जानें, यूपी चुनाव के लिए क्यों खास है मोदी का लखनऊ दौरा
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का 22 जनवरी का लखनऊ दौरा उनके दलित एजेंडे को आगे बढ़ाता दिख रहा है। उनके एक दिन के इस दौरे में अगर कोई नाम दिन भर गूंजते सुना जाएगा तो वह है संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर का।
प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी यह पहली लखनऊ यात्रा डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के साथ शुरू होगी और अंबेडकर महासभा में रखे बाबा साहब के अस्थि कलश के दर्शन के साथ समाप्त होगी।
प्रतीकों के सहारे एजेंडे को धार देने वाले शख्स के रूप में पहचान बना चुके मोदी का लखनऊ दौरा भी अंबेडकर के सहारे उनके दलित हितैषी चेहरे को और चमकाने की कोशिश मानी जा रही है।
राजनीतिक समीक्षकों का कहना है कि भले ही भाजपा या भगवा टोली के रणनीतिकार मोदी की इस यात्रा के सियासत से जुड़े होने से इन्कार करें लेकिन यह बात किसी के गले आसानी से नहीं उतरने वाली।
भले ही मोदी अंबेडकर महासभा के कार्यालय राज्यपाल राम नाईक की पहल पर पहुंच रहे हों लेकिन अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में हिस्सेदारी और फिर अंबेडकर महासभा जाना सिर्फ संयोग नहीं माना जा सकता।
इसके पीछे कहीं न कहीं सूबे की 24 प्रतिशत दलित आबादी है जो यहां के चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ये है यूपी का गणित
प्रदेश की इस दलित आबादी का 55 प्रतिशत जाटव बिरादरी है। यह वोट परंपरागत रूप से बसपा का समर्थक माना जाता है।
पर, गैर जाटव बिरादरी में 16 प्रतिशत पासी, 6.50 प्रतिशत भागीदारी वाली धोबी, 5.39 प्रतिशत कोरी, 3 प्रतिशत वाल्मीकि और अन्य बिरादरियों की 14 प्रतिशत आबादी चुनावी रुझान और समीकरणों के साथ वोट देती रही है।
पिछले लोकसभा चुनाव में इनका ज्यादातर वोट भाजपा के पक्ष में गया था। तभी भाजपा को सूबे की सभी 17 सुरक्षित सीटों पर जीत मिली थी।
मोदी की कोशिश इस वोट को भाजपा के साथ बांधे रखने की है। स्वाभाविक रूप से इसके लिए अंबेडकर से बेहतर नाम कोई दूसरा नहीं हो सकता।
दिल्ली व मध्य प्रदेश में बनाया स्मारक
इससे पहले अभी परिनिर्वाण दिवस पर उप्र भाजपा की तरफ से बंटे फोल्डर में भी यही बताने की कोशिश की गई थी कि डॉ. अंबेडकर के नाम पर भाजपा और मोदी सरकार से ज्यादा किसी ने काम नहीं किया।
वाजपेयी सरकार के समय दिल्ली में अलीपुर रोड स्थित कोठी को भाजपा ने संबंधित भवन स्वामी से खरीदकर उसे अंबेडकर संग्रहालय बनवाने की योजना बनाई थी।
मोदी की पहल पर अब इसे अंबेडकर स्मारक घोषित किया गया है। मध्य प्रदेश में सुंदरलाल पटवा के सीएम रहते महू में डॉ. अंबेडकर स्मारक बनना शुरू हुआ था।
वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे पूरा कराने के साथ महू को डॉ. अंबेडकरनगर जिला घोषित किया। यहां आने वालों के लिए आवास और भोजन की व्यवस्था मप्र सरकार करती है। अब मोदी सरकार ने इस स्थान के विस्तारीकरण की घोषणा की है।
...इसके सामने बसपा के काम नही ठहरते
भाजपा सरकार और पार्टी दोनों स्तर से लगातार यह प्रचार किया जा रहा है कि मोदी सरकार ने अंबेडकर के सम्मान में काफी काम कराए हैं। इसके सामने बसपा के काम नहीं ठहरते।
प्रचार किया जा रहा है कि अंबेडकर की दीक्षा भूमि नागपुर में महाराष्ट्र की पूर्व भाजपा सरकार ने इस स्थल को संरक्षित कराकर रमणीक स्थल के रूप में विकसित कराया।
अब मोदी की पहल पर वहां की मौजूदा सरकार ने डॉ. अंबेडकर के अंत्येष्टि स्थल को भव्य रूप देने का काम शुरू किया है। इस जमीन (चैत्य भूमि) के पास स्थित इंदु मिल को लेकर उसे भी इसमें शामिल किया जा रहा है। यहां जाने वालों के लिए आवास व भोजन की व्यवस्था भी की जाएगी।
डॉ. अंबेडकर के पैतृक आवास चिंचौली (नागपुर) का भी विकास कराया जा रहा है। उनके घर रखे टाइपराइटर मशीन से लेकर अन्य वस्तुओं के संरक्षण और सुरक्षा की योजना बनाई गई है। एक स्थानीय महिला से दान में मिली लगभग 12 एकड़ जमीन पर संग्रहालय बनवाया जा रहा है।
लंदन के अंबेडकर के मकान को भी खरीदा
यह भी बताया जा रहा है कि मोदी सरकार दिल्ली के 15 जनपथ रोड स्थित बंगले का अधिग्रहण कराके यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का डॉ. अंबेडकर संग्रहालय बनवाएगी। इसके लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपये की योजना बनाई है।
केंद्र सरकार ने लंदन में उस मकान को खरीदकर उसे डॉ. अंबेडकर छात्रावास बनाने का फैसला किया है जिसमें पढ़ाई के दौरान अंबेडकर रहते थे।
लंदन पढ़ने जाने वाले देश के दलित छात्रों को इसमें रहने खाने की सुविधा दी जाएगी।