर्ण निर्माण एवं भ्रष्टाचार की जांच के लिए सिंचाई एवं लोक निर्माण विभाग में गठित टेक्निकल ऑडिट सेल को भविष्य में समाप्त करके यह जिम्मेदारी भी इस अथॉरिटी को दी जा सकती है।


परियोजनाओं में तकनीकी दक्षता का अभिनव प्रयोग और पर्यावरण अनुकूल नई तकनीक निर्माण को बढ़ावा देने का काम करेगी। नियोजन विभाग के अधीन योजना मॉनीटरिंग प्रभाग, मूल्यांकन और परियोजना रचना प्रभाग सलाहकार, प्राविधिक के मार्गदर्शन में काम करेंगे। सलाहकार प्राविधिक परियोजनाओंं की मासिक समीक्षा करेंगे। लागत व समय वृद्धि की समीक्षा डैश बोर्ड के माध्यम से की जाएगी। समय-समय पर नियोजन विभाग के स्तर से सौंपे गए अन्य महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करना भी उसकी जिम्मेदारी में शामिल होगा।

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