मोहनलालगंज कांड के दरिंदे को मिली आजीवन कारावास की सजा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आरोपी रामसेवक को फास्ट ट्रैक कोर्ट के एडीजे अनिल कुमार शुक्ला ने शुक्रवार को दोषी ठहराया था। 29 महीने पहले हुए इस जघन्य कांड में आज दोषी को आजीवन कारावास और 13 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी गई है। कोर्ट ने रेप, हत्या और साक्ष्य छिपाने के दोष सिद्ध हो जाने पर हत्यारे को ये सजा दी।
बलसिंहखेड़ा गांव के प्राथमिक विद्यालय में 17 जुलाई 2014 की सुबह युवती का निर्वस्त्र शव मिलने से हड़कंप मच गया था। घटनास्थल पर चारों तरफ खून बिखरा था। युवती के शरीर पर चोटों के निशान थे। यह आशंका जताई जा रही थी कि युवती से गैंगरेप के बाद उसकी हत्या की गई है।
गांव के चौकीदार नोखेलाल की तरफ से मोहनलालगंज कोतवाली में युवती की रेप के बाद हत्या की धारा में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। अधिकारियों का कहना था कि वारदात में चार-पांच बदमाश शामिल हो सकते हैं।
चौबीस घंटे बाद मृतका की शिनाख्त पीजीआई थाना क्षेत्र में रहकर एक प्रतिष्ठित अस्पताल में नर्स की नौकरी करने वाली देवरिया की युवती के रूप में हुई थी। पुलिस ने बलसिंहखेड़ा गांव में ही रहने वाले व एक कंपनी के सिक्योरिटी गार्ड रामसेवक यादव को गिरफ्तार कर वारदात के खुलासे का दावा किया था।
सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने से मच गया था हड़कंप
युवती के निर्वस्त्र शव की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने का संभवत: यह पहला सनसनीखेज मामला था। जिस वक्त बलसिंहखेड़ा के प्राथमिक विद्यालय में युवती का शव मिला, दस किलोमीटर दूर जबरौली गांव में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन भ्रमण पर आए थे।
व्हाट्सएप और फेसबुक के जरिए पलक झपकते ही युवती से दरिंदगी के फोटो देश के कोने-कोने के अलावा अमेरिका तक पहुंच गए थे। युवती का शव ढकने के बजाए फोटो खींचते पाए गए मोहनलालगंज के तत्कालीन इंस्पेक्टर कमरुद्दीन को तत्कालीन एसएसपी प्रवीण कुमार ने सस्पेंड कर दिया था।
पति की मौत के बाद दो बच्चों के साथ अकेली रहती थी युवती
युवक यहां एक बड़े अस्पताल में संविदा पर नौकरी करता था। दोनों के एक 13 साल की बेटी और छह साल का बेटा था। किडनी खराब होने से युवक की मौत हो गई। युवती यहां पीजीआई थाना क्षेत्र में अकेले किराये के मकान में रहकर बच्चों को पाल रही थी।
रामसेवक पहले युवती के अस्पताल में ही गार्ड था लेकिन बाद में पास ही एक निर्माणाधीन अपार्टमेंट में सुरक्षाकर्मी बनकर चला गया। युवती पर पहले से ही उसके नजरें थीं।
एकाध बार युवती फ्लैट देखने के लिए निर्माणाधीन अपार्टमेंट में आई तभी रामसेवक ने उसे बुलाने की साजिश रची। उसने फर्जी आईडी से सिमकार्ड खरीदकर युवती से बातचीत की और मिलने के लिए बुला लिया। वारदात वाली रात वह बाइक से हेलमेट पहनकर युवती को अपने साथ बलसिंहखेड़ा प्राथमिक विद्यालय ले गया।
बेरहमी से किया था कत्ल
चाबी से ही उसके निजी अंगों में चोट पहुंचाई, जिससे रक्तस्त्राव हुआ और युवती की मौत हो गई। हालांकि, इस कहानी में कई सवाल ऐसे भी थे जिनके जवाब पुलिस नहीं दे सकी थी।
पुलिस के खुलासे पर सवाल उठे तो प्रदेश सरकार ने केस की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति की थी। सीबीआई की टीम ने पुलिस की विवेचना और घटनास्थल का निरीक्षण किया। रामसेवक व युवती के परिवार के सदस्यों से बातचीत की। सीबीआई ने पुलिस की विवेचना को संतोषजनक बताते हुए केस की छानबीन अपने हाथ में लेने से इन्कार कर दिया था।
डीआईजी ने कहा था, झूठ निकला खुलासा तो छोड़ दूंगा इनवेस्टिगेशन
इसके बाद भी वारदात के खुलासे पर सवाल उठे तो डीआईजी ने फेसबुक पर पोस्ट लिखकर कहा था कि अगर मोहनलालगंज कांड का खुलासा गलत साबित हुआ तो वह भविष्य में कोई इनवेस्टिगेशन नहीं करेंगे।
कब क्या हुआ
16 जुलाई की रात युवती के साथ प्राथमिक विद्यालय में दरिंदगी हुई
17 जुलाई की सुबह उसका निर्वस्त्र शव विद्यालय परिसर में मिला
20 जुलाई को पुलिस ने सिक्योरिटी गार्ड रामसेवक को गिरफ्तार किया