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यू ट्यूब पर अपना चैनल चलाने वाले मोहित ने साझा की सीए बनने की रोचक कहानी

Wed, 18 Jan 2017 03:45 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Wed, 18 Jan 2017 03:45 PM IST
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mohit amarnani qualified in ca exam
मोह‌ित अमरनानी - फोटो : amar ujala
राजधानी में सीए बने करीब 35 युवाओं में शामिल मोहित अमरनानी को यह सफलता छठवें प्रयास में मिली है। उनकी यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने इसे हासिल करने के लिए ‘नेवर क्विट’ दृष्टिकोण अपनाया।
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‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने अपनी तैयारियों और जीवन के बारे में कई रोचक बातें शेयर कीं। गायन के शौकीन मोहित यू-ट्यूब पर अपना चैनल भी चलाते हैं, जिसमें वह अपने लिखे गीत, कंपोज किए म्यूजिक के साथ प्रस्तुत करते नजर आते हैं।
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क्लास 12 में डॉन बॉस्को स्कूल से पढ़ते हुए उत्तराखंड में 2010 के सीबीएसई टॉपर रहे हैं। इतना ही नहीं उत्तराखंड की अंडर 19 क्रिकेट टीम के लिए भी चुने गए थे, हालांकि परीक्षाओं की वजह से इसमें शामिल नहीं हुए।
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मोहित के पिता महेश लखनऊ में होटेलियर और चिकन कारोबारी हैं और मां रचना गृहिणी। उन्होंने बताया कि क्लास 12 में मेरिट में आने के बाद सीपीटी में पहले प्रयास में पास हो गए थे। इस बीच अपने गायन और पिता के कारोबार से जुड़ गए और वहां ध्यान लगाए रखा।

सीए फाइनल में आए तो यहां सेकंड ग्रुप में मुश्किल आने लगी। मोहित ने बताया कि यहां पहले प्रयास में उन्हें सेकंड ग्रुप में 400 में से 140 अंक मिले। इसके बाद लगातार चार प्रयास किए और हर बार फेल।

आमतौर पर सीए फाइनल स्टूडेंट्स तीन-चार प्रयास में फेल होने के बाद कोर्स छोड़ देते हैं। मोहित बताते हैं कि जो स्टूडेंट्स उनके फाइनल में पहुंचने पर सीपीटी में थे, वे उनके सहपाठी होने को तैयार थे।

मार्क्सशीट प्रतिभा का सर्टिफिकेट नहीं

mohit amarnani qualified in ca exam
मोह‌ित अमरनानी - फोटो : amar ujala

यह किसी  के भी लिए अजब स्थिति हो सकती थी, लेकिन मोहित ने इससे खुद को प्रभावित नहीं होने दिया। वे बताते हैं कि पांचवें प्रयास में उन्हें 193 अंक मिले थे, यानी केवल सात अंकों की वजह से वे सीए होने से रह गए, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।

छठवां प्रयास किया और मंगलवार को जब सीए चैप्टर से फोन कर बताया गया कि वे पास हो गए हैं तो उन्हें समझ नहीं आया इसे कैसे सही मानें। आईसीएआई की वेबसाइट क्रैश हो चुकी थी।

फिर चैप्टर से पास विद्यार्थियों की सूची में उनका नाम उन्हें वॉट्सएप किया गया, तब वे आश्वस्त हुए। मोहित को 202 अंक मिले हैं। मोहित ने बताया कि क्लास 12 का टॉपर होने और सीपीटी पहले प्रयास में पास करने के बावजूद उन्हें फाइनल के लिए छह प्रयास करने पड़े।

वह इसे उन विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरक कहानी के तौर पर बताना चाहते हैं जो सीए परीक्षा में कुछ प्रयास बेकार होने पर कोर्स छोड़ देते हैं। साथ ही उन अभिभावकों को भी संदेश देना चाहते हैं जो अपने बच्चों को अच्छे अंक लाने के लिए दबाव डालते हैं, जबकि ये मार्क्स उनकी प्रतिभा का सर्टिफिकेट नहीं हैं। जीवन में सफलता इनसे नहीं आंकी जानी चाहिए, बल्कि युवाओं को वह करने देना चाहिए जिसमें वे अपना सर्वश्रेष्ठ समाज को दे सकते हों।

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